नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि कोई भी निजी विश्वविद्यालय मुनाफा कमाने वाली संस्था की तरह नहीं चलाया जा सकता। कोर्ट ने देशभर के निजी विश्वविद्यालयों से पांच साल के ऑडिटेड वित्तीय रिकॉर्ड और कई अन्य जानकारियां मांगी हैं।
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि निजी विश्वविद्यालय को लाभ कमाने वाली संस्था के रूप में चलने की अनुमति नहीं दी जाएगी। संस्थान को कुछ हद तक वित्तीय कुशन रख सकते हैं, ताकि काम सुचारू चले और शिक्षण व गैर-शिक्षण कर्मचारियों को उचित वेतन मिले। लेकिन संसाधनों का इस्तेमाल शिक्षा से जुड़े कामों के अलावा नहीं होना चाहिए।
यह मामला मूल रूप से नोएडा स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी के खिलाफ एक छात्रा की शिकायत से शुरू हुआ था। बाद में कोर्ट ने जनहित में इसे पूरे देश के निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना, नियमन और उन्हें मिलने वाले लाभों की जांच तक बढ़ा दिया।कोर्ट ने केंद्र सरकार, सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे संबंधित विश्वविद्यालयों और कॉलेजों से जानकारी लेकर मुख्य सचिवों के जरिए छह सप्ताह में हलफनामा दाखिल करें। यह समय 17 सितंबर 2026 के आदेश से गिना जाएगा।
कोर्ट ने ये विवरण मांगे हैं:
- केंद्र और राज्य सरकारों से मिली जमीन, कानूनों में छूट या कोई विशेष सुविधा।
- हर कोर्स में दाखिला प्रक्रिया, दाखिला संभालने वाले लोग, पेपर सेट करने, परीक्षा कराने, उत्तर पुस्तिकाएं जांचने और फंड संभालने वाले व्यक्ति, तथा प्रबंधन की भूमिका।
- दाखिले के समय और कोर्स के दौरान ली गई फीस, डेवलपमेंट फंड या किसी खास कार्यक्रम के नाम पर ली गई रकम, अधिशेष राशि का उपयोग और उसमें से किए गए निवेश।
- शिक्षण और गैर-शिक्षण स्टाफ की भर्ती का तरीका, वेतन और भत्ते, सेवा शर्तें, कक्षाएं कौन आवंटित करता है, जनवरी 2025 से शिक्षकों को कितनी कक्षाएं दी गईं और कितनी ली गईं, न ली गईं तो क्या वैकल्पिक व्यवस्था की गई।
- शिकायत निवारण तंत्र की संरचना, पिछले तीन साल में आई शिकायतें, उनका निपटारा और समयसीमा।
- कॉलेज से जुड़े अस्पतालों का विवरण और उनके साथ संबंध।
- मान्यता/संबद्धता देने वाले निकायों (एनएमसी, डेंटल काउंसिल, बार काउंसिल, नर्सिंग काउंसिल आदि) द्वारा पिछले पांच साल में की गई निरीक्षण रिपोर्ट, फैकल्टी और सहायक स्टाफ का विवरण। ये हलफनामे संबंधित निकाय के अध्यक्ष/प्रेसिडेंट खुद सत्यापित करें।
ये सभी जानकारियां विश्वविद्यालयों से लेकर केंद्र/राज्य सरकारें छह सप्ताह में दाखिल करेंगी। मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर 2026 को होगी।







