बस्तर पुलिस वेतन घोटाले पर भाजपा से ही उठने लगी जांच की मांग, भाजपा नेता ने CBI-CAG जांच के लिए CM को लिखा पत्र

Bastar Police Salary Scam

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में सामने आए करीब 2 करोड़ रुपये के कथित वेतन घोटाले (Bastar Police Salary Scam) को लेकर जांच का दायरा बढ़ाने की मांग हुई है। वरिष्ठ भाजपा नेता नरेश गुप्ता ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को विस्तृत ज्ञापन भेजकर इस मामले की CBI, नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) और वित्तीय खुफिया इकाई (FIU-IND) से जांच कराने की मांग की है।

नरेश गुप्ता का कहना है कि यह मामला केवल भ्रष्टाचार या रिश्वतखोरी का नहीं, बल्कि सरकारी धन के सुनियोजित तकनीकी गबन का है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि इसकी गहराई से जांच नहीं हुई तो इस तरह की अनियमितताएं अन्य जिलों और विभागों में भी सामने आ सकती हैं।

ज्ञापन में कहा गया है कि बस्तर संभाग के जिले नक्सल प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्र हैं, जहां प्रशासन और पुलिस को वित्तीय मामलों में कुछ परिचालन संबंधी छूट प्राप्त रहती है। ऐसे में यह जांच केवल जगदलपुर तक सीमित न रहकर दंतेवाड़ा, सुकमा, बीजापुर, नारायणपुर, कांकेर और कोंडागांव सहित पूरे बस्तर संभाग तक विस्तारित की जानी चाहिए।

नरेश गुप्ता ने दावा किया कि यदि शासकीय एकीकृत वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (IFMS) में तकनीकी खामी का इस्तेमाल कर यह घोटाला किया गया है, तो शिक्षा, स्वास्थ्य, लोक निर्माण और अन्य बड़े विभागों में भी ऐसी अनियमितताओं की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसलिए राज्य सरकार को प्रमुख विभागों का ‘टेस्ट बेसिस’ पर टेस्ट ऑडिट कराना चाहिए।

वरिष्ठ अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग

ज्ञापन में कहा गया है कि दो वर्षों तक वेतन बिलों के भुगतान के दौरान संबंधित आहरण एवं संवितरण अधिकारियों (DDO) और जिला कोषालय स्तर पर किसी तरह की आपत्ति नहीं उठना गंभीर लापरवाही का संकेत है। ऐसे में केवल निचले स्तर के कर्मचारियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होगी, बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

सरकार से ये प्रमुख मांगें

नरेश गुप्ता ने अपने ज्ञापन में मामले की जांच CBI की आर्थिक अपराध शाखा से कराए जाने की मांग की है। इसके अलावा CAG से पिछले 5 से 7 वर्षों का विशेष फॉरेंसिक ऑडिट कराने, संदिग्ध बैंकिंग लेन-देन और मनी ट्रेल की जांच में FIU-IND का सहयोग लेने, संबंधित DDO और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों की वित्तीय जवाबदेही तय करने, भविष्य में ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए IFMS पोर्टल में ऑटो रेड-फ्लैग और ऑटो-ब्लॉक सिस्टम विकसित करने की मांग।

दानिश अनवर

दानिश अनवर, द लेंस में जर्नलिस्‍ट के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों का अनुभव है। द लेंस से पहले दैनिक भास्‍कर में इन्‍वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग टीम में सीनियर रिपोर्टर, नवभारत में क्राइम रिपोर्टर, नईदुनिया में स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट और पत्रिका अखबार में रिपोर्टर के तौर पर 10 साल काम किया। इन सभी अखबारों में दानिश अनवर ने विभिन्न विषयों जैसे- क्राइम, पॉलिटिकल, एजुकेशन, स्‍पोर्ट्स, कल्‍चरल और स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन स्‍टोरीज कवर की हैं। दानिश को प्रिंट का अच्‍छा अनुभव है। वह सेंट्रल इंडिया के कई शहरों में काम कर चुके हैं।

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