तिमाही परीक्षा के पर्चों में फिर बड़ी गड़बड़ी: अब 10वीं के गणित के प्रश्न पत्र में 32 अंकों के सवाल गलत, 6वीं हिंदी में सवाल रिपीट

रायपुर। छत्तीसगढ़ में चल रही तिमाही परीक्षाओं (quarterly exam)के प्रश्नपत्रों को लेकर लगातार गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं। पहले कक्षा 6वीं के हिंदी प्रश्नपत्र में एक ही सवाल तीन बार दोहराए जाने का मामला सामने आया था। अब कक्षा 10वीं के गणित प्रश्नपत्र में कथित तौर पर 32 अंकों के सवालों में गड़बड़ी और कई अन्य प्रश्नपत्रों में चित्र व सही विकल्प गायब होने की जानकारी सामने आई है।

सबसे पहले कक्षा 6वीं के हिंदी प्रश्नपत्र की बात करें तो रायपुर जिले में विद्यार्थियों को दिए गए पेपर में प्रश्न क्रमांक 9, 16 और 19 में एक ही सवाल दोहराया गया था— ‘मेजर ध्यानचंद की सफलता का क्या रहस्य था?’ यानी एक ही सवाल तीन अलग-अलग प्रश्न क्रमांकों में पूछ दिया गया। इस मामले को लेकर अभिभावकों और शिक्षाविदों ने प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे।

इसी मामले को द लेंस ने भी प्रमुखता से उठाया था। लेकिन अब सामने आ रही नई जानकारी से लगता है कि मामला केवल एक प्रश्नपत्र तक सीमित नहीं है। कक्षा 10वीं के गणित के पेपर में 32 अंकों के प्रश्नों को लेकर गंभीर आपत्तियां सामने आई हैं। इसके अलावा कई प्रश्नपत्रों में प्रश्नों के साथ दिए जाने वाले चित्र गायब हैं, जबकि कुछ सवालों में सही विकल्प उपलब्ध नहीं होने की बात भी सामने आई है।

सवाल यह कि आखिर पेपर तैयार कौन करता है?

जानकारी के मुताबिक, जिलेवार तिमाही परीक्षा के प्रश्नपत्र DEO कार्यालय स्तर से तैयार/व्यवस्थित किए जाते हैं। ऐसे में प्रश्नपत्रों में बार-बार सामने आ रही त्रुटियों ने पेपर तैयार करने से लेकर उसके रीव्यू, प्रूफरीडिंग और अंतिम स्वीकृति तक की पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पहले छठवीं के हिंदी पेपर में एक सवाल तीन बार रिपीट हुआ। अब 10वीं गणित के पेपर में बड़ी संख्या में अंकों से जुड़े सवालों में गड़बड़ी और दूसरे पेपरों में चित्र तथा विकल्प गायब होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

विद्यार्थियों पर पड़ रहा असर

प्रश्नपत्र में गलती का सीधा असर परीक्षा दे रहे विद्यार्थियों पर पड़ता है। छात्र अगर गलत प्रश्न, अधूरा चित्र या विकल्पों के बिना सवाल देखकर असमंजस में पड़ता है, तो इसका असर उसके परीक्षा प्रदर्शन पर हो सकता है।

वहीं, शिक्षकों के सामने भी ऐसी स्थिति में यह समस्या रहती है कि विद्यार्थियों को किस प्रश्न का उत्तर किस आधार पर लिखने के लिए कहा जाए और बाद में मूल्यांकन किस तरीके से किया जाए।

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