रायपुर। छत्तीसगढ़ जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) के आह्वान पर प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों और जिला अस्पतालों में इंटर्न, रेजिडेंट, पीजी बॉन्डेड और एमबीबीएस बॉन्डेड डॉक्टरों का आंदोलन गुरुवार को भी जारी रहा। आज आंदोलन का सातवां दिन है।
मेडिकल कॉलेज रायपुर में डॉक्टरों ने OPD सेवाओं का बहिष्कार किया। लेकिन मरीजों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए उन्होंने धरना स्थल पर ही पैरलल OPD की व्यवस्था की। वहां मरीजों की जांच, परामर्श और जरूरी इलाज जारी रखा गया।
JDA ने साफ कहा कि यह आंदोलन मरीजों के खिलाफ नहीं है। मरीज उनकी जिम्मेदारी हैं और उनकी सेवा हमेशा प्राथमिकता रहेगी।
सात दिन पूरे, लिखित आदेश का इंतजार
आंदोलन के दौरान स्वास्थ्य मंत्री से चर्चा भी हुई। मंत्री के कहने पर JDA ने अपनी मांगों का पूरा प्रस्ताव लिखित रूप में सौंप दिया। इसके बावजूद सात दिन बीत जाने के बाद भी शासन की ओर से कोई स्पष्ट लिखित आदेश नहीं मिला है।
डॉक्टरों का कहना है कि बातचीत और आश्वासन का सम्मान है, लेकिन अब समाधान लिखित आदेश के रूप में चाहिए।
डॉक्टरों की तीन मुख्य मांगें
- सुपर स्पेशलिटी कैडर की स्थापना
छत्तीसगढ़ में लीवर ट्रांसप्लांट, किडनी ट्रांसप्लांट, गंभीर कैंसर जैसी जटिल बीमारियों का इलाज अभी राज्य में पर्याप्त नहीं है। मरीजों को दूसरे राज्यों में जाना पड़ता है। डॉक्टर चाहते हैं कि प्रदेश में मजबूत सुपर स्पेशलिटी कैडर बने, ताकि गंभीर मरीजों का इलाज यहीं हो सके और गरीब परिवारों का आर्थिक बोझ कम हो। - कठोर बॉन्ड व्यवस्था में सुधार
वर्तमान में एमबीबीएस डॉक्टरों पर लगभग चार साल का सेवा बंधन और करीब 75 लाख रुपये तक की बॉन्ड राशि का दबाव है। JDA मांग कर रहा है कि बॉन्ड की अवधि, राशि और शर्तों की समीक्षा कर इसे न्यायसंगत और मानवीय बनाया जाए। डॉक्टरों को डर और दबाव से नहीं, सम्मान से प्रदेश में रखने की जरूरत है।
- 24×7 सेवा देने वाले डॉक्टरों को उचित वेतन
इंटर्न, रेजिडेंट और बॉन्डेड डॉक्टर दिन-रात इमरजेंसी, आईसीयू, ओटी और वार्ड में काम करते हैं। लेकिन उनका वेतन दूसरे राज्यों की तुलना में काफी कम है। डॉक्टर मांग रहे हैं कि जिम्मेदारी और काम के हिसाब से सम्मानजनक वेतन मिले।
मरीजों की सेवा जारी, संघर्ष भी
JDA का कहना है कि आंदोलन के बावजूद उन्होंने मरीजों की सेवा नहीं छोड़ी। धरना स्थल पर समानांतर OPD इसी का प्रमाण है। उनका उद्देश्य स्वास्थ्य सेवाओं को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि मरीजों और डॉक्टरों दोनों के लिए बेहतर व्यवस्था बनाना है। संगठन ने सरकार से फिर आग्रह किया है कि मांगों पर जल्द स्पष्ट, ठोस और लिखित निर्णय लिया जाए। जब तक लिखित समाधान नहीं मिलता, आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा।









