रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा ने बजट सत्र के अंतिम दिन छत्तीसगढ़ उपकर (संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया है। इस महत्वपूर्ण फैसले से अचल संपत्ति जैसे जमीन, मकान, दुकान आदि की रजिस्ट्री पर लगने वाला अतिरिक्त उपकर (सेस) पूरी तरह समाप्त हो गया है।
पिछली सरकार में वर्ष 2023 में ‘राजीव गांधी मितान क्लब योजना’ के लिए स्टांप ड्यूटी के अतिरिक्त 12 प्रतिशत उपकर लगाया गया था, लेकिन अब योजना बंद होने के कारण यह बोझ हटा दिया गया है। विभिन्न स्रोतों के अनुसार, यह उपकर मूल रूप से बाजार मूल्य पर आधारित था और अब रजिस्ट्री प्रक्रिया सस्ती हो गई है। इससे राज्य के लगभग 3 करोड़ नागरिकों को सालाना करीब 150 करोड़ रुपये की बचत होने का अनुमान है।
वाणिज्यिक कर एवं वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने सदन में बताया कि यह कदम किसानों, मध्यमवर्गीय परिवारों और आम लोगों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। उदाहरण के तौर पर, 1 करोड़ रुपये की संपत्ति रजिस्ट्री पर पहले लगने वाला अतिरिक्त बोझ अब नहीं उठाना पड़ेगा।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस फैसले को लाखों परिवारों के घर-जमीन के सपनों को सम्मान देने वाला बताया। उन्होंने कहा कि सरकार का मकसद राजस्व कमाना नहीं, बल्कि लोगों का जीवन आसान और किफायती बनाना है।









