अम्बेडकर अस्पताल में बना रिकॉर्ड, 10.30 किलो वजनी विशाल ट्यूमर सफलता पूर्वक निकाला गया, मरीज के 15 साल की पीड़ा का अंत

रायपुर। डॉ. भीमराव अम्बेडकर स्मृति चिकित्सालय,रायपुर के सर्जरी विभाग ने एक जटिल और दुर्लभ शल्य चिकित्सा कर चिकित्सा जगत में नई मिसाल कायम की है। अस्पताल की टीम ने एक मरीज के शरीर से 10.30 किलोग्राम वजनी विशाल ट्यूमर को सफलतापूर्वक (Ambedkar Hospital creates record) निकाल दिया।

यह ट्यूमर पिछले 15 वर्षों से मरीज की पीठ पर धीरे-धीरे बढ़ रहा था और उसके दैनिक जीवन को बुरी तरह प्रभावित कर रहा था। यह ऑपरेशन न केवल भारत में अब तक के सबसे भारी ट्यूमरों में से एक है बल्कि छत्तीसगढ़ के सरकारी चिकित्सा तंत्र की क्षमता, विशेषज्ञता और मानवीय संवेदना का भी जीवंत प्रमाण है।

15 साल की पीड़ा का अंत

मरीज पिछले करीब 15 वर्षों से इस बढ़ते हुए ट्यूमर के बोझ से जूझ रहा था। धीरे-धीरे यह गांठ इतनी बड़ी हो गई कि चलना-फिरना, बैठना, उठना और सोना तक मुश्किल हो गया था। शारीरिक दर्द के साथ-साथ सामाजिक असहजता और मानसिक तनाव भी मरीज को लगातार सताता रहा। जब मरीज अम्बेडकर अस्पताल पहुंचा, तो सर्जरी विभाग की टीम ने तुरंत मामले की गंभीरता को समझते हुए विस्तृत जांच, रेडियोलॉजिकल टेस्ट और बहु-विभागीय तैयारी शुरू की।

कुशल टीम का शानदार प्रदर्शन

यह जटिल ऑपरेशन डॉ. संतोष सोनकर (अस्पताल अधीक्षक एवं लेप्रोस्कोपिक एवं जनरल सर्जन) और डॉ. मंजू सिंह (सर्जरी विभागाध्यक्ष) के नेतृत्व में संपन्न हुआ। टीम में डॉ. राजेंद्र रात्रे, डॉ. मयंक भूषण मिश्रा और डॉ. प्रेक्षा जैन (सीनियर रेजिडेंट) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। एनेस्थीसिया टीम की ओर से डॉ. जया लालवानी और डॉ. प्रतिभा जैन शाह ने ऑपरेशन के दौरान मरीज की स्थिति को स्थिर रखने में उत्कृष्ट कार्य किया। ऑपरेशन के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव की संभावना, महत्वपूर्ण ऊतकों की सुरक्षा और पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल जैसी चुनौतियों का सामना करते हुए पूरी टीम ने बेहतरीन समन्वय और धैर्य दिखाया। ऑपरेशन के बाद मरीज की हालत स्थिर रही और उसे स्वस्थ अवस्था में डिस्चार्ज कर दिया गया।

भारत में दुर्लभ उपलब्धि

उपलब्ध मेडिकल रिकॉर्ड के अनुसार, भारत में अब तक लगभग 8 किलोग्राम तक के ट्यूमर निकालने के मामले दर्ज हैं, जबकि विश्व स्तर पर 22 किलोग्राम तक के उदाहरण मिलते हैं। ऐसे में 10.30 किलो का यह सफल निष्कासन भारत के संदर्भ में अत्यंत उल्लेखनीय और गौरवपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। डॉ. संतोष सोनकर ने कहा, ‘यह केवल एक ऑपरेशन नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में उच्च स्तरीय जटिल शल्य चिकित्सा की क्षमता का प्रमाण है। जब टीमवर्क, विशेषज्ञता और समर्पण साथ आते हैं, तो असंभव भी संभव हो जाता है। मरीज के चेहरे पर लौटी मुस्कान ही हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि है।’

छत्तीसगढ़ के लिए प्रेरणा

यह सफलता पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है। यह दर्शाती है कि राज्य के सरकारी अस्पताल भी जटिल से जटिल मामलों में विश्व स्तरीय उपचार दे सकते हैं। अम्बेडकर अस्पताल लगातार गंभीर मरीजों को बेहतरीन सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। यह केस उन हजारों मरीजों के लिए आशा की किरण है, जो लंबे समय से चली आ रही जटिल समस्याओं से जूझ रहे हैं। सही समय पर सही टीम और उचित उपचार से जीवन को नया आयाम मिल सकता है। अम्बेडकर अस्पताल रायपुर एक बार फिर साबित कर चुका है कि सेवा, संवेदना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण जब मिलते हैं, तो चिकित्सा उपचार से आगे बढ़कर जीवन को पुनर्जन्म देने का माध्यम बन जाती है।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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