सेप्टिक टैंक हादसे में 3 मौतों के लिए रामकृष्ण अस्पताल प्रबंधन जिम्मेदार नहीं, पुलिस ने ठेकेदार के खिलाफ दर्ज कर दी FIR

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के रामकृष्ण केयर अस्पताल में 7 मार्च को तीन मजदूरों की मौत हो गई थी। इस दर्दनाक घटना में पुलिस ने शासन की ओर से खुद प्रार्थी बनकर ठेकेदार किशन सोनी के खिलाफ FIR दर्ज कर ली है। जबकि अस्पताल प्रबंधन को आरोपी नहीं बनाया गया है।

मामला टिकरापारा थाना क्षेत्र का है। पुलिस ने बुधवार देर रात ही FIR दर्ज की। आरोपी ठेकेदार किशन सोनी पर सुरक्षा नियमों की अनदेखी का आरोप है।

इस FIR के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि ठेकेदार के खिलाफ FIR कर पुलिस ने अपना पलड़ा झाड़ लिया है। जबकि केंद्र और राज्य सरकार के सख्त मनाही के बाद भी उस काम का ठेका देने वाले अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ किसी भी तरह की एफआईआर दर्ज नहीं हुई है।

एक और सबसे बड़ा सवाल यह कि ठेकेदार के खिलाफ लापरवाही से मौत की धाराओं के तहत जुर्म दर्ज किया गया है। वहीं दो वर्ष पूर्व इसी तरह के एक केस में अशोका बिरयानी रेस्टोरेंट के मालिक और प्रबंधन के खिलाफ पुलिस ने गैर इरादतन हत्या की FIR दर्ज की गई थी।

एक ही तरह के केस में FIR में धाराएं अलग अलग लगाने को लेकर पुलिस कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

दरअसल, सेप्टिक टैंक की सफाई के नियम होते हैं। केंद्र सरकार ने इस पर कानून बनाया हुआ है। सुप्रीम कोर्ट कई बार इसे लेकर निर्देश दे चुका है। इतना ही नहीं 2014 में छत्तीसगढ़ में भी इसे लेकर अलग से कानून है।

इन सभी कानूनों और निर्देशों में बार बार यह दोहराया गया है कि सेप्टिक टैंक की सफाई मैनुअल नहीं कराया जाए। बल्कि इसकी सफाई मशीन के जरिए किए जाने का नियम है। इसके बाद भी अस्पताल प्रबंधन ने इसका ठेका मैनुअल काम करने वालों को क्यों दिया, यह सवाल है लेकिन पुलिस की FIR में यह सवाल शामिल ही नहीं किया गया है।

तीन मजदूरों की मौत कैसे हुई?

17 मार्च को भाठागांव के बीएसयूपी कॉलोनी के रहने वाले तीन मजदूर काम पर गए थे, प्रशांत कुमार (32 वर्ष)अनमोल मचकन (25 वर्ष), गोविंद सेंद्रे (35 वर्ष) ये तीनों अस्पताल के 50 फीट गहरे सेप्टिक टैंक में सफाई के लिए उतरे। टैंक में जहरीली गैस निकासी का कोई पाइप तक नहीं था। सिर्फ ढाई फीट चौड़े गोल रास्ते से उन्हें नीचे भेजा गया। ठेकेदार ने उन्हें न तो ऑक्सीजन मास्क दिया, न सेफ्टी बेल्ट, न रस्सी, न कोई सुरक्षा किट। बिना किसी तकनीकी पर्यवेक्षक के उन्हें सीधे टैंक में उतार दिया गया। नीचे पहुंचते ही जहरीली गैस से उनका दम घुट गया। वे ऊपर कोई सिग्नल भी नहीं दे पाए और मौके पर ही तीनों की मौत हो गई। पुलिस इसे ‘डेथ ट्रैप’ (मौत का जाल) बता रही है।

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परिजनों का गुस्सा

मौत की खबर मिलते ही परिजन अस्पताल पहुंच गए। उन्होंने रात तीन बजे तक अस्पताल परिसर में प्रदर्शन किया। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और ठेकेदार दोनों पर लापरवाही का आरोप लगाया। पुलिस को स्थिति संभालनी पड़ी। मृतकों के आश्रितों को अस्पताल प्रबंधन ने 30-30 लाख रुपए का चेक दिया है। इसके अलावा आजीवन हर महीने 20-20 हजार रुपए दिए जाएंगे। साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य फ्री रहेगा।

FIR पर पुलिस का रुख

पुलिस जांच में साफ हुआ कि ठेकेदार किशन सोनी ने अस्पताल से सफाई का ठेका लिया था, लेकिन मजदूरों की सुरक्षा की बिल्कुल चिंता नहीं की। FIR में यही मुख्य आरोप है। फिलहाल जांच ठेकेदार तक ही सीमित है लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि इतने बड़े अस्पताल में बिना सुरक्षा मानकों के काम कैसे होने दिया गया? क्या प्रबंधन की भी चूक है? राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के हस्तक्षेप के बाद अब जांच का दायरा बढ़ने की उम्मीद है।

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पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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