कॉलेज में महिला प्रोफेसरों को धमकाने वाला मामला, महिला आयोग ने प्राचार्य को दी दो महीने में जांच पूरी करने की हिदायत

November 19, 2025 5:49 PM

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग (Cg Rajya Mahila Aayog) की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने बुधवार को रायपुर में बड़ी संख्या में महिलाओं की शिकायतें सुनीं। प्रदेश भर से 349 और सिर्फ रायपुर जिले से 168 मामले आज सुनवाई के लिए आए। कई मामलों में आयोग ने सख्त निर्देश दिए तो कुछ में समझौता भी कराया। सबसे गंभीर मामला शासकीय नवीन कॉलेज नवागांव का था। यहां चार महिला सहायक प्राध्यापकों ने एक पुरुष प्रोफेसर पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना था कि वह कॉलेज में सबके सामने उन्हें अपमानित करता है ‘जूते के नीचे रहो’ जैसे शब्द कहता है छात्र-छात्राओं को नंबर काटने की धमकी देकर दबाव बनाता है।

एक महिला प्रोफेसर ने बताया कि गर्भावस्था में उन्हें मेडिकल लीव के लिए व्हाट्सएप ग्रुप में मैसेज डाला था लेकिन आरोपी प्रोफेसर ने पूरे ग्रुप में अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। इसके सदमे से उनका ब्लड प्रेशर गिर गया और गर्भ में पल रहे बच्चे की हार्टबीट बंद हो गई जिससे गर्भपात हो गया। आयोग ने इसे कार्यस्थल पर उत्पीड़न का गंभीर मामला माना और कॉलेज के प्राचार्य को तुरंत पत्र लिखा। प्राचार्य को सख्त हिदायत दी गई है कि दो महीने के अंदर पूरी जांच करके रिपोर्ट आयोग को सौंपें।

दो महिलाओं को FIR दर्ज करने का निर्देश

एक मामला दहेज प्रताड़ना का था। पति और ससुराल वाले लगातार पैसे मांग रहे थे और मारपीट करते थे। पहले तो पति साथ रहने को तैयार हुआ था लेकिन आज सुनवाई में मुकर गया। आयोग ने महिला को थाने में प्रताड़ना की FIR दर्ज कराने और भरण-पोषण के लिए कोर्ट जाने की सलाह दी। दूसरे मामले में पति-पत्नी ढाई साल से बच्चों का खर्चा देने से भाग रहे थे। आयोग ने साफ कहा ‘अब और बहाने नहीं चलेंगे, FIR कराओ और कोर्ट से गुजारा-भत्ता मांगो।’

एक प्रकरण में पति-पत्नी के बीच अनबन थी। दोनों अलग-अलग रह रहे थे। आयोग की लंबी समझाइश और काउंसलिंग के बाद दोनों मान गए और फिर से एक साथ रहने को तैयार हो गए। इस मामले को सुलह समझौते के साथ बंद कर दिया गया। एक महिला शिक्षिका ने बीमारी की वजह से नौकरी छोड़ दी थी। स्कूल प्रबंधन उनकी 6.64 लाख रुपये की ग्रेच्युटी देने से मना कर रहा था।

आयोग के सामने प्रबंधन के लोग जवाब नहीं दे पाए। अंत में उन्होंने एक महीने में दोनों पक्षों के वकील मिलकर फैसला करने का वादा किया।आयोग की अध्यक्ष डॉ. किरणमयी नायक ने कहा ‘महिलाओं के साथ किसी भी तरह का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। चाहे घर हो या कार्यस्थल, हम हर पीड़िता के साथ खड़े हैं।’ आज की सुनवाई में कई मामलों का मौके पर ही निराकरण हुआ तो कुछ में सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 5 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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