बागेश्वर धाम को विदेशी फंडिंग लेने की सरकारी मंजूरी मिली

लेंस न्यूज। केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल बागेश्वर धाम Bageshwar Dham को विदेश से चंदा लेने की अनुमति दे दी है। गृह मंत्रालय ने फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन एक्ट (FCRA) के तहत इस धार्मिक संस्था को रजिस्ट्रेशन दे दिया है। बागेश्वर धाम के प्रमुख धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ‘हिंदू राष्ट्र’ की स्थापना की वकालत करते हैं। वे 29 वर्षीय युवा संत हैं, जो अक्सर विवादास्पद बयानों के लिए चर्चा में रहते हैं। राजनीतिक नेताओं की नजर में भी वे रहते हैं। कई राजनीतिक चेहरे बागेश्वर धाम के आयोजनों में शामिल भी रहतें हैं।

FCRA रजिस्ट्रेशन क्या है?

FCRA कानून के तहत कोई भी गैर-सरकारी संगठन (NGO) या संस्था विदेशी दान लेने के लिए इस रजिस्ट्रेशन की जरूरत पड़ती है। बिना इसकी अनुमति के विदेशी फंड लेना अवैध है। रजिस्ट्रेशन सामाजिक, शैक्षणिक, धार्मिक, आर्थिक या सांस्कृतिक कामों के लिए मिलता है। बागेश्वर धाम की संस्था ‘श्री बागेश्वर जन सेवा समिति गढ़ा’ छतरपुर, मध्य प्रदेश को ‘धार्मिक (हिंदू)’ श्रेणी में FCRA लाइसेंस मिला है। इस रजिस्ट्रेशन की वैधता 5 साल तक होती है जिसके बाद रिन्यू कराना पड़ता है।

अब तक कितने संगठनों को मिला लाइसेंस?

15 अप्रैल 2026 तक कुल 38 नए संगठनों को FCRA रजिस्ट्रेशन मिला है। इनमें से 6 संगठनों ने ‘धार्मिक (हिंदू)’ श्रेणी में आवेदन किया था। इनमें बागेश्वर धाम के अलावा शामिल हैं:रामकृष्ण मिशन, बोलपुर (पश्चिम बंगाल), रामकृष्ण मिशन, पूर्णिया (बिहार), दिव्य ज्योति जागृति संस्थान, दिल्ली, धर्मस्थला संस्थान, कर्नाटक, राधा स्वामी सत्संग, आगरा (उत्तर प्रदेश) .

देश में कुल 14,538 FCRA रजिस्टर्ड संगठन सक्रिय हैं। साल 2015 के बाद 18,000 से ज्यादा संगठनों का रजिस्ट्रेशन रद्द हो चुका है।

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बागेश्वर धाम के प्रमुख हैं। उनकी वेबसाइट पर देश के अंदर दान लेने का अलग से प्रावधान है। विदेशी फंडिंग के लिए अब FCRA रजिस्ट्रेशन की मदद से वे विदेश से भी चंदा ले सकेंगे।

FCRA संशोधन बिल पर विवाद

संसद के बजट सत्र में सरकार ने फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन संशोधन बिल 2026 पेश करने का प्रस्ताव रखा था। इस बिल में FCRA रद्द या सस्पेंड होने पर संस्था की संपत्ति पर सरकार का नियंत्रण बढ़ाने का प्रावधान है। विपक्ष और कुछ राज्य सरकारों (तमिलनाडु, केरल) तथा ईसाई संगठनों ने इसका विरोध किया। इसके बाद बिल की चर्चा टाल दी गई। FCRA रजिस्ट्रेशन से जुड़े नियमों का मकसद विदेशी फंडिंग का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करना है। सरकार का कहना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी, जबकि आलोचक इसे संगठनों की स्वतंत्रता पर अंकुश मानते हैं।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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