कांकेर। छत्तीसगढ़ के भानुप्रतापपुर में शराब दुकान से जुड़े कर्मचारियों के ठिकाने पर पुलिस की कार्रवाई के बाद अब शासन ने बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई की है।
आबकारी विभाग ने उत्तर बस्तर कांकेर के सहायक जिला आबकारी अधिकारी मधुकर श्याम हरित को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
शासन के 10 सितंबर 2026 को जारी आदेश के मुताबिक, भानुप्रतापपुर के ग्राम बसंत नगर में एक मकान पर पुलिस की छापामार कार्रवाई के दौरान 4409 नग खाली शराब की बोतलें, 105 पत्ता स्टीकर एवं होलोग्राम तथा 3380 ढक्कन सहित अन्य सामग्री बरामद की गई थी।
शासन के आदेश में कहा गया है कि सहायक जिला आबकारी अधिकारी मधुकर श्याम हरित को अपने पदीय दायित्वों के निर्वहन में प्रथम दृष्टया कर्तव्य के प्रति उदासीनता और सतत निगरानी के स्पष्ट अभाव का दोषी पाया गया। आदेश में यह भी उल्लेख है कि उनके प्रभाव क्षेत्र में इतनी बड़ी मात्रा में शराब की खाली बोतलें, स्टीकर, होलोग्राम और ढक्कन जैसी सामग्री का पाया जाना उनके द्वारा अपने अधीनस्थों पर प्रभावी नियंत्रण नहीं रखे जाने को दर्शाता है।
इसी आधार पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम, 1966 के नियम 9(1) के तहत उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय आबकारी आयुक्त कार्यालय, नया रायपुर निर्धारित किया गया है और उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।
भानुप्रतापपुर शराब मामले को लेकर आम आदमी पार्टी ने भी भाजपा सरकार और आबकारी विभाग पर गंभीर आरोप लगाए।
आप के प्रदेश प्रवक्ता एवं बस्तर लोकसभा अध्यक्ष नरेन्द्र नाग ने आरोप लगाया था कि सरकारी शराब दुकानों से ही शराब में पानी मिलाकर बेचने का खेल चल रहा है। उन्होंने कर्मचारियों के कमरों से बड़ी संख्या में खाली बोतलें, ढक्कन, स्टीकर और अन्य सामग्री मिलने को गंभीर मामला बताते हुए आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए थे।
आप ने यह भी आरोप लगाया था कि कुछ दिन पहले कोरर थाना क्षेत्र में शराब दुकान से जुड़े कर्मचारियों द्वारा गांवों तक कथित रूप से अवैध शराब पहुंचाने का मामला सामने आया था।
शासन की कार्रवाई में 4409 खाली बोतल, 105 स्टीकर-होलोग्राम और 3380 ढक्कन की बरामदगी तथा आबकारी अधिकारी की निगरानी में लापरवाही का उल्लेख है। हालांकि, शासन के इस आदेश में शराब में 100 प्रतिशत पानी मिलाने या किसी संगठित मिलावट सिंडिकेट की पुष्टि नहीं की गई है।
यानी फिलहाल AAP के मिलावट संबंधी आरोप राजनीतिक आरोप हैं, जबकि शासन की ओर से की गई कार्रवाई का आधार पुलिस की बरामदगी और आबकारी अधिकारी की कथित कर्तव्यहीनता/निगरानी में कमी है।
अब जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि इतनी बड़ी संख्या में खाली बोतलें, ढक्कन, स्टीकर और होलोग्राम वहां कैसे पहुंचे, इनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना था और इस पूरे मामले में कौन-कौन लोग शामिल थे।
सवाल अब यह है की बोतलें, ढक्कन और होलोग्राम मिले तो जिम्मेदारी सिर्फ एक अधिकारी के निलंबन तक सीमित रहेगी या जांच उस नेटवर्क तक भी पहुंचेगी, जहां से कथित मिलावट और अवैध बिक्री का खेल संचालित हो रहा था?







