नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट की एक खंडपीठ ने Adani Enterprises की ओर से जयप्रकाश एसोसिएट्स लिमिटेड (JAL) के अधिग्रहण के लिए पेश किए गए रेजोल्यूशन प्लान पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जोयमाल्या बागची की बेंच ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) और नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के पिछले आदेशों में भी दखल देने से मना कर दिया।
हालांकि, अदालत ने साफ तौर पर कहा कि रेजोल्यूशन प्लान को लागू करते समय कोई भी महत्वपूर्ण कदम उठाने से पहले NCLAT की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। साथ ही अपीलेट ट्रिब्यूनल को इस मामले की सुनवाई जल्द से जल्द पूरी करने का निर्देश दिया गया है। मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल को निर्धारित की गई है।
यह पूरा विवाद Vedanta Limited की आपत्ति से जुड़ा है। वेदांता का दावा है कि उसने JAL के लिए अधिक मूल्य वाला ऑफर दिया था, लेकिन क्रेडिटर्स की समिति (CoC) ने उसे नजरअंदाज कर अदानी के प्लान को मंजूरी दे दी। अदानी एंटरप्राइजेज का कुल प्लान करीब 14,543 करोड़ रुपये का है, जबकि वेदांता का नेट प्रेजेंट वैल्यू (NPV) आधारित ऑफर लगभग ₹12,505 करोड़ बताया गया है, जिसे कंपनी ज्यादा फायदेमंद मानती है।
वेदांता ने आगे आरोप लगाया कि बोली प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं थी और उसे अपने प्रस्ताव को और स्पष्ट करने या सुधारने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया। नवंबर 2025 में वेदांता ने अपना ऑफर और बेहतर करते हुए लगभग 6,563 करोड़ रुपये नकद और 800 करोड़ रुपये इक्विटी का प्रस्ताव रखा था।
दूसरी ओर, ऋणदाताओं और CoC ने अदानी के प्लान का समर्थन किया। उनका तर्क है कि केवल बोली की राशि ही निर्णायक नहीं होती। प्लान की व्यावहारिकता, भुगतान की गति और सफलतापूर्वक लागू करने की क्षमता भी उतनी ही अहम है।
अदानी का प्लान लगभग ₹6,000 करोड़ का अग्रिम नकद भुगतान और दो साल के अंदर बाकी राशि चुकाने का वादा करता है। वहीं, वेदांता का प्रस्ताव भुगतान को पांच साल तक फैला हुआ था, जो लेंडर्स को कम आकर्षक लगा।
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल अदानी के प्लान को आगे बढ़ने की अनुमति दे दी है, लेकिन बड़े फैसलों पर NCLAT की मंजूरी की शर्त लगा दी है। इससे दोनों पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए मामले की गहन सुनवाई का रास्ता खुला रहता है।











