ईरान | ईरान (Iran) की एक अदालत ने मशहूर फिल्म निर्देशक जाफर पनाही को पांच साल एक महीने की जेल की सजा सुनाई है। अदालत ने उनकी पूरी संपत्ति जब्त करने का भी आदेश दिया है। इसके अलावा दो साल तक उनके विदेश जाने और सोशल मीडिया इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी गई है। 66 साल के पनाही ने पिछले साल कान फिल्म महोत्सव में अपनी फिल्म ‘इट वाज जस्ट एन एक्सीडेंट’ के लिए सबसे बड़ा पुरस्कार पाल्मे डी’ओर जीता था। अदालत ने यह फैसला उनकी गैरमौजूदगी में सुनाया है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि उन्हें किस मामले में सजा दी गई है।
सुनवाई की खबर तक नहीं थी, बैंक खाते फ्रीज होने पर चला पता
पनाही के वकील मुस्तफा नीली ने ईरानी समाचार संस्थान एमतदाद को बताया कि उनके खिलाफ अभी तीन मामले चल रहे हैं। ताजा मामले में अदालत ने सुनवाई कब की, इसकी जानकारी भी पनाही को नहीं दी गई थी। पिछले हफ्ते जब उनके बैंक खाते फ्रीज किए गए, तब उन्हें इस कार्रवाई का पता चला।
समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, सजा सुनाए जाने के बाद सोमवार शाम पनाही की उनके एक दोस्त से बातचीत हुई थी। उस समय तक उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया था।
पनाही को पिछले साल भी सरकार के खिलाफ प्रचार करने के आरोप में एक साल जेल की सजा सुनाई गई थी। इसके बावजूद वह अपनी फिल्म के प्रचार के लिए विदेश गए थे और इसी साल मार्च में ईरान लौट आए थे।
संपत्ति जब्त करने के फैसले पर वकील ने उठाए सवाल
ईरान में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को कानूनी मदद देने वाले संगठन दादबान के वकील मोईन खजाएली ने संपत्ति जब्त करने के आदेश पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सरकार को यह बताना होगा कि पनाही की संपत्ति का कथित अपराध से क्या संबंध है। अगर इसके लिए कोई ठोस कानूनी आधार नहीं है, तो यह फैसला ईरान के संविधान के खिलाफ हो सकता है।
पनाही अपनी फिल्मों में ईरान के आम लोगों की जिंदगी, सरकारी पाबंदियों और समाज की परेशानियों को दिखाते रहे हैं। उनकी कई फिल्मों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार मिले हैं। हालांकि, अपने काम की वजह से उन्हें पहले भी जेल और कई तरह की पाबंदियों का सामना करना पड़ा है।
साथी कलाकारों ने किया विरोध, कहा- उनकी आवाज दबाने की कोशिश
पनाही को सजा सुनाए जाने के बाद कई कलाकारों ने इस फैसले की आलोचना की है। ईरानी अभिनेत्री सितारेह मालेकी ने कहा कि किसी भी तानाशाही सरकार को सबसे ज्यादा डर उन कहानियों से होता है, जिन्हें वह अपने हिसाब से नहीं चला सकती। जब ये कहानियां दुनिया तक पहुंच जाती हैं, तो उन्हें दबाना आसान नहीं रहता।
ईरानी-ब्रिटिश अभिनेत्री नाजनीन बोनियादी ने भी पनाही का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि पनाही लंबे समय से अपनी फिल्मों के जरिए ईरान में हो रही ज्यादतियों को सामने लाते रहे हैं। उन्हें दोबारा जेल की सजा देना उनकी आवाज बंद करने की एक और कोशिश है।
ईरान में गुप्त रूप से फिल्म बना रही एक महिला निर्देशक ने भी पनाही के समर्थन में बयान दिया है। नाम नहीं बताने की शर्त पर उन्होंने कहा कि पनाही ने हमेशा ईरान के लोगों की बात उठाई है। वह चुप नहीं बैठे और यही वजह है कि देश के कई कलाकार उनके साथ खड़े हैं।
ईरान में कलाकारों के खिलाफ बढ़ रही कार्रवाई
अमेरिका स्थित सेंटर फॉर ह्यूमन राइट्स इन ईरान ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि ईरान में कलाकारों, लेखकों, कवियों और संगीतकारों के खिलाफ कार्रवाई बढ़ रही है। संगठन के मुताबिक, सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने वाले लोगों को कानूनी मामलों और दूसरी पाबंदियों का सामना करना पड़ रहा है।
पनाही ने इस साल अमेरिका में द गार्जियन से बातचीत के दौरान भी ईरान के हालात पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि जब हिंसा लगातार जारी रहती है, तो उसे रोकना मुश्किल हो जाता है। उन्हें डर है कि ईरान में जिस तरह की सरकारी कार्रवाई हो रही है, उससे हिंसा का यह सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है।
फिलहाल पनाही की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन अदालत के नए फैसले के बाद ईरान में स्वतंत्र रूप से फिल्म बनाने वाले कलाकारों की मुश्किलों को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है।











