CG NEWS: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक बार फिर मैनुअल सफाई के दौरान हुई लापरवाही ने तीन युवक की जान ले ली। रामकृष्ण केयर अस्पताल के सेप्टिक टैंक में सफाई करने उतरे तीन मजदूर जहरीली गैस से दम घुटने के कारण मौके पर ही मर गए। पुलिस ने 3 दिन बाद अब अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ भी मामला दर्ज कर लिया है और SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा भी जोड़ दी गई है।
दरअसल 17 मार्च को भाठागांव के बीएसयूपी कॉलोनी निवासी तीन मजदूर काम पर गए थे। इनमें शामिल थे:प्रशांत कुमार (32 वर्ष), अनमोल मचकन (25 वर्ष) और गोविंद सेंद्रे (35 वर्ष) | ये तीनों अस्पताल के करीब 50 फीट गहरे सेप्टिक टैंक में सफाई के लिए उतरे। टैंक में जहरीली गैस निकासी का कोई पाइप तक नहीं था। सिर्फ ढाई फीट चौड़े गोल रास्ते से उन्हें नीचे भेजा गया। ठेकेदार ने उन्हें न ऑक्सीजन मास्क दिया, न सेफ्टी बेल्ट, न रस्सी और न ही कोई सुरक्षा उपकरण। बिना किसी पर्यवेक्षक के सीधे टैंक में उतार दिया गया। नीचे पहुंचते ही जहरीली गैस से उनका दम घुट गया। वे ऊपर कोई सिग्नल भी नहीं दे पाए और तीनों की मौके पर ही मौत हो गई।
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हादसे के तुरंत बाद पुलिस ने सफाई का ठेका लेने वाले किशन सोनी के खिलाफ लापरवाही की धाराओं में FIR दर्ज की थी। परिजनों और सामाजिक संगठनों की लगातार मांग के बाद अब पुलिस ने रामकृष्ण केयर अस्पताल प्रबंधन को भी आरोपी बनाया है। 3 दिन बाद अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया है और SC/ST एक्ट की धारा जोड़ी गई है।
देश में मैनुअल स्कैवेंजिंग (हाथ से सीवर या सेप्टिक टैंक साफ करना) पर पूर्ण प्रतिबंध है। इसके बावजूद अस्पताल प्रबंधन और ठेकेदार ने बिना सुरक्षा उपकरणों के मजदूरों को टैंक में भेज दिया। राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग के उपाध्यक्ष हरदीप सिंह गिल भी हादसे की सूचना मिलते ही रायपुर पहुंचे थे। उन्होंने मृतकों के परिजनों से मुलाकात की और पुलिस को सख्त निर्देश दिए कि मामले में SC/ST एक्ट और मैनुअल स्कैवेंजिंग एक्ट के तहत FIR दर्ज की जाए।
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हादसे के बाद परिजनों ने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर अस्पताल परिसर में जमकर विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही को लेकर सख्त कार्रवाई की मांग की थी। अब पुलिस जांच आगे बढ़ा रही है। अस्पताल प्रबंधन और ठेकेदार दोनों पर लापरवाही और मानवीय जीवन की सुरक्षा में कोताही बरतने के आरोप हैं।






