रायपुर में भूत-प्रेत भगाने के नाम पर दिव्य दरबार की तैयारी, पुलिस की सख्ती के बाद बदला कार्यक्रम

रायपुर। राजधानी रायपुर (Raipur) में भूत-प्रेत बाधा दूर करने के नाम पर दिव्य दरबार लगाने की तैयारी कर रहे आयोजकों को आखिरकार पुलिस की शर्तें माननी पड़ीं। गुढ़ियारी के अवधपुरी मैदान में 24 से 28 अक्टूबर तक प्रस्तावित कार्यक्रम के प्रचार में भूत-प्रेत बाधा दूर करने जैसे दावे किए गए थे। ऐसे पोस्टरों पर आपत्ति जताते हुए पुलिस ने पहले आयोजन की अनुमति देने से इनकार कर दिया। मामला सत्ता के गलियारों तक पहुंचा, लेकिन पुलिस अपने फैसले पर कायम रही। आखिरकार आयोजकों ने केवल धार्मिक कथा और भजन कराने पर सहमति जताई, जिसके बाद शर्तों के साथ कार्यक्रम की अनुमति दी गई है।

अंधविश्वास फैलाने वाले पोस्टरों पर पुलिस ने लगाई रोक

मां मातंगी दिव्य धाम के पीठाधीश्वर डॉ. प्रेमा साईं महाराज की ओर से पांच दिवसीय दिव्य दरबार और प्रेत दरबार आयोजित करने की तैयारी की गई थी। इसके लिए प्रचार-प्रसार भी शुरू हो गया था। कार्यक्रम के पोस्टरों में भूत-प्रेत बाधा दूर करने जैसे दावे किए गए थे। पुलिस ने इन्हीं दावों को अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाला मानते हुए आयोजन के इस स्वरूप पर आपत्ति जताई।

पुलिस का रुख था कि धार्मिक कथा और भजन आयोजित करने पर आपत्ति नहीं है, लेकिन भूत-प्रेत भगाने के नाम पर लोगों को भ्रमित करने वाली गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जा सकती।

सत्ता के दरवाजे खटखटाए, फिर भी नहीं बदला पुलिस का फैसला

अनुमति नहीं मिलने के बाद आयोजकों ने सत्ता से जुड़े लोगों तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की। इसके बावजूद पुलिस अपने फैसले पर कायम रही। इसी बीच डॉ. प्रेमा साईं महाराज ने प्रशासन पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए सवाल उठाया कि जब बागेश्वर धाम के कार्यक्रमों में दिव्य दरबार और प्रेत दरबार की अनुमति दी जाती है, तो उन्हें क्यों रोका जा रहा है।

महाराज ने अनुमति नहीं मिलने पर अन्न त्यागकर धरने पर बैठने की चेतावनी भी दी थी। उन्होंने कहा था कि उनका विरोध मुख्यमंत्री या सरकार से नहीं, बल्कि प्रशासन की कार्यप्रणाली से है। आयोजकों ने कार्यक्रम में करीब 35 से 40 हजार श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई थी।

आयोजकों को माननी पड़ी शर्त, अब केवल कथा और भजन

विवाद के बाद आखिरकार आयोजक कार्यक्रम का स्वरूप बदलने पर सहमत हुए। तय हुआ कि आयोजन में केवल धार्मिक कथा और भजन होंगे। भूत-प्रेत बाधा दूर करने के नाम पर कोई गतिविधि नहीं की जाएगी। इसी सहमति के बाद पुलिस ने कार्यक्रम की अनुमति दी है।

इस पूरे मामले ने धार्मिक आस्था और अंधविश्वास के बीच के फर्क को भी सामने रखा है। भूत-प्रेत बाधा दूर करने जैसे दावों का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है। ऐसे दावों के जरिए लोगों की परेशानियों और डर का फायदा उठाए जाने का खतरा रहता है। पुलिस ने इस मामले में धार्मिक आयोजन पर रोक लगाने के बजाय अंधविश्वास फैलाने वाली गतिविधियों पर आपत्ति जताई। अब देखना होगा कि कार्यक्रम के दौरान आयोजक तय शर्तों का पालन करते हैं या नहीं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now