बिलासपुर। गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय के एक हालिया साहित्यिक आयोजन में जानेमाने कहानीकार मनोज रूपड़ा के साथ हुई बदसलूकी के मामले में अब कुलपति को हटाने की मांग तेज हो गई है। साथ ही विश्वविद्यालय को ऐसे कार्यक्रमों के लिए मिलने वाली फंडिंग पर भी सवाल उठाने शुरू हो गए हैं।
गौरतलब है कि 7 जनवरी को विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित राष्ट्रीय परिसंवाद का विषय था – ‘समकालीन हिंदी कहानी: बदलते जीवन संदर्भ’। इस दौरान कुलपति प्रो. आलोक चक्रवाल ने अपने संबोधन में अचानक वरिष्ठ कथाकार मनोज रुपड़ा की ओर देखकर पूछा कि “क्या आप मेरी बातों से बोर तो नहीं हो रहे?”
जब मनोज रुपड़ा ने विनम्रता से सुझाव दिया कि कार्यक्रम के मूल विषय पर चर्चा होनी चाहिए, तो कुलपति आहत हो गए। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कथाकार को सार्वजनिक रूप से कार्यक्रम से बाहर जाने को कहा और उन्हें हॉल से निकलवा दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैला, जिसके बाद देशभर के लेखकों, कवियों और बुद्धिजीवियों ने इसकी कड़ी निंदा की।
इस अपमानजनक व्यवहार से आहत मनोज रुपड़ा की बेटी आयुषी ने कहा कि यह केवल उनके पिता का नहीं, बल्कि पूरे साहित्यिक समुदाय का अपमान है। उन्होंने यह भी टिप्पणी की कि जिस व्यक्ति का अतिथियों के साथ ऐसा बर्ताव हो, वह अपने शिक्षकों और छात्रों के साथ कैसा व्यवहार करता होगा, इसकी कल्पना आसानी से की जा सकती है।
घटना के बाद स्थानीय और प्रदेश स्तर पर साहित्यकारों, संस्कृतिकर्मियों व प्रबुद्ध नागरिकों में भारी रोष फैल गया है। शुक्रवार को जन संस्कृति मंच और प्रबुद्ध नागरिकों की ओर से वरिष्ठ साहित्यकार रामकुमार तिवारी, कपूर वासनिक, मुदित मिश्र,द्वारिका प्रसाद अग्रवाल, राजेश्वर सक्सेना सहित अन्य ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपा, जिसमें कुलपति को तुरंत हटाने की मांग की गई है।
साहित्य अकादमी के अध्यक्ष डॉ. माधव कौशिक ने इस घटना को बहुत दुखद करार देते हुए कहा कि कार्यक्रम की गरिमा बनाए रखने की जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की थी। उन्होंने संकेत दिया कि भविष्य में ऐसे मामलों में फंडिंग पर पुनर्विचार किया जाएगा और यहां तक कि यूजीसी को भी वर्तमान कुलपति के कार्यकाल में अनुदान न देने का सुझाव भेजा गया है।









