IPS प्रमोशन को लेकर गंभीर आरोपों की शिकायत राष्ट्रपति और गृह मंत्रालय तक पहुंची

December 3, 2025 2:21 PM
IPS

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य पुलिस सेवा (SPS) से भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में हाल ही में हुए एक प्रमोशन को लेकर विवाद गहराता दिखाई दे रहा है। रायपुर के अधिवक्ता नरेश चंद्र गुप्ता के राष्ट्रपति भवन को भेजे गए एक शिकायत में दावा किया गया है कि पंकज चंद्रा के IPS प्रमोशन में ‘गंभीर लंबित शिकायतों’ और ‘कथित अनियमितताओं’ को नजरअंदाज किया गया है।

राष्ट्रपति को भेजे इस शिकायत की प्रतिलिपि संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) के चेयरमैन, पीएमओ के प्रमुख सचिव, केंद्रीय गृह मंत्री, डीओपीटी के सचिव, केंद्रीय गृह सचिव को भेजी गई है।  

यह शिकायत 25 सितंबर 2025 को भेजा गया था, जिसे बाद में गृह मंत्रालय ने 8 अक्टूबर 2025 को छत्तीसगढ़ सरकार और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को भेजा है और मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं।

अधिवक्ता नरेश चंद्र गुप्ता के भेजे गए दस्तावेज़ों में कई मामलों का हवाला दिया गया है, जिनमें सबसे प्रमुख मनी भूषण प्रकरण के अलावा अन्य लंबित शिकायतें हैं।

इस शिकायत में दावा किया गया है कि वर्ष 2021 में ACB/EOW में तैनाती के दौरान, पंकज चंद्रा पर एक वरिष्ठ IPS अधिकारी को फंसाने की साजिश में शामिल होने का आरोप लगा था। आरोप है कि 2 किलोग्राम सोना वाहन में रखकर झूठा केस तैयार किया गया। यह मामला बाद में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट द्वारा ‘द्वेशपूर्ण अभियोजन’ के आधार पर रद्द किया गया।

शिकायत में कहा गया है कि संबंधित अधिकारी मनी भूषण ने 2 मई 2024 को रायपुर सिविल लाइन थाने में विस्तृत शिकायत दर्ज कराई थी। इसे अब तक लंबित रखे जाने का दावा श्री गुप्ता की तरफ से किया गयौ। 2. अन्य लंबित शिकायतें

शिकायत के अनुसार, कई अन्य व्यक्तियों सुखसागर सिंह, मनीष भोई, दिनेश साहू, खलील अहमद और विजय पांडे ने भी कथित दबाव, धमकी और सबूत गढ़ने संबंधी शिकायतें दर्ज करवाई हैं। दस्तावेज में कहा गया है कि इन शिकायतों का समय पर निपटारा न होना प्रमोशन प्रक्रिया पर प्रश्न उठाता है।

इन शिकायतों के आधार पर गृह मंत्रालय द्वारा 8 अक्टूबर 2025 को जारी पत्र में अधिवक्ता नरेश चंद्र गुप्ता की शिकायत छत्तीसगढ़ सरकार और UPSC को भेजी गई है। हालांकि यह पहले से ही छत्तीसगढ़ सरकार और यूपीएससी के पास है।

गृह मंत्रालय ने पत्र में उल्लेख किया है कि मामला स्वतः स्पष्ट है और संबंधित दस्तावेज संलग्न है। यदि राज्य सरकार और UPSC इन शिकायतों की जांच खोलते हैं, तो प्रमोशन प्रक्रिया की समीक्षा संभव है।

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