टाटा पावर के बिजली वितरण लाइसेंस पर जनसुनवाई टली, आपत्तियां दर्ज कराने की तारीख भी बढ़ी

रायपुर। टाटा पावर (Tata Power) की ओर से रायपुर जिले के चार तहसील क्षेत्रों में बिजली वितरण लाइसेंस हासिल करने के मामले में बड़ी अपडेट सामने आई है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) ने 1 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित जनसुनवाई स्थगित कर दी है।

आयोग ने याचिकाकर्ता और अन्य हितधारकों के अनुरोध पर आपत्तियां, टिप्पणियां और सुझाव जमा करने की अंतिम तारीख बढ़ाकर 6 नवंबर 2026 कर दी है। वहीं, टाटा पावर को इन आपत्तियों और सुझावों पर अपना जवाब देने के लिए 6 दिसंबर 2026 तक का समय दिया गया है।

द लेंस ने लगातार उठाया था मुद्दा

इस पूरे मामले पर द लेंस ने लगातार खबरें प्रकाशित कर सवाल उठाया था कि अगर टाटा पावर को रायपुर में बिजली वितरण का लाइसेंस मिलता है, तो इसका सीधा असर आम बिजली उपभोक्ताओं पर क्या पड़ेगा।

द लेंस की रिपोर्टों में यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया था कि निजी कंपनी के बिजली वितरण क्षेत्र में आने के बाद टैरिफ, बिजली बिल और उपभोक्ताओं के कुल खर्च पर क्या संभावित प्रभाव पड़ सकता है। यानी मामला सिर्फ बिजली वितरण में एक नई कंपनी के प्रवेश का नहीं, बल्कि आम लोगों की जेब से भी जुड़ा हुआ है।

क्या है टाटा पावर का प्रस्ताव?

टाटा पावर ने विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 14 और 15 के तहत रायपुर जिले के रायपुर, धरसींवा, मंदिर हसौद और अभनपुर तहसील क्षेत्र में वितरण लाइसेंस मांगा है। कंपनी का प्रस्ताव मौजूदा वितरण व्यवस्था के समानांतर लाइसेंस से जुड़ा है। इन क्षेत्रों में फिलहाल बिजली वितरण का काम CSPDCL कर रही है।

CSERC के रिकॉर्ड के मुताबिक टाटा पावर की यह याचिका 16 जुलाई 2026 को दर्ज हुई थी।

धारा 14 के तहत क्या होता है लाइसेंस का प्रावधान?

विद्युत अधिनियम की धारा 14 के तहत संबंधित विद्युत नियामक आयोग किसी व्यक्ति या कंपनी को निर्धारित क्षेत्र में ट्रांसमिशन, बिजली वितरण या बिजली ट्रेडिंग के लिए लाइसेंस दे सकता है। इसके लिए आवेदन धारा 15 में निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जाता है।

वहीं, धारा 14 के प्रावधानों के तहत एक ही क्षेत्र में एक से अधिक वितरण लाइसेंस की गुंजाइश है। ऐसे मामले में नए आवेदक को केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित अतिरिक्त शर्तों, जैसे कैपिटल एडिक्वेसी, क्रेडिटवर्थिनेस और कोड ऑफ कंडक्ट, का पालन करना होता है। केवल इस आधार पर लाइसेंस से इनकार नहीं किया जा सकता कि उसी क्षेत्र में पहले से कोई वितरण लाइसेंसी मौजूद है।

लाइसेंस मिलने से पहले क्या प्रक्रिया होती है?

धारा 15 के तहत आवेदन के बाद सार्वजनिक सूचना जारी की जाती है और संबंधित पक्षों से आपत्तियां और सुझाव मांगे जाते हैं। आयोग को इन आपत्तियों पर विचार करना होता है। लाइसेंस जारी करने से पहले आयोग सुझावों और आपत्तियों पर विचार करता है तथा निर्धारित कानूनी और नियामकीय शर्तों की जांच करता है।

यानी आपत्तियां जमा करने की तारीख बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि टाटा पावर को लाइसेंस मिल गया है। फिलहाल मामला नियामक आयोग के समक्ष विचाराधीन है।

अब इस मामले में नई जनसुनवाई की तारीख अलग से अधिसूचित की जाएगी। CSERC की वेबसाइट पर टाटा पावर की याचिका के लिए पहले 1 अक्टूबर की सुनवाई दर्ज थी।

दानिश अनवर

दानिश अनवर, द लेंस में जर्नलिस्‍ट के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों का अनुभव है। द लेंस से पहले दैनिक भास्‍कर में इन्‍वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग टीम में सीनियर रिपोर्टर, नवभारत में क्राइम रिपोर्टर, नईदुनिया में स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट और पत्रिका अखबार में रिपोर्टर के तौर पर 13 साल काम किया। इन सभी अखबारों में दानिश अनवर ने विभिन्न विषयों जैसे- क्राइम, पॉलिटिकल, एजुकेशन, स्‍पोर्ट्स, कल्‍चरल और स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन स्‍टोरीज कवर की हैं। दानिश को प्रिंट का अच्‍छा अनुभव है। वह सेंट्रल इंडिया के कई शहरों में काम कर चुके हैं।

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