बेटी की कंपनी को 1.72 करोड़ के भुगतान का मामला: FIR के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंचे पिनरायी विजयन, तत्काल सुनवाई नही

नई दिल्ली। केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और माकपा नेता पिनरायी विजयन (Pinarayi Vijayan)ने अपने खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले में प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज करने के केरल हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने गिरफ्तारी की आशंका जताते हुए तत्काल राहत मांगी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल तत्काल सुनवाई करने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि दशहरा अवकाश के दौरान विशेष पीठ के सामने मामले को रखने की संभावना देखी जा सकती है। ऐसा नहीं होने पर 26 अक्टूबर को अदालत खुलने के बाद सुनवाई पर विचार किया जाएगा।

वीणा टी की कंपनी को कथित तौर पर 1.72 करोड़ रुपये के भुगतान से जुड़ा यह मामला अब कानूनी और राजनीतिक, दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण हो गया है।

कानूनी मामलों की वेबसाइट लाइव लॉ के मुताबिक विजयन के साथ उनकी बेटी वीणा और पूर्व मंत्री पी.ए. मोहम्मद रियास ने भी राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

आरोप है कि वर्ष 2017 से 2020 के बीच कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) ने वीणा टी से जुड़ी कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस को करीब 1.72 करोड़ रुपये का भुगतान किया, जबकि इसके बदले वास्तविक सेवाएं नहीं दी गईं।

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच के दौरान इन भुगतानों से संबंधित जानकारी सामने आई। ईडी ने संभावित भ्रष्टाचार के मामले में कार्रवाई के लिए यह जानकारी केरल पुलिस को भेजी थी। आरोपों की जांच अभी जारी है और इन्हें अदालत में साबित किया जाना बाकी है।

केरल हाईकोर्ट ने 9 अक्टूबर को ईडी से मिली जानकारी के आधार पर सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को विजयन, उनकी बेटी वीणा, रियास और अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया था।

अदालत ने माना कि उपलब्ध सामग्री से संज्ञेय अपराध का संकेत मिलता है। ऐसे में प्राथमिकी दर्ज करने से पहले अलग से शुरुआती जांच करना जरूरी नहीं था। विजयन और अन्य ने इस आदेश को चुनौती दी, लेकिन 15 अक्टूबर को हाईकोर्ट की दो न्यायाधीशों वाली पीठ ने उनकी अपील पर विचार करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया।

विजयन ने सुप्रीम कोर्ट में क्या दलील दी?

विजयन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने तत्काल सुनवाई की मांग करते हुए गिरफ्तारी की आशंका जताई। उनका पक्ष था कि हाईकोर्ट ने संबंधित लोगों को सुने बिना एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। याचिका में हाईकोर्ट के आदेश की वैधता को भी चुनौती दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल सुनवाई की मांग स्वीकार नहीं की, लेकिन अवकाश के दौरान विशेष पीठ के समक्ष मामला रखे जाने की संभावना खुली रखी है।

मामले में आरोपों की जांच और न्यायिक प्रक्रिया अभी बाकी है।

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