रायपुर। देश के 100 शहरों को स्मार्ट बनाने के लिए शुरू किए गए स्मार्ट सिटी (Smart City) मिशन की समय सीमा खत्म होने के बाद भी हजारों करोड़ रुपये के काम अधूरे हैं। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के अधिवक्ता मनोज सिंह ठाकुर ने केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय से RTI के जरिए मिली जानकारी के आधार पर यह दावा किया है। उनके मुताबिक, देशभर में 8,047 करोड़ रुपये की लागत वाले 259 प्रोजेक्ट अब भी पूरे नहीं हुए हैं। इनमें छत्तीसगढ़ के रायपुर और बिलासपुर के काम भी शामिल हैं।
1.64 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट, 259 काम अधूरे
मनोज सिंह ठाकुर ने बताया कि मंत्रालय से 12 अक्टूबर 2026 को मिले RTI जवाब के अनुसार, स्मार्ट सिटी मिशन के तहत देशभर में 1 लाख 64 हजार 811 करोड़ रुपये की लागत से 8,064 प्रोजेक्ट स्वीकृत किए गए थे। इनमें 7,805 प्रोजेक्ट पूरे होने की जानकारी दी गई है, जबकि 259 प्रोजेक्ट अधूरे दर्ज हैं। स्मार्ट सिटी मिशन की समय सीमा 31 मार्च 2025 को समाप्त हो चुकी है।
दस्तावेजों के मुताबिक, सबसे अधिक लंबित राशि वाले 15 शहरों में ही 4,497 करोड़ रुपये के काम अधूरे हैं। इनमें कल्याण-डोंबिवली, पोर्ट ब्लेयर, तिरुपति, सिलवासा और करनाल जैसे शहर शामिल हैं। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में 161 करोड़ रुपये के आठ और रायपुर में 27 करोड़ रुपये के तीन प्रोजेक्ट अधूरे बताए गए हैं।
रायपुर में विकास कार्यों के पैसे से प्रशासनिक खर्च का आरोप
अधिवक्ता ठाकुर ने रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के वित्तीय प्रबंधन पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि 12 जनवरी 2026 के उपयोगिता प्रमाण-पत्र में प्रशासनिक खर्च के लिए निर्धारित राशि के अलावा प्रोजेक्ट फंड से 1.82 करोड़ रुपये उधार लेकर खर्च किए जाने का उल्लेख है।
उन्होंने इसे विकास कार्यों के लिए मिले पैसे का दूसरे मद में इस्तेमाल बताते हुए जांच की मांग की है। हालांकि, इस राशि का इस्तेमाल नियमों के खिलाफ हुआ या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
दूसरे शहरों को 490 करोड़, रायपुर को मिले 453 करोड़
RTI से मिली जानकारी का हवाला देते हुए ठाकुर ने बताया कि जबलपुर, इंदौर, भुवनेश्वर और नागपुर को केंद्र सरकार से 490-490 करोड़ रुपये मिले, जबकि रायपुर को 453 करोड़ रुपये ही जारी किए गए। उन्होंने करीब 37 करोड़ रुपये के अंतर का कारण स्पष्ट करने की मांग की है।
ठाकुर के मुताबिक, मंत्रालय ने अपने जवाब में मिशन की समय सीमा समाप्त होने की जानकारी दी है और स्थानीय स्तर के मामलों के लिए संबंधित राज्य सरकार तथा स्मार्ट सिटी की विशेष प्रयोजन कंपनी (SPV) से संपर्क करने को कहा है।
CAG ऑडिट की मांग, हाईकोर्ट जाने की चेतावनी
मनोज सिंह ठाकुर ने स्मार्ट सिटी मिशन के तहत खर्च की गई राशि और अधूरे प्रोजेक्ट की नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जनता के पैसे से शुरू किए गए काम समय सीमा बीतने के बाद भी अधूरे क्यों हैं, इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
उन्होंने चेतावनी दी कि जल्द जांच शुरू नहीं हुई तो मामले को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की जाएगी। फिलहाल इन आरोपों पर रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड और संबंधित सरकारी अधिकारियों का पक्ष सामने नहीं आया है।









