CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग, 500 से ज्यादा हिरासत में

नई दिल्ली। गांधी जयंती के मौके पर शुक्रवार को दिल्ली का जंतर-मंतर प्रदर्शन का केंद्र बना रहा। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को रोकने की मांग को लेकर कई राजनीतिक दलों, छात्र और युवा संगठनों ने प्रदर्शन किया। पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर पहुंचते रहे। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 500 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया। इनमें AAP नेताओं के साथ छात्र और युवा संगठनों के कार्यकर्ता भी शामिल हैं।

CEC के इस्तीफे से लेकर SIR रोकने तक की मांग

प्रदर्शन का आह्वान AISA, SFI, DYFI, NSUI, IYC, AAP समेत कई संगठनों के साथ राज्यसभा सांसद मनोज झा और अधिवक्ता प्रशांत भूषण की ओर से किया गया था। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में CEC ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा या महाभियोग, SIR प्रक्रिया पर रोक और मतदाता सूची से कथित तौर पर हटाए गए मतदाताओं के अधिकार बहाल करना शामिल है।

प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग की जवाबदेही तय करने की भी मांग की। SIR को लेकर मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोपों के बीच यह प्रदर्शन आयोजित किया गया। हालांकि चुनाव आयोग की ओर से इन आरोपों को लेकर अलग-अलग प्रक्रियात्मक स्पष्टीकरण दिए गए हैं और आरोपों को तथ्य के रूप में नहीं माना जा सकता।

जंतर-मंतर के चारों तरफ बैरिकेड, भारी पुलिस बल तैनात

प्रदर्शन को देखते हुए जंतर-मंतर और आसपास के इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। दिल्ली पुलिस के साथ केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई। जगह-जगह बैरिकेड लगाए गए और प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका गया।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक जंतर-मंतर पर किसी भी प्रदर्शन या मार्च की अनुमति नहीं दी गई थी। नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू किए गए थे। पुलिस के अनुसार इसके तहत बिना अनुमति सभा, जुलूस, धरना, नारेबाजी, भाषण और प्रदर्शन जैसी गतिविधियों पर रोक थी।

सौरभ भारद्वाज समेत कई AAP नेता हिरासत में

AAP नेता सौरभ भारद्वाज प्रदर्शन में शामिल होने जंतर-मंतर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखने की अपील की। इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। AAP विधायक संजीव झा समेत पार्टी के अन्य नेताओं और कार्यकर्ताओं को भी पुलिस ने हटाया।

पुलिस कार्रवाई के दौरान प्रदर्शनकारियों को बसों में बैठाकर दूसरे इलाकों में ले जाने की खबर सामने आई। पुलिस के शुरुआती अनुमान में करीब 150 लोगों को हिरासत में लिए जाने की बात कही गई थी, बाद में यह संख्या 500 से अधिक बताई गई।

11 मेट्रो स्टेशनों के एंट्री-एग्जिट बंद

प्रदर्शन का असर दिल्ली की यातायात व्यवस्था पर भी दिखाई दिया। सुरक्षा कारणों से दिल्ली मेट्रो के 11 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास बंद कर दिए गए। इनमें राजीव चौक, केंद्रीय सचिवालय, पटेल चौक, जनपथ, मंडी हाउस, INA, नई दिल्ली और अन्य प्रमुख स्टेशन शामिल रहे। हालांकि कुछ स्टेशनों पर इंटरचेंज की सुविधा जारी रखी गई।

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने जंतर-मंतर, संसद मार्ग, कनॉट प्लेस और आसपास की सड़कों पर भी यातायात को लेकर एडवाइजरी जारी की। लोगों से इन रास्तों से बचने और वैकल्पिक मार्ग अपनाने की अपील की गई।

इंटरनेट बंद होने की भी खबर

जंतर-मंतर के आसपास मोबाइल इंटरनेट सेवा को लेकर भी प्रतिबंध की खबर सामने आई। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 1.5 किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद की गईं। यह कदम सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाए जाने की बात कही गई। वहीं इंटरनेट बंद करने के आदेश और उसके आधार को लेकर सवाल भी उठाए गए।

‘ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो’ के नारे

प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने ‘ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो’, ‘ज्ञानेश कुमार गो बैक’ और ‘SIR बंद करो’ जैसे नारे लगाए। कई प्रदर्शनकारी हाथों में पोस्टर और बैनर लेकर पहुंचे थे। कुछ पोस्टरों पर ‘Gyanesh Kumar Resign’ और ‘Arrest Gyanesh Kumar’ जैसे नारे लिखे थे।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि मतदाता सूची से जुड़े सवालों का जवाब मिलना चाहिए और चुनाव आयोग को इस पूरी प्रक्रिया पर जवाबदेह होना चाहिए।

पुलिस का कहना- अनुमति नहीं थी, कानून-व्यवस्था बनाए रखना जरूरी

दिल्ली पुलिस ने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी और किसी भी अनधिकृत धरने या प्रदर्शन की इजाजत नहीं थी। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक धारा 163 लागू करने का उद्देश्य सार्वजनिक व्यवस्था, सुरक्षा और यातायात को बनाए रखना था।

दूसरी ओर, प्रदर्शन में शामिल नेताओं का कहना है कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना लोकतांत्रिक अधिकार है। AAP के सौरभ भारद्वाज ने भी प्रदर्शनकारियों से पुलिस से नहीं डरने और संवैधानिक तरीके से आवाज उठाने की अपील की।

गांधी जयंती के दिन जंतर-मंतर पर हुए इस प्रदर्शन ने एक बार फिर सवाल खड़ा किया है कि शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रशासन की पाबंदियों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

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