दुर्ग। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग (Women’s Commission)की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू की अध्यक्षता में बुधवार को दुर्ग में जनसुनवाई आयोजित की गई। प्रभारी सुशीला टोपो और सहायक संचालक पुष्पा कुजुर भी मौजूद रहीं। यह प्रदेश स्तर पर आठवीं और दुर्ग की दूसरी जनसुनवाई थी।
जनसुनवाई प्रेरणा सभा कक्ष, बालगृह परिसर स्थित महिला एवं बाल विकास कार्यालय में हुई। कुल 33 प्रकरणों में से 25 की सुनवाई पूरी हुई, जिसमें से 7 प्रकरण निपटारे के बाद बंद कर दिए गए।
एक महिला ने शिकायत की कि अनावेदक उसकी जमीन की रजिस्ट्री नहीं करा रहा है। अनावेदक ने बताया कि गांव में रजिस्ट्री फिलहाल बंद है और तीन महीने बाद खुलेगी। आयोग ने निर्देश दिया कि चार महीने के अंदर रजिस्ट्री करानी होगी, नहीं तो उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी।
एक आवेदिका ने बताया कि पिछले दो महीने से पति न तो खर्च दे रहा है और न ही बेटी की ट्यूशन व स्कूल फीस भर रहा है। पति एनटीपीसी दिल्ली में काम करता है। आयोग ने एनटीपीसी दिल्ली को पत्र लिखकर पूरी जानकारी देने का निर्देश दिया।
एक महिला ने बताया कि पति ने दूसरा विवाह कर लिया है और एक संतान भी है। वह पति के घर में ही रह रही है, लेकिन गाली-गलौज का सामना करना पड़ता है। आयोग ने संरक्षण अधिकारी को निर्देश दिया कि घरेलू हिंसा का प्रकरण दर्ज कर रिपोर्ट अदालत में पेश करें।
एक मामले में बहु द्वारा सास के खिलाफ मानसिक प्रताड़ना की शिकायत की गई थी। दोनों पक्षों में समझौता होने पर प्रकरण बंद कर दिया गया। एक मामले में अनावेदक हर महीने 2500 रुपये गुजारा भत्ता देने को तैयार हो गया। राशि आवेदिका के खाते में यूपीआई के जरिए जमा की जाएगी।
मेडिकल छात्राओं का मामला
एमबीबीएस की छात्राओं ने डॉक्टर के खिलाफ शिकायत की थी, लेकिन बाद में उन्होंने आवेदन देकर कहा कि अब कोई कार्रवाई नहीं चाहते। इसके बाद प्रकरण बंद कर दिया गया। एक आवेदिका ने दावा किया कि अनावेदकों को 1 करोड़ 80 लाख रुपये का मुआवजा मिला है और वह अविवाहित होने के नाते अपना हिस्सा चाहती है। मामला निपटारे के लिए सीएसपी दुर्ग को भेजा गया है। अन्य प्रकरणों में भी सुनवाई की गई और जरूरी निर्देश जारी किए गए। महिला आयोग ने कहा कि महिलाओं से जुड़े मामलों में तेजी से कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।






