माओवादियों की आधी लीडरशिप खत्म

Anti Naxal Operation

नारायणपुर। सीपीआई माओवादी पार्टी यानी कि माओवादी संगठन की टॉप लीडरशिप में से आधे नेताओं को फोर्स ने खत्म कर दिया है। बस्तर आईजी पी सुंदरराज ने दो केन्द्रीय कमेटी (सीसी) सदस्यों के मुठभेड़ में मारे जाने के बाद नारायणपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस बात का खुलासा किया है।

बस्तर आईजी ने कहा, ‘माओवादी पार्टी में 19 केंद्रीय कमेटी सदस्य थे। इनमें से महासचिव बसवराजू सहित 9 सदस्यों को फोर्स ने मार गिराया है। वहीं, एक नक्सली लीडर सुजाता ने सरेंडर कर दिया है। इससे 10 लीडर खत्म हो गए हैं।’

आईजी ने बताया कि कल नारायणपुर और महाराष्ट्र के सीमांत एरिया मे हुई मुठभेड़ में मारे गए दो माओवादी राजू दादा और कोसा दादा सीसी मेंबर थे। इन दोनों को मिलाकर अब तक 9 सीसी मेंबर मारे जा चुके हैं।

आईजी ने कहा कि वर्ष 2025 में वरिष्ठ माओवादी कैडरों बसवराजू, सुधाकर, चलपति, मोडेम बालकृष्ण, उदय, साहदेव और विवेक मांझी की मृत्यु से संगठन पूरी तरह अव्यवस्थित हो गया था। 22 सितम्बर 2025 को हुई मुठभेड़ में कोसा दादा और राजू दादा की मौत ने इस प्रतिबंधित और अवैध संगठन को और अधिक कमजोर कर दिया है।

नक्सलियों से बरामद नक्सल साहित्य और हथियार।

इसके साथ ही आईजी ने ऐलान किया कि जल्द ही माओवादी संगठन को पूरी तरीके से खत्म कर दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि अब बस्तर में छोटे नक्सल कैडर इन आंध्रा के बड़े नक्सल नेताओं के ढाल नहीं बन रहे हैं। वे मुठभेड़ मे बड़े नेताओं को छोड़ भाग जा रहे है। वे अपील भी कर रहे हैं कि नक्सल संगठन को छोड़ मुख्यधारा में जुड़े।

पी सुन्दरराज ने उदाहरण देते हुए बताया कि माओवादियों के सेंट्रल कमिटी महासचिव के मुठभेड़ के समय भी स्थानीय जनमिलिशिया सदस्य और स्थानीय नक्सलियों ने टॉप लीडरो का साथ नहीं दिया। इसी तरह कल के मुठभेड़ मे भी टॉप लीडर्स को स्थानीय माओवादियों का साथ नहीं मिला। यही वजह है कि मुठभेड़ में मारे जाने के बाद सीसी मेंबर्स का शव आसानी से रिकवर हो जाता है।

राजू दादा और कोसा दादा पर 91 केस थे दर्ज

आईजी ने बताया कि राजू दादा और कोसा दादा पर कुल 91 क्रीमनल केस दर्ज थे। इन माओवादियों पर अलग-अलग राज्यों मे मिलाकर हर एक पर 1 करोड़ 80 लाख का इनाम घोषित है। इन दोनों माओवादियों पर पुरे बस्तर संभाग मे सैकड़ो सुरक्षा बलों के जवानों और सिविलियनों के हत्या के मामले दर्ज हैं।

आईजी सुंदरराज बरामद हथियार की जांच करते हुए।

IG सुन्दरराज ने कहा कि प्रतिबंधित माओवादी संगठन के खिलाफ चलाए जा रहे निर्णायक अभियानों से संगठन को बड़ी चोट पहुंची है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और प्रतिकूल मौसम के बावजूद बस्तर में तैनात पुलिस और सुरक्षा बल बस्तर की जनता की आकांक्षाओं के अनुरूप पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ सेवा कर रहे हैं।

आईजी ने माओवादी कैडरों और उनके नेतृत्व से अपील की है कि वे यह स्वीकार करें कि माओवादी आंदोलन अब अपने अंत की ओर है। यह समय है कि वे हिंसा का मार्ग त्यागकर मुख्यधारा में लौटें और सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत सुरक्षा और लाभ प्राप्त करें।

डेढ़ साल में नारायणपुर में 127 माओवादी मारे गए

एसपी नारायणपुर रोबिनसन गुड़िया ने कहा, ‘अबूझमाड़ में केंद्रीय समिति के दो शीर्ष नक्सलियों के मारे जाने से संगठन को बहुत बड़ा झटका लगा है। यह वही नेतृत्व था, जो पिछले तीन दशकों से नक्सलियों की हिंसक गतिविधियों को संचालित कर रहा था।’

एसपी ने आगे कहा, ‘इनके खात्मे से नक्सलियों की कमर टूटी है और सुरक्षा बलों का मनोबल और ऊंचा हुआ है। हम नक्सल मुक्त बस्तर के अपने लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। अबूझमाड़ क्षेत्र में नक्सल उन्मूलन के लिए चलाए जा रहे संयुक्त अभियान में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त हुई है।’

एसपी ने बताया कि आईटीबीपी, बीएसएफ एसटीएफ और डीआरजी की संयुक्त कार्रवाई में 2024 से अब तक कुल 127 माओवादी मारे जा चुके हैं। यह उपलब्धि सुरक्षा बलों के समन्वित प्रयासों और लगातार चल रहे सर्च एवं डोमिनेशन ऑपरेशनों का परिणाम है, जिससे अबूझमाड़ क्षेत्र में नक्सलियों की गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगा है।

यह भी पढ़ें : माओवादियों को तगड़ा झटका, मुठभेड़ में केंद्रीय समिति के सदस्य राजू दादा और कोसा दादा मारे गए

दानिश अनवर

दानिश अनवर, द लेंस में जर्नलिस्‍ट के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों का अनुभव है। द लेंस से पहले दैनिक भास्‍कर में इन्‍वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग टीम में सीनियर रिपोर्टर, नवभारत में क्राइम रिपोर्टर, नईदुनिया में स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट और पत्रिका अखबार में रिपोर्टर के तौर पर 10 साल काम किया। इन सभी अखबारों में दानिश अनवर ने विभिन्न विषयों जैसे- क्राइम, पॉलिटिकल, एजुकेशन, स्‍पोर्ट्स, कल्‍चरल और स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन स्‍टोरीज कवर की हैं। दानिश को प्रिंट का अच्‍छा अनुभव है। वह सेंट्रल इंडिया के कई शहरों में काम कर चुके हैं।

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