अमेरिका ने कहा ‘रूसी तेल खरीदने की छूट अब नहीं बढ़ाएंगे’, भारत पर क्या होगा असर ?

लेंस न्यूज़ । अमेरिका ने साफ कर दिया है कि वह रूसी और ईरानी तेल खरीदने की अस्थायी छूट और मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच सैंक्शंस वेवर को आगे नहीं बढ़ाएगा। इस फैसले से भारत समेत कई देशों को रूसी तेल सस्ते दामों पर खरीदने में दिक्कत हो सकती है। अमेरिकी अधिकारी स्कॉट बेसेंट ने बुधवार को पत्रकारों से कहा, ‘हम Russian oil पर दी गई जनरल लाइसेंस को नवीनीकृत नहीं करेंगे और न ही ईरानी तेल वाली छूट को बढ़ाएंगे। यह छूट 11 मार्च से पहले जहाज़ों पर लदे तेल के लिए था, जिसका इस्तेमाल अब हो चुका है।’

छूट क्यों दी गई थी?

मार्च 2026 में ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण कर लिया, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हुई और कीमतें बढ़ गईं। इस संकट को कम करने के लिए अमेरिका ने छोटी अवधि की छूट दी थी: रूसी तेल के लिए 30 दिन की छूट (12 मार्च तक लदा तेल) जो 11 अप्रैल को समाप्त हो गया है जबकि ईरानी तेल के लिए छूट अब 19 अप्रैल को समाप्त होने वाली है। इस छूट से दुनिया के बाजार में अतिरिक्त तेल पहुंच सका और कीमतों पर कुछ नियंत्रण रहा। अब अमेरिका ‘अधिकतम दबाव’ की नीति पर लौट रहा है, खासकर ईरान पर।

भारत को कैसे फायदा हुआ था?

भारत इस छूट का बड़ा लाभार्थी रहा। रिपोर्ट्स के अनुसार, भारतीय रिफाइनरियों ने इस दौरान करीब 3 करोड़ बैरल रूसी तेल के ऑर्डर दिए थे। रिलायंस जैसी बड़ी कंपनियों ने रूस से खरीदारी पहले कम की थी लेकिन छूट मिलने के बाद फिर बढ़ा दी। छूट के दौरान लगभग सात साल बाद ईरानी क्रूड तेल के दो सुपर टैंकर भारतीय बंदरगाहों पर पहुंचे थे। पहले ईरान भारत का बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता था (कुल आयात का 11.5% तक), लेकिन 2019 से सैंक्शंस के कारण आयात बंद हो गया था।

अब क्या होगा ?

छूट समाप्त होने के बाद भारत को रूसी तेल खरीदते समय अमेरिकी सैंक्शंस का खतरा बढ़ सकता है। इससे तेल की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं और भारत को अन्य देशों (मध्य पूर्व, अमेरिका आदि) से महंगा तेल खरीदना पड़ सकता है। अमेरिका में डेमोक्रेटिक पार्टी के नेताओं ने इस छूट की पहले ही आलोचना की थी। उन्होंने कहा कि इससे रूस को युद्ध के लिए अतिरिक्त धन मिल रहा है।

भारत के लिए चुनौती

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। सस्ता रूसी तेल उसकी ऊर्जा सुरक्षा और रिफाइनरी लागत को नियंत्रित रखने में मदद करता रहा है। अब सरकार और रिफाइनरियां वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करेंगी। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि भारत इस फैसले पर अमेरिका से बातचीत करेगा या नहीं, लेकिन ऊर्जा बाजार में नई अनिश्चितता पैदा हो गई है।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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