भतीजी की पैरवी वाले केस से छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के जज ने खुद को किया अलग,  रजिस्ट्रार के पत्र पर जजों ने जताई आपत्ति

Chhattisgarh High Court

रायपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट (Chhattisgarh High Court) की एक खंडपीठ ने जज की भतीजी के वकील के रूप में पेश होने वाले मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। साथ ही मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर रजिस्ट्रार द्वारा जारी एक पत्र पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे न्यायालय के कामकाज में हस्तक्षेप बताया है।

यह मामला उस समय सामने आया जब जस्टिस संजय एस. अग्रवाल और जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की खंडपीठ एक वैवाहिक अपील की सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि इस मामले में जस्टिस अग्रवाल की भतीजी एक कनिष्ठ वकील के रूप में पेश हुई हैं। संभावित विवाद से बचने के लिए खंडपीठ ने मामले की सुनवाई से खुद को अलग (रिक्यूज) कर लिया।

पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी प्रकार के अनावश्यक विवाद से बचने के लिए यह उचित नहीं होगा कि इस मामले की सुनवाई उसी पीठ द्वारा की जाए, जिसमें संबंधित न्यायाधीश शामिल हों। इसके बाद मामले को ऐसी पीठ के समक्ष सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया गया, जिसमें जस्टिस अग्रवाल शामिल न हों।

मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने हाल ही में रजिस्ट्रार द्वारा जारी उस परिपत्र का भी उल्लेख किया, जिसे मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर जारी किया गया था। इस परिपत्र में कहा गया था कि न्यायाधीशों द्वारा सुनवाई से अलग होने (रिक्यूजल) की प्रक्रिया को सामान्य नियम नहीं बनाया जाना चाहिए और इसे केवल दुर्लभ परिस्थितियों में ही अपनाया जाना चाहिए।

खंडपीठ ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि किस मामले में अपवाद लागू करना है और अदालत को कैसे काम करना है, यह निर्णय संबंधित पीठ का विशेषाधिकार है। इसे किसी भी तरह के निर्देश या प्रतिबंध से नियंत्रित नहीं किया जा सकता।

पीठ ने स्पष्ट किया कि अदालत के कामकाज और मामलों की सुनवाई से जुड़ा निर्णय न्यायाधीशों के विवेक और न्यायिक स्वतंत्रता का हिस्सा है। ऐसे मामलों में किसी भी तरह के बाहरी निर्देश को उचित नहीं माना जा सकता।

यह मामला न्यायाधीशों द्वारा मामलों से अलग होने (रिक्यूजल) की प्रक्रिया को लेकर चल रही राष्ट्रीय स्तर की बहस के बीच सामने आया है, जिसके चलते यह फैसला काफी चर्चा में है।

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