CG HIGHCOURT ORDER : छत्तीसगढ़ में शासकीय मेडिकल कॉलेजों की MD/MS सीटों को लेकर चल रहा विवाद अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। माननीय उच्च न्यायालय के हालिया स्पष्टीकरण आदेश में पूर्व निर्णय के उस भाग को वापस ले लिया गया है, जिसके कारण राज्य शासन को यह भ्रम हो गया था कि अन्य राज्यों से MBBS करने वाले अभ्यर्थियों को भी राज्य कोटे की शासकीय PG सीटों के लिए पात्र बनाना आवश्यक है। अब न्यायालय के संशोधित रुख से स्थिति पूर्णतः स्पष्ट हो चुकी है कि राज्य को अपने ही शासकीय मेडिकल कॉलेजों से MBBS करने वाले विद्यार्थियों को संस्थागत वरीयता देने का वैधानिक अधिकार प्राप्त है और शासकीय सीटों को बाहरी अभ्यर्थियों के लिए खोलने का कोई न्यायिक दबाव नहीं था।
Junior Doctors Association, Chhattisgarh (JDA-CG) एवं छत्तीसगढ़ डॉक्टर्स फेडरेशन ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दावा किया कि अदालत ने पूर्व निर्णय के हिस्से में स्पष्टीकरण देकर राज्य को संस्थागत वरीयता देने का अधिकार बहाल किया है, और अब कोई न्यायिक बाध्यता नहीं है कि बाहरी छात्रों को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए। संगठन का कहना है कि जब अदालत ने खुद संशोधन किया है, तो शासन को तुरंत 01 दिसंबर 2025 के अन्यायपूर्ण नियम निरस्त कर नई अधिसूचना जारी करनी चाहिए।
वर्तमान स्थिति बेहद जटिल है क्योंकि शासकीय कॉलेज पहले ही 50% सीटें अखिल भारतीय कोटे में दे चुके हैं, और बची राज्य कोटा सीटों को भी बाहरी अभ्यर्थियों के लिए खोल दिया गया। JDA-CG ने सवाल उठाया कि छात्रों के खिलाफ नियम जल्दी लागू हो सकते हैं, तो उनके हित में उतनी तत्परता क्यों नहीं? दिसंबर 2025 में जारी पहला राउंड आबंटन हाईकोर्ट के अंतिम फैसले के अधीन है और सुप्रीम कोर्ट ने राज्य को स्पष्टीकरण के लिए हाईकोर्ट जाने को कहा था, जिसकी अगली सुनवाई मार्च 2026 में संभावित है।
Junior Doctors Association, Chhattisgarh ने मांग की है कि पुराने नियम तत्काल निरस्त हों, सरकारी एवं प्राइवेट कॉलेज में संस्थागत वरीयता बहाल की जाए, काउंसलिंग नए नियमों पर हो और छात्रों के साथ हुए अन्याय की जांच हो। यदि देरी हुई तो राज्य के मेधावी सरकारी डॉक्टरों के भविष्य पर स्थायी असर पड़ेगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन पर होगी।









