छत्तीसगढ़ बीजेपी में नए अध्यक्ष की तलाश

रायपुर। छत्तीसगढ़ बीजेपी में नए अध्यक्ष का विचार चर्चा में है।संभव है कि अभी कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जाए।इसे लेकर पार्टी के भीतर दिलचस्प राजनीति भी चल रही है।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव 29 जुलाई को उत्तरप्रदेश में बागेश्वर धाम से लौटते हुए एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए थे।दुर्घटना बड़ी थी।उन्हें इलाज के लिए दिल्ली भेजा गया था।अभी वे अस्पताल से तो आ गए हैं लेकिन दिल्ली स्थित छत्तीसगढ़ भवन में ही रुके हुए हैं।बताया गया कि उन्हें अभी फॉलोअप ट्रीटमेंट के लिए कुछ दिनों तक अस्पताल जाना होगा।

प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह

बीजेपी सूत्रों का कहना है कि दिल्ली से लौट आने के बाद भी वे तुरंत इस स्थिति में नहीं होंगे कि सक्रियता के साथ दौरे कर सकें,पार्टी गतिविधियों में भाग ले सकें।

ऐसी स्थिति में यह तो तय है कि कोई नेता कार्यकारी अध्यक्ष बनेंगे लेकिन संभावना यह भी है यह परिवर्तन स्थायी अध्यक्ष के रूप में देखने को मिले।

पार्टी सूत्र कहते हैं कि किरण सिंह देव ने दुर्घटना से काफी पहले ही पार्टी के भीतर यह इच्छा जताई थी कि उन्हें अध्यक्ष पद के दायित्व से मुक्त कर दिया जाए। उनके करीबी बताते हैं कि श्री सिंह देव मंत्री पद के इच्छुक हैं।एक बात यह भी चर्चा में है कि बतौर अध्यक्ष किरण सिंह देव पार्टी में या सार्वजनिक रूप से अपनी प्रभावशाली भूमिका दर्ज नहीं करवा सके।हाल ही में स्थानीय निकायों के उपचुनाव में बस्तर में पार्टी की परफॉर्मेंस को अत्यंत निराशाजनक माना गया और कहा जाने लगा कि पार्टी अध्यक्ष को कम से कम अपने इलाके में दमदार नतीजे देने चाहिए।

नए अध्यक्ष के तौर पर जिन नामों की चर्चा है उनमें केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है।

केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू

पार्टी सूत्र कहते हैं कि श्री साहू इस दायित्व को संभालने के लिए तैयार भी हैं।

उनको अध्यक्ष बना कर पार्टी को एक साथ दो फायदे हासिल होंगे।
एक – छत्तीसगढ़ के मैदानी इलाके को प्रतिनिधित्व मिलेगा और दूसरा सबसे बड़ा फायदा राज्य की ओबीसी आबादी में सबसे बड़ी संख्या वाले साहू समाज को पार्टी महत्व दे सकेगी।छत्तीसगढ़ की राजनीति में साहू समाज बेहद महत्व रखता है।

तोखन साहू के अलावा जिन नामों की चर्चा है उनमें उपमुख्यमंत्री अरुण साव भी हैं।श्री साव के करीबी दावा करते हैं कि वे उपमुख्यमंत्री का पद छोड़ने को तैयार हैं यदि उन्हें प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व मिलता है तो।

उपमुख्यमंत्री अरुण साव

पार्टी में यह चर्चा है कि इन दो नेताओं के बीच सत्ता और संगठन में प्रभाव को लेकर अंदरूनी तौर पर दिलचस्प खींचतान रहती है।

एक नाम पूर्व विधायक और छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व उपसभापति नारायण चंदेल का भी चर्चा में है।नारायण चंदेल जांजगीर से हैं और इस पूरे इलाके की सभी छह सीट्स बीजेपी हारी थी।उनके समर्थकों का तर्क है कि उन्हें बना देने से इस इलाके में पार्टी को फायदा होगा। बताते हैं कि नारायण चंदेल खुद भी अध्यक्ष बनने के इच्छुक हैं और वे दिल्ली के स्तर पर प्रयासरत भी हैं।

अध्यक्ष पद के लिए राजनांदगांव के सांसद संतोष पांडेय का भी नाम चर्चा में है।हालांकि बीजेपी के सूत्र कहते हैं कि उनकी अध्यक्ष बनने में दिलचस्पी कम है।

राजनांदगांव के सांसद संतोष पांडेय

राजनीतिक रूप से प्रेक्षकों को यह समीकरण किसी ओबीसी खासतौर पर साहू नेता के इर्दगिर्द ठहरता नजर आ रहा है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय स्वयं आदिवासी समाज से हैं।ऐसे में ओबीसी को पार्टी अध्यक्ष बनाना बीजेपी को राजनीतिक रूप से लाभदायक लगता है।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय

लेकिन आज की बीजेपी में फैसले ना तो राज्य में होते हैं ना किसी की पसंद–नापसंद से।ऐसे बड़े फैसले दिल्ली से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के दफ्तर से ही आते हैं।इसलिए यहां दिल्ली के फैसले का ही इंतजार है।

दानिश अनवर

दानिश अनवर, द लेंस में जर्नलिस्‍ट के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों का अनुभव है। द लेंस से पहले दैनिक भास्‍कर में इन्‍वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग टीम में सीनियर रिपोर्टर, नवभारत में क्राइम रिपोर्टर, नईदुनिया में स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट और पत्रिका अखबार में रिपोर्टर के तौर पर 10 साल काम किया। इन सभी अखबारों में दानिश अनवर ने विभिन्न विषयों जैसे- क्राइम, पॉलिटिकल, एजुकेशन, स्‍पोर्ट्स, कल्‍चरल और स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन स्‍टोरीज कवर की हैं। दानिश को प्रिंट का अच्‍छा अनुभव है। वह सेंट्रल इंडिया के कई शहरों में काम कर चुके हैं।

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