लेंस डेस्क। गुजरात के अमरेली जिले में दलित युवक की मौत के मामले ने अब कानूनी और सामाजिक दोनों स्तरों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की सुनवाई कर रही विशेष अत्याचार अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया है कि मृतक की मौत के कारणों की स्पष्ट जानकारी देने वाली फोरेंसिक रिपोर्ट (FSL) 1 मई तक अदालत में पेश की जाए। इसी रिपोर्ट के आधार पर यह तय होगा कि दर्ज एफआईआर में हत्या की धाराएं जोड़ी जाएं या नहीं।
क्या है पूरा मामला
24 वर्षीय महेश प्रेमजी राठौड़, जो अमरेली जिले के गोपालग्राम गांव के रहने वाले थे, 17 अप्रैल को अपने बुजुर्ग चाचा को इलाज के लिए शांता बा जनरल अस्पताल लेकर गए थे। अस्पताल परिसर में एक संस्था द्वारा मुफ्त भोजन वितरण किया जा रहा था। आरोप है कि वहीं खाने के दौरान भोजन बर्बाद करने को लेकर उनका कुछ लोगों से विवाद हो गया।
एफआईआर के मुताबिक संस्था से जुड़े लोगों ने पहले महेश से खाना खत्म करने या जुर्माना देने को कहा। जब उन्होंने जुर्माना देने की बात कही, तो कथित तौर पर उनसे जाति पूछी गई। शिकायत में आरोप है कि दलित होने की जानकारी मिलने के बाद कुछ लोगों ने उन्हें प्लास्टिक पाइप से बेरहमी से पीटा। इस हमले में उनका हाथ भी टूट गया।
इलाज के दौरान हुई मौत
घटना के बाद महेश को उसी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 20 अप्रैल को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। हालांकि, अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि उनकी मौत सीधे तौर पर पिटाई के कारण हुई या किसी अन्य वजह से। यही वजह है कि अदालत ने फोरेंसिक रिपोर्ट को बेहद अहम माना है।
पुलिस ने इस मामले में सात लोगों के खिलाफ गंभीर चोट पहुंचाने, गैरकानूनी जमावड़ा और दंगा करने जैसी धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। साथ ही अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत भी मामला दर्ज हुआ है। पुलिस का कहना है कि अभी तक जिन धाराओं में केस दर्ज है, उनमें सजा सात साल से कम है, इसलिए आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की गई है।
महेश राठौड़ के परिवार ने न्याय की मांग को लेकर उनका अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया। परिवार का कहना है कि जब तक आरोपियों पर हत्या का मामला दर्ज नहीं किया जाता, उनका विरोध जारी रहेगा। पहले यह प्रदर्शन अस्पताल के बाहर चल रहा था, जिसे अब गांव में जारी रखने का फैसला लिया गया।










