माकपा ने उठाया सवाल : किसे विधर्मी मान रहे सीएम साय

March 21, 2026 9:10 PM
Chhattisgarh Freedom of Religion Bill

रायपुर। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की छत्तीसगढ़ राज्य समिति ने प्रदेश सरकार के नए धर्म स्वातंत्र्य विधेयक 2026 की कड़ी आलोचना की है।

पार्टी का कहना है कि 2006 में विधानसभा में पारित पुराने कानून को वापस लेकर लाया गया यह नया विधेयक संविधान के उस अधिकार पर हमला है, जो हर नागरिक को अपनी पसंद का धर्म चुनने की आजादी देता है। माकपा ने इसे भाजपा सरकार का साम्प्रदायिक एजेंडा बताया, जिसका मकसद अल्पसंख्यक समुदायों, खासकर ईसाई और आदिवासी लोगों में डर पैदा करना है।

पार्टी ने मुख्यमंत्री और सीएमओ की उन पोस्ट्स का जिक्र किया, जिसमें “विधर्मी” शब्द का इस्तेमाल हुआ है। माकपा ने सवाल उठाया कि सरकार किसे विधर्मी मान रही है और इसका खुलासा होना चाहिए।

माकपा ने प्रदेश में ईसाई आदिवासियों के साथ हो रहे व्यवहार, झूठे धर्मांतरण के आरोपों और सरकारी संरक्षण में बढ़ती घटनाओं की निंदा की।

 पार्टी ने केरल के भाजपा नेताओं द्वारा दुर्ग में एक नन की घटना पर छत्तीसगढ़ सरकार की आलोचना का हवाला दिया, जिससे सरकार के दोगले रवैये का पता चलता है।

इसके अलावा, ईसाई आस्था रखने वाले आदिवासी परिवारों के मृतकों के शव दफनाने में रोड़े अटकाने और अपमान की घटनाओं को भी पार्टी ने अल्पसंख्यकों के खिलाफ घृणा का दुखद उदाहरण बताया।

माकपा ने सरकार से पूछा कि पुराने 2006 के कानून के दौरान कितने धर्मांतरण के मामले दर्ज हुए और कितने आदिवासियों को जबरन “घर वापसी” के नाम पर हिंदू धर्म में लाया गया। पार्टी का आरोप है कि मुख्यमंत्री द्वारा अपनी पार्टी या सरकार से असहमत लोगों को “विधर्मी” कहना संविधान का खुला उल्लंघन है।

राज्य सचिव बाल सिंह आंडील्य के हस्ताक्षर वाले प्रेस वक्तव्य में माकपा ने कहा कि प्रदेश की आम जनता इस सांप्रदायिक मुहिम का पुरजोर विरोध करती है। पार्टी ने सभी लोकतांत्रिक ताकतों से इस विधेयक के खिलाफ आवाज उठाने और भाजपा से नफरत फैलाने वाले एजेंडे से पीछे हटने की मांग की है।

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