रायपुर। आयुष्मान कार्ड के जरिए फर्जी इलाज की शिकायतों के बाद छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग ने बुधवार को राज्यभर के 100 से अधिक अस्पतालों में औचक छापेमारी की। रायपुर समेत कई जिलों के सरकारी और निजी अस्पतालों तथा नर्सिंग होम में जांच टीमें पहुंचीं। टीमों ने आयुष्मान योजना के तहत भर्ती मरीजों, इलाज के रिकॉर्ड और क्लेम दस्तावेजों की जांच शुरू की। विभाग यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि असल में इलाज हो रहा है या डमी मरीजों के नाम पर फर्जी दावे किए जा रहे हैं।
किन अस्पतालों में हुई कार्रवाई?
रायपुर में कई प्रमुख निजी अस्पतालों में छापे पड़े, जिनमें शामिल हैं:
श्री महावीर अस्पताल (मोवा)
वरदान हॉस्पिटल (शंकर नगर)
रावतपुरा हॉस्पिटल
श्री अनंत साईं हॉस्पिटल
मेड लाइफ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल
लोटस हॉस्पिटल एंडवांस यूरोलॉजी सेंटर
जांच में गड़बड़ी सामने आने पर मेड लाइफ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल और लोटस हॉस्पिटल का लाइसेंस नर्सिंग होम एक्ट के तहत निरस्त कर दिया गया है।
स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी डायरेक्टर इंद्रजीत बर्मन ने बताया कि जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई। फर्जी मरीज भर्ती कराना और कमीशनखोरी के मामले सामने आए हैं।
बीजू स्वास्थ्य योजना में भी जांच
आयुष्मान कार्ड के साथ-साथ ओडिशा सरकार की बीजू स्वास्थ्य कल्याण योजना में भी फर्जीवाड़े की शिकायतें मिली हैं। छत्तीसगढ़ के कुछ अस्पतालों में इस योजना के तहत भी इलाज होता है। विभाग अब दोनों योजनाओं के रिकॉर्ड और दावों की विस्तृत जांच कर रहा है।
आयुष्मान कार्ड क्या है?
आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना केंद्र सरकार की योजना है। इसके तहत पात्र परिवारों को रजिस्टर्ड अस्पतालों में कैशलेस इलाज की सुविधा मिलती है। छत्तीसगढ़ में पहले की मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना को भी इससे जोड़ दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग की जांच जारी है। गड़बड़ी पकड़े जाने पर और अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है।










