लेंस डेस्क। बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले आम चुनावों के लिए प्रमुख राजनीतिक दलों के चुनावी घोषणा-पत्रों में भारत के साथ संबंधों को लेकर जोर है। जहां बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने सीमा सुरक्षा और साझा नदियों के जल बंटवारे पर सख्त कदमों का वादा किया है, वहीं जमात-ए-इस्लामी ने पड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्ण और सहयोगी रिश्तों पर जोर दिया है। इस चुनाव पर भारत की खास निगाह है क्योंकि अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की गैरमौजूदगी में यह चुनाव हो रहे हैं और उनकी पार्टी अवामी लीग पार्टी भी प्रतिबंधों की वजह से चुनाव में हिस्सा नहीं ले रही है।
बांग्लादेश की मीडिया खबरों के मुताबिक चुनावों में प्रमुख दावेदार मानी जा रही पार्टी बीएनपी ने अपने घोषणा-पत्र में ‘शोबर आगे बांग्लादेश’ (बांग्लादेश पहले) के नारे को केंद्र में रखा है। पार्टी ने विदेश नीति में समानता और आत्म-सम्मान पर आधारित संबंधों की बात की है। इसमें सीमा पर हत्याओं, अवैध घुसपैठ और तस्करी को रोकने के लिए कड़े उपायों का संकल्प लिया गया है। साथ ही तीस्ता और पद्मा जैसी साझा नदियों से उचित हिस्सेदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
हालांकि, घोषणा-पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि सभी देशों के साथ मित्रवत रिश्ते बनाए जाएंगे, लेकिन किसी को ‘मालिक’ की भूमिका नहीं दी जाएगी। बीएनपी नेता तारिक रहमान ने कहा कि बांग्लादेश किसी अन्य देश की आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगा और न ही खुद के मामलों में हस्तक्षेप बर्दाश्त करेगा।

दूसरी ओर जमात-ए-इस्लामी, जो 11 दलों के गठबंधन का नेतृत्व कर रही है। उसने अपने घोषणा-पत्र में भारत समेत पड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्ण, मित्रवत और सहयोगी संबंध स्थापित करने का वादा किया है। पार्टी ने महिलाओं की कैबिनेट में भागीदारी और युवाओं को नेतृत्व सौंपने जैसे सुधारों पर फोकस किया है। हालांकि, चुनावी भाषणों में शरिया कानून लागू करने की बात से परहेज किया गया है, जबकि पार्टी की संविधान में इसका उल्लेख है। जमात ने बांग्लादेश को सभी धर्मों के लोगों के लिए सुरक्षित बनाने का दावा किया है और विदेश नीति में पारस्परिक सम्मान पर आधारित सहयोग को प्राथमिकता दी है।
विश्लेषकों का मानना है कि 2024 के छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना के सत्ता से हटने से भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव आया है। हसीना की भारत में शरण और अवामी लीग पर प्रतिबंध ने स्थिति को जटिल बनाया है। अंतरिम सरकार ने चीन और पाकिस्तान के साथ संबंध मजबूत किए हैं, जबकि भारत के साथ सीमा प्रबंधन और जल समझौतों पर विवाद बढ़े हैं। चुनाव के बाद नई सरकार के साथ नई दिल्ली संबंध सुधारने की कोशिश कर सकती है, लेकिन बीएनपी या जमात के नेतृत्व में विदेश नीति में बदलाव संभव है।
इस चुनाव में लगभग 1981 उम्मीदवार 300 सीटों के लिए मैदान में हैं, जिसमें युवा मतदाताओं की भूमिका अहम होगी। अवामी लीग के वोट बैंक को अपनी ओर खींचने के लिए सभी दल प्रयासरत हैं, जो बांग्लादेश की राजनीतिक दिशा तय कर सकता है।
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