अहमदाबाद | गुजरात के अहमदाबाद में किताबें पढ़कर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों और नागरिकों पर कथित हमले को लेकर विवाद बढ़ गया है। क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच (RCF) ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए आरोप लगाया है कि प्रदर्शनकारियों पर दक्षिणपंथी समूह से जुड़े लोगों ने हमला किया। संगठन ने आरोपियों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज करने और निष्पक्ष जांच की मांग की है।
RCF की ओर से 29 अगस्त को जारी प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, अहमदाबाद के वस्त्रापुर इलाके में “स्टूडेंट्स एंड यूथ कलेक्टिव” के आह्वान पर विद्यार्थियों और नागरिकों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारी कथित तौर पर “I Am Malala” और “The Diary of Anne Frank” जैसी किताबें पढ़कर गुजरात शिक्षा विभाग की उस कार्रवाई का विरोध कर रहे थे, जिसे लेकर विवाद सामने आया है।
किताबें पढ़कर किया गया विरोध
RCF का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में युवा और अलग-अलग पीढ़ियों के नागरिक मौजूद थे। संगठन के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने किसी तरह का टकराव करने के बजाय शांतिपूर्ण तरीके से बैठकर किताबें पढ़ीं।
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि प्रदर्शन का उद्देश्य स्कूलों में किताबों, शिक्षा और विचारों की स्वतंत्रता के मुद्दे को उठाना था। RCF ने दावा किया कि इसी दौरान कुछ लोगों ने प्रदर्शन स्थल पर पहुंचकर वहां मौजूद लोगों के साथ हिंसा की।
हालांकि, इस प्रेस विज्ञप्ति में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि का दावा नहीं किया गया है। हमले में शामिल लोगों और घटना की पूरी परिस्थितियों को लेकर पुलिस या अन्य संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष इस बयान में शामिल नहीं है।
‘I Am Malala’ और ‘The Diary of Anne Frank’ को लेकर क्यों है विवाद?
विवादित पुस्तकों में मलाला यूसुफजई की आत्मकथात्मक पुस्तक “I Am Malala” भी शामिल है। RCF ने कहा है कि मलाला दुनिया भर में लड़कियों की शिक्षा के अधिकार के लिए आवाज उठाने के लिए जानी जाती हैं। संगठन ने पुस्तक को लेकर धर्म परिवर्तन की आशंकाओं को निराधार बताया है।
दूसरी पुस्तक “The Diary of Anne Frank” है। ऐन फ्रैंक की डायरी नाजी शासन के दौरान उनके जीवन और उत्पीड़न के अनुभवों का दस्तावेज है। यह किताब दुनिया भर में द्वितीय विश्व युद्ध, नाजी उत्पीड़न और यहूदी नरसंहार के ऐतिहासिक संदर्भ को समझने के लिए व्यापक रूप से पढ़ी जाती है।

RCF का तर्क है कि स्कूल के पुस्तकालय में अलग-अलग विचारों, संस्कृतियों और ऐतिहासिक अनुभवों से जुड़ी किताबें विद्यार्थियों को व्यापक दृष्टिकोण विकसित करने में मदद करती हैं।
पुलिस से FIR और निष्पक्ष जांच की मांग
क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों को कथित हमले के संबंध में FIR दर्ज कराने के लिए पुलिस थाने में काफी समय तक प्रयास करना पड़ा। संगठन ने आरोप लगाया कि हमले में शामिल लोगों के खिलाफ अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।
RCF ने गुजरात सरकार और शिक्षा विभाग से पूरे मामले पर जवाब देने की मांग की है। संगठन ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा के आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
RCF ने सरकार के सामने रखीं ये मांगें
क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच ने अपनी प्रेस विज्ञप्ति में चार प्रमुख मांगें रखी हैं—
- प्रदर्शनकारियों पर हमला करने के आरोपियों के खिलाफ तत्काल FIR दर्ज की जाए।
- घटना की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कर सभी आरोपियों की पहचान की जाए।
- दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।
- गुजरात सरकार और शिक्षा विभाग किताबों तथा विचारों को लेकर उठे विवाद पर अपना स्पष्ट पक्ष सामने रखें।
RCF ने कहा है कि पुस्तकालयों और शैक्षणिक संस्थानों को सेंसरशिप तथा हिंसा का केंद्र नहीं बनने दिया जाना चाहिए। संगठन ने शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों और नागरिकों के समर्थन की बात कही है।
क्या है पूरा विवाद?
अहमदाबाद में स्कूल पुस्तकालय में कुछ पुस्तकों को लेकर उठे विवाद ने अब शिक्षा, पुस्तकालयों में उपलब्ध साहित्य और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे व्यापक सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ संबंधित पुस्तकों को लेकर आपत्तियां सामने आई हैं, वहीं दूसरी ओर RCF जैसे संगठनों ने इन्हें शिक्षा और विचार की स्वतंत्रता का मुद्दा बताया है।
फिलहाल पूरे मामले में लगाए गए आरोपों, कथित हमले और पुलिस कार्रवाई को लेकर संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा। घटना की निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि विवाद के दौरान वास्तव में क्या हुआ और जिम्मेदारी किसकी बनती है।











