CBSE में बड़ा एक्शन: चेयरमैन और सचिव हटाए गए, OSM विवाद की जांच शुरू; शिक्षा मंत्रालय ने मांगी रिपोर्ट

CBSE

नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर उठे विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए बोर्ड के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता को हटा दिया है। छात्रों की शिकायतों और मूल्यांकन प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के बाद यह कार्रवाई की गई है।

CBSE ने पूरे मामले की जांच के लिए एक विशेष समिति का गठन किया है, जो OSM प्रणाली, मूल्यांकन प्रक्रिया और इससे जुड़ी तकनीकी व्यवस्थाओं की समीक्षा करेगी।

OSM विवाद उस समय और गहरा गया जब 12वीं के छात्र सार्थक सिद्धांत ने संसद की स्थायी समिति के सामने अपनी शिकायतें रखीं। उन्होंने दावा किया कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली में कम से कम 15 गंभीर विसंगतियां हैं, जिनमें मूल्यांकन प्रक्रिया से लेकर तकनीकी संचालन तक कई सवाल शामिल हैं।

संसद भवन एनेक्सी में हुई बैठक में छात्र ने समिति को बताया कि OSM प्रणाली के लागू होने और इसके लिए हुए टेंडर आवंटन की प्रक्रिया की भी जांच होनी चाहिए।

विवाद बढ़ने के बाद शिक्षा मंत्रालय ने भी मामले का संज्ञान लिया है। मंत्रालय ने CBSE से OSM सेवा प्रदाता कंपनी को दिए गए टेंडर और पूरी मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंत्रालय स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की संभावना पर भी विचार किया जा रहा है।

रीइवैल्यूएशन पोर्टल पर साइबर अटैक

इस बीच मंगलवार को पुनर्मूल्यांकन और अंकों के सत्यापन के लिए शुरू किए गए ऑनलाइन पोर्टल पर साइबर हमले की भी जानकारी सामने आई है।

CBSE के अनुसार पोर्टल खुलने के महज दो मिनट के भीतर 15 लाख से अधिक एक्सेस हिट्स दर्ज की गईं। सिस्टम में मौजूद डेटा तक अनधिकृत पहुंच बनाने के लिए एक लाख से ज्यादा प्रयास किए गए।

हालांकि साइबर हमले के बावजूद दोपहर 3 बजे तक 16 हजार से अधिक छात्र सफलतापूर्वक आवेदन कर चुके थे। यह पोर्टल सोमवार से शुरू होना था, लेकिन तकनीकी कारणों से इसमें देरी हुई।

शिक्षा मंत्रालय पर बढ़ा दबाव

CBSE मूल्यांकन विवाद ऐसे समय सामने आया है जब शिक्षा मंत्रालय पहले से ही विभिन्न परीक्षा विवादों को लेकर दबाव में है। हाल के महीनों में NEET परीक्षा से जुड़े विवाद, पेपर लीक के आरोप और छात्रों के विरोध प्रदर्शन ने केंद्र सरकार और शिक्षा मंत्रालय को कठघरे में खड़ा किया है।

विपक्ष लगातार केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है। वहीं छात्र संगठनों का कहना है कि परीक्षा और मूल्यांकन प्रणाली में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियां लाखों विद्यार्थियों के भविष्य को प्रभावित कर रही हैं।

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