महादेव सट्टा ऐप केस : दीपक बैज ने पूछा- सौरभ चंद्राकर को ले आए, रवि उप्पल और शुभम सोनी को कब पकड़ेंगे?

रायपुर। महादेव सट्टा ऐप (Mahadev Satta App) मामले के मुख्य आरोपी सौरभ चंद्राकर को ओमान से भारत लाए जाने के बाद छत्तीसगढ़ में एक बार फिर सियासत गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने बुधवार को पत्रकार वार्ता में भाजपा सरकार पर कई सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सौरभ चंद्राकर को रायपुर तो ले आया गया, लेकिन उसके साथी रवि उप्पल और शुभम सोनी अब तक जांच एजेंसियों की पकड़ से बाहर क्यों हैं? बैज ने आरोप लगाया कि भाजपा ने विधानसभा चुनाव के दौरान महादेव ऐप मामले को लेकर कांग्रेस सरकार को बदनाम किया, लेकिन सत्ता में आने के बाद इस पूरे नेटवर्क को बंद नहीं कर पाई।

शुभम सोनी को लेकर भाजपा से मांगा जवाब

दीपक बैज ने कहा कि 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान शुभम सोनी का एक वीडियो सामने आया था। इसमें उसने खुद को महादेव सट्टा ऐप का मालिक बताया था और दावा किया था कि सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल उसके लिए काम करते हैं। भाजपा ने अपने प्रदेश कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर यह वीडियो जारी किया था और इसी आधार पर तत्कालीन कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पर आरोप लगाए थे।

बैज ने सवाल उठाया कि जब भाजपा ने शुभम सोनी के दावों को आधार बनाकर कांग्रेस पर आरोप लगाए थे, तो अब उसे भारत लाकर पूछताछ क्यों नहीं की जा रही है? उन्होंने कहा कि सौरभ चंद्राकर के साथ रवि उप्पल और शुभम सोनी को भी जांच के दायरे में लाया जाना चाहिए।

कांग्रेस सरकार ने दर्ज कराई थीं 72 FIR, बैज का दावा

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने सौरभ चंद्राकर के प्रत्यर्पण का श्रेय पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार की कार्रवाई को दिया। उन्होंने दावा किया कि भूपेश बघेल सरकार के दौरान महादेव सट्टा ऐप के खिलाफ पहली FIR दर्ज हुई थी और बाद में कुल 72 मामले दर्ज किए गए। इस दौरान 500 से अधिक जब्ती और गिरफ्तारी की कार्रवाइयां भी की गई थीं।

बैज के मुताबिक, कांग्रेस सरकार के अनुरोध पर महादेव ऐप को गूगल प्ले स्टोर से हटाया गया था। रायपुर पुलिस की अर्जी पर सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर भी जारी हुआ था। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन सट्टेबाजी पर रोक लगाने के लिए उनकी सरकार ने कानून भी बनाया था।

तीन साल में महादेव ऐप क्यों नहीं हुआ बंद?

दीपक बैज ने भाजपा सरकार से पूछा कि प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के करीब तीन साल बाद भी महादेव सट्टा ऐप का नेटवर्क पूरी तरह बंद क्यों नहीं हुआ? उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर आज भी महादेव और दूसरे ऑनलाइन सट्टेबाजी ऐप के विज्ञापन दिखाई दे रहे हैं।

बैज ने रेड्डी अन्ना, फेयरप्ले, लोटस 365, महाकाल बुक, विनबज और स्काई एक्सचेंज सहित कई ऑनलाइन सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म के नाम गिनाते हुए दावा किया कि प्रदेश में ऐसे दर्जनों पैनल सक्रिय हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि पिछले तीन वर्षों में इन प्लेटफॉर्म के खिलाफ कितनी कार्रवाई की गई और कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया।

PMO और प्रसार भारती के अधिकारियों पर भी लगाए आरोप

पत्रकार वार्ता में दीपक बैज ने कुछ वरिष्ठ अधिकारियों की कथित भूमिका की जांच की मांग भी उठाई। उन्होंने आरोप लगाया कि दिसंबर 2025 में महादेव ऐप मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय से जुड़े अधिकारी हीरेन जोशी, हितेश जैन और प्रसार भारती के अध्यक्ष नवनीत सहगल के नाम सामने आए थे। बैज ने दावा किया कि इन लोगों ने सट्टेबाजी नेटवर्क को संरक्षण दिया और सवाल उठाया कि इनके खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई।

उन्होंने भाजपा आर्थिक प्रकोष्ठ के पूर्व संयोजक विकास गर्ग की कथित भूमिका पर भी सवाल उठाए। बैज ने आरोप लगाया कि प्रभावशाली लोगों को बचाने के लिए जांच की दिशा भटकाई जा रही है। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में स्वतंत्र रूप से सत्यापित प्रमाण सामने नहीं रखे गए हैं।

सट्टेबाजी के विज्ञापनों पर रोक क्यों नहीं?

बैज ने केंद्र और राज्य सरकार के संबंधित विभागों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब सोशल मीडिया पर सट्टेबाजी ऐप के विज्ञापन खुलेआम दिखाई दे रहे हैं, तो केंद्र का आईटी विभाग और राज्य के गृह तथा वित्त विभाग कार्रवाई क्यों नहीं कर रहे हैं?

उन्होंने 50 हजार करोड़ रुपये से अधिक की कथित टैक्स कमाई और राजनीतिक संरक्षण को लेकर भी सवाल उठाए। साथ ही सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि ऑनलाइन सट्टेबाजी के कारोबार पर रोक लगाने के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं।

दीपक बैज ने कहा कि केवल सौरभ चंद्राकर को भारत लाने से महादेव सट्टा ऐप मामले की पूरी सच्चाई सामने नहीं आएगी। इसके लिए रवि उप्पल, शुभम सोनी और नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों की भूमिका की भी जांच जरूरी है। फिलहाल कांग्रेस के इन आरोपों पर भाजपा सरकार और संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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