13 जून शनिवार सुबह असम के जोरहाट स्थित रौरिया एयरबेस पर भारतीय वायुसेना का एक AN-32 मालवाहक विमान लैंडिंग के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में आग लग गई और वह दो टुकड़ों में बंट गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, विमान एयरबेस पर उतरने की कोशिश कर रहा था तभी यह हादसा हो गया। पायलट की जान जाने की आशंका है। भारतीय वायुसेना ने अभी तक आधिकारिक रूप से हताहतों की पुष्टि नहीं की है और पूरे मामले की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं।
AN-32 विमान की खासियत
AN-32 सोवियत मूल का मजबूत मालवाहक विमान है, जिसका इस्तेमाल सैनिकों और सामान की ढुलाई के लिए किया जाता है। यह पहाड़ी, दुर्गम और ऊंचे इलाकों में भी आसानी से उतरने और उड़ान भरने में सक्षम है। खासकर हिमालय क्षेत्र और गर्म मौसम में इसकी विश्वसनीयता के कारण भारतीय वायुसेना इसे बहुत महत्व देती है।भारतीय वायुसेना के पास फिलहाल करीब 100 AN-32 विमान सक्रिय हैं। शुरू में 125 विमान खरीदे गए थे, लेकिन समय के साथ संख्या घटकर 100 रह गई है। 1980 के दशक से यह विमान वायुसेना की मध्यम दूरी की ट्रांसपोर्ट क्षमता की रीढ़ बना हुआ है।
इस साल जनवरी से जून तक वायुसेना के विमानों से जुड़े कई हादसे हो चुके हैं:
21 जनवरी 2026: उत्तर प्रदेश में एक ट्रेनिंग विमान दुर्घटनाग्रस्त हुआ। दोनों पायलट सुरक्षित इजेक्ट हो गए।
7 फरवरी 2026: HAL तेजस लड़ाकू विमान टेक-ऑफ के दौरान रनवे से बाहर चला गया। सॉफ्टवेयर गड़बड़ी बताई गई।
5 मार्च 2026: असम के कार्बी आंगलोंग में Su-30MKI क्रैश, दोनों पायलट शहीद।
17 अप्रैल 2026: पुणे एयरपोर्ट पर लड़ाकू विमान की हार्ड लैंडिंग, रनवे 11 घंटे बंद रहा।
रौरिया एयरबेस दुर्घटना की जांच चल रही है। वायुसेना ने कहा है कि तकनीकी और मानवीय कारणों की जांच की जाएगी।











