कैप्टन को आई कांग्रेस की याद, कहा – बीजेपी में काम करने का तरीका सेंट्रलाइज्ड

Captain Amarinder Singh

नई दिल्ली। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता Captain Amarinder Singh ने अपनी ही पार्टी के खिलाफ खुलकर नाराजगी जाहिर की है। पंजाब भाजपा के नए अध्यक्ष के रूप में केवल सिंह ढिल्लों की नियुक्ति पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने इस फैसले से पहले राज्य के वरिष्ठ नेताओं से कोई सलाह-मशविरा नहीं किया।

एक ताजा इंटरव्यू में कैप्टन ने स्पष्ट किया कि पंजाब में भाजपा अभी भी अपने दम पर चुनाव जीतने की स्थिति में नहीं है।

ट्रिब्यून को दिए इंटरव्यू में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने अपनी पुरानी पार्टी कांग्रेस से तुलना की। कांग्रेस में बिताए अपने सालों से तुलना करते हुए अमरिंदर ने कहा कि वहां राज्य के नेताओं को पारंपरिक रूप से ज्यादा आजादी मिलती थी।

उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस में मुझसे हमेशा सलाह ली जाती थी। यहां मैंने पिछले छह सालों में जो देखा है, उसके मुताबिक भाजपा आलाकमान को जो करना होता है, वे खुद तय करते हैं और बस कर डालते हैं।’

इस तरह उन्होंने यह संकेत दिया कि BJP के काम करने का तरीका बहुत ज्यादा सेंट्रलाइज्ड है। उन्होंने बताया कि राहुल गांधी ने उन्हें जन्मदिन की बधाई दी और भाई की मृत्यु पर भी फोन किया।

नए पंजाब भाजपा अध्यक्ष पर उठाई अंगुली

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा कि भले ही केवल सिंह ढिल्लों उनके निजी मित्र हैं, लेकिन उनका पुराना राजनीतिक ट्रैक रिकॉर्ड बहुत संतोषजनक नहीं रहा है। कैप्टन के मुताबिक, ‘मुझे नहीं लगता कि ढिल्लों भाजपा की उम्मीदों पर खरा उतरने की स्थिति में हैं।’

उन्होंने निवर्तमान अध्यक्ष सुनील जाखड़ और कार्यकारी अध्यक्ष अश्विनी शर्मा को हटाए जाने के फैसले पर भी सवाल उठाया।

ढिल्लों को अध्यक्ष बनाने के पीछे ‘जाट सिख’ समीकरण साधने की चर्चाओं पर कैप्टन ने पूछा, ‘एक जाट सिख को अध्यक्ष बनाने का क्या मतलब है? उस व्यक्ति को पार्टी का अध्यक्ष बनाएं जो नतीजे दे सके।’

दलित राजनीति के बढ़ते महत्व को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि पंजाब के चुनावी परिदृश्य में दलित समुदाय अहम भूमिका निभाता रहेगा।

अकाली दल के साथ गठबंधन चाहते अमरिंदर

कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भाजपा और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच गठबंधन को दोबारा बहाल करने की वकालत की है। उन्होंने स्वीकार किया कि भाजपा के पास ग्रामीण स्तर पर कैडर और बुनियादी ढांचे की भारी कमी है।

क्या भाजपा अकेले चुनाव जीत सकती है? इस सवाल पर उन्होंने साफ कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि फिलहाल हम इस स्थिति में हैं।’

उन्होंने याद दिलाया कि दशकों तक भाजपा अकाली दल पर ही निर्भर रही है और अपना स्वतंत्र ढांचा खड़ा करने में विफल रही है।

हालिया नगर निगम और निकाय चुनावों में भाजपा के निराशाजनक प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कैप्टन ने कहा कि जब भाजपा अपने नगर निगमों और पालिकाओं में ही खराब प्रदर्शन कर रही है, तो वह आखिर कहां से जीतेगी?

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