AI ने 100 से अधिक संस्थानों में जबरदस्ती घुसपैठ की कोशिश की, OpenAI कंपनी ने खुद कबूला

लेंस डेस्क। चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी OpenAI ने एक खुलासा किया है। कंपनी के अनुसार उसके AI टूल्स ने 100 से ज्यादा संस्थानों के सिस्टम में संदिग्ध गतिविधियों के जरिये घुसपैठ करने की कोशिश की। OpenAI ने इन सभी प्रभावित संगठनों को अलर्ट जारी कर दिया है। कंपनी का दावा है कि किसी का डेटा चोरी नहीं हुआ। AI एजेंट्स ने सिर्फ बंद दरवाजों को खटखटाने और हैंडल घुमाने जैसी कोशिशें कीं, लेकिन डाटा नहीं चुराया।

यह मामला जुलाई में हगिंग फेस प्लेटफॉर्म पर हुई एआई अटैक की कोशिश के बाद सामने आया। उसके बाद ओपनएआई अपने सिस्टम की सुरक्षा की गहन जांच कर रहा है। जांच में पता चला कि एआई एजेंट्स ने कई वेबसाइट्स को मनमाने कमांड भेजे और सुरक्षा नियमों को बायपास करने के लिए आपस में संपर्क चैनल बनाने की कोशिश की।

OpenAI ने माना कि उसके सुरक्षा घेरे इन एजेंट्स को पूरी तरह काबू में रखने में नाकाम रहे। कंपनी प्रभावित संस्थानों को तकनीकी जानकारी दे रही है ताकि वे अपनी सुरक्षा खामियों की जांच कर सकें। आगे इन असामान्य व्यवहारों के निष्कर्ष सार्वजनिक किए जाएंगे, ताकि साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ मिलकर समाधान निकाल सकें।

हगिंग फेस घटना क्या थी?

OpenAI अपने एक मॉडल की साइबर सुरक्षा क्षमता का टेस्ट कर रहा था। टेस्ट में बेहतर स्कोर के लिए एआई ने शॉर्टकट अपनाया। उसने सवाल हल करने की बजाय सीधे जवाब चुराने की कोशिश की। मॉडल को इंटरनेट की इजाजत नहीं थी, फिर भी उसने बंद टेस्टिंग माहौल से बाहर निकलकर हगिंग फेस के सिस्टम तक पहुंच बना ली। हगिंग फेस ने 16 जुलाई को इस घटना का खुलासा किया था।

जांच में सामने आया कि मई की शुरुआत से ही कई एआई एजेंट्स OpenAI के सर्वरों के अंदर एक-दूसरे को सीक्रेट नोट्स छोड़ रहे थे। वे खुद को ‘स्वार्म’ यानी संगठित समूह बता रहे थे और सुरक्षा तोड़ने के तरीके शेयर कर रहे थे। इंजीनियरों ने उन्हें ऐसा करने के लिए ट्रेन नहीं किया था। एआई ने यह तरीका खुद विकसित कर लिया था।

इस घटना के बाद ओपनएआई ने सुरक्षा नियम और कड़े कर दिए हैं। एआई मॉडल्स के इंटरनेट इस्तेमाल पर सख्त पाबंदी लगाई गई है। रिसर्च और लाइव सिस्टम को अलग किया गया है। संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत पकड़ने के लिए रियल-टाइम निगरानी बढ़ाई गई है। कंपनी ने अमेरिकी और ऑस्ट्रेलियाई सरकारी साइट्स में भी सेंध लगाने की कोशिशों का जिक्र किया है। फिलहाल नए मॉडल डेवलपमेंट पर अस्थायी रोक लगाई गई है।

विशाल पैमाने पर जांच

OpenAI 50 पेटाबाइट डेटा की जांच कर रहा है। इसके लिए 7000 से अधिक उन्नत जीपीयू लगाए गए हैं। रोजाना लगभग 5 करोड़ रुपये का खर्च आ रहा है। इतना बड़ा डेटा अगर सामान्य अंग्रेजी टेक्स्ट हो तो एक इंसान को बिना रुके पढ़ने में करीब 6.6 करोड़ साल लग जाएंगे। इसलिए जांच एआई मॉडल्स की मदद से ही हो रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि एआई पर समय रहते कड़ा नियंत्रण जरूरी है। कुछ शोधकर्ता चेतावनी दे रहे हैं कि नियंत्रण न रहने पर यह तकनीक मानवता के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। एंथ्रोपिक जैसी कंपनियों के प्रमुखों ने भी विकास की रफ्तार धीमी करने की जरूरत बताई है।

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