रायपुर/भोपाल। छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। दोनों राज्यों में 27 अप्रैल को विधानसभा का विशेष सत्र (Special assembly sessions) बुलाया गया है। इस सत्र में विपक्षी पार्टियों के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाए जाने की तैयारी है।
जानकारी के मुताबिक, सत्तारूढ़ दल का आरोप है कि विपक्ष ने हाल के दिनों में सदन और सार्वजनिक मंचों पर ऐसे बयान दिए हैं, जो लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ हैं। इसी को लेकर सरकार की ओर से निंदा प्रस्ताव लाने की रणनीति बनाई गई है।
छत्तीसगढ़ में सरकार का कहना है कि विपक्ष लगातार राजनीतिक माहौल को भड़काने और गलत आरोप लगाने का काम कर रहा है। इसलिए विधानसभा के विशेष सत्र में इस मुद्दे पर चर्चा कर निंदा प्रस्ताव लाया जाएगा।
वहीं मध्यप्रदेश में भी इसी तरह की तैयारी की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार विपक्ष के कुछ नेताओं के बयानों को लेकर कड़ा रुख अपनाने के मूड में है और सदन में औपचारिक रूप से इसकी निंदा करने की योजना बनाई गई है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विशेष सत्र में इस मुद्दे पर तीखी बहस होने की संभावना है। विपक्षी दल भी सरकार के इस कदम का विरोध कर सकते हैं और इसे राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिश बता सकते हैं।
अब सबकी नजर 27 अप्रैल को होने वाले विशेष सत्र पर है, जहां यह साफ होगा कि सरकार किस मुद्दे को आधार बनाकर विपक्ष के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाती है और उस पर सदन में क्या रुख सामने आता है।











