चेन्नई। तमिलनाडु की टीवीके (TVK) सरकार ने सूचना का अधिकार (RTI) कानून को लेकर एक बड़ा और महत्वपूर्ण फैसला लिया है। राज्य सरकार ने लोक (कानून एवं व्यवस्था) विभाग को RTI अधिनियम के दायरे से पूरी तरह बाहर (मुक्त) कर दिया है। सरकार द्वारा जारी गजट अधिसूचना के अनुसार, इस विभाग को अब ‘गुप्तचर एवं सुरक्षा संगठन’ (Intelligence and Security Organisation) की श्रेणी में शामिल कर दिया गया है।
RTI अधिनियम की धारा 24(4) के तहत जारी हुआ आदेश सरकार के मानव संसाधन प्रबंधन विभाग द्वारा जारी आधिकारिक आदेश (G.O. Ms. No. 57) और असाधारण गजट अधिसूचना के अनुसार, यह कदम सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 24(4) के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए उठाया गया है। इस धारा के तहत राज्य सरकारों को सुरक्षा व खुफिया एजेंसियों को RTI से छूट देने का अधिकार प्राप्त है।
अब आम जनता की पहुंच से बाहर होंगी ये संवेदनशील जानकारियां
इस नए आदेश के लागू होने के बाद अब राज्य में कानून एवं व्यवस्था से जुड़ी कई संवेदनशील जानकारियां RTI अर्जी के माध्यम से प्राप्त नहीं की जा सकेंगी। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- सांप्रदायिक व जातीय हिंसा या झड़पों से जुड़ी रिपोर्ट।
- पुलिस हिरासत में हुई मौतों (Custodial Deaths) और पुलिस प्रताड़ना की जांच रिपोर्ट।
- राजनीतिक, छात्र व किसान आंदोलनों और प्रदर्शनों की आधिकारिक जानकारी।
- राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) व कोफेपोसा (COFEPOSA) के तहत की गई निरुद्धि (Detention) के मामले।
- कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में गठित जांच आयोगों की सिफारिशें व पुलिस गोलीबारी की जांच रिपोर्ट।
पारदर्शिता को लेकर छिड़ी नई बहस
राज्य सरकार के इस कदम के बाद प्रशासनिक व राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। जहां एक ओर इसे सुरक्षा व गोपनीयता बनाए रखने के लिहाज से अहम माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों द्वारा सार्वजनिक जवाबदेही व पारदर्शिता पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।









