PDA आरक्षण पर अखिलेश यादव ने सरकार पर बोला हमला, कहा – यह 5% बनाम 95% की लड़ाई

Akhilesh Yadav

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर आरक्षण और सामाजिक न्याय को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष Akhilesh Yadav ने लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान योगी सरकार पर तीखा हमला बोला और आरक्षण व्यवस्था में ‘लूट’ का आरोप लगाया।

अखिलेश यादव ने इस मौके पर ‘PDA आरक्षण ऑडिट रिपोर्ट’ जारी करते हुए कहा कि प्रदेश में आरक्षण के नाम पर गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जानबूझकर पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक (PDA) वर्ग के अधिकारों को कमजोर कर रही है।

सपा प्रमुख ने कहा कि आरक्षण व्यवस्था को कमजोर करने की साजिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार समान अवसर नहीं देना चाहती और आरक्षण को खत्म करने की दिशा में काम कर रही है।

अखिलेश यादव ने कहा, ‘यह सरकार आरक्षण विरोधी है और आरक्षण की खुली डकैती कर रही है।’

उन्होंने दावा किया कि 2014 के बाद से आरक्षण व्यवस्था को प्रभावित करने के प्रयास बढ़े हैं और यह अब ‘डायरेक्ट नहीं तो इनडायरेक्ट तरीके से खत्म’ किया जा रहा है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने सामाजिक असमानता का मुद्दा उठाते हुए इसे ‘5 प्रतिशत बनाम 95 प्रतिशत की लड़ाई’ बताया। उन्होंने कहा कि देश में वर्चस्ववादी ताकतें और वंचित समाज के बीच संघर्ष लगातार बढ़ रहा है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वंचित वर्ग को मुख्यधारा से दूर रखने की कोशिश की जा रही है और उन्हें केवल शारीरिक श्रम तक सीमित करने का प्रयास हो रहा है।

अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार पक्षपाती तरीके से काम कर रही है और “जो सरकार पक्षपाती होती है, वह विश्वासघाती होती है।” उन्होंने आरोप लगाया कि नौकरियों में आरक्षण के साथ छेड़छाड़ की जा रही है और भर्ती प्रक्रियाओं में भी भेदभाव देखने को मिल रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार वास्तव में बुलडोजर चलाना चाहती है तो उसे ‘गैर-बराबरी और आरक्षण की लूट’ के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, यह बयान समाजवादी पार्टी की आगामी चुनावी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें पार्टी ‘PDA फार्मूला’ के जरिए पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक मतदाताओं को एकजुट करने की कोशिश कर रही है।

सपा का कहना है कि वह इस मुद्दे को लगातार जनता के बीच उठाएगी और आरक्षण व्यवस्था में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की मांग करेगी।

इस बयान के बाद यूपी की राजनीति में एक बार फिर आरक्षण और सामाजिक न्याय का मुद्दा गरमा गया है और सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच सियासी टकराव और तेज होने के आसार हैं।

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