‘कुर्सी नहीं चाहिए, हम भी देहात के हैं’… आलोचनाओं के बीच बाढ़ पीड़ितों की मदद को आगे आए खान सर

Khan Sir

जून 2026 में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब एक पत्रकार ने मशहूर शिक्षक और यूट्यूबर को ‘खान सर’ (Khan Sir) कहकर संबोधित किया, तो बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने बीच में हस्तक्षेप करते हुए पूछा, ‘क्या आप उनके शिष्य हैं? अगर नहीं, तो उन्हें ‘खान सर’ क्यों कह रहे हैं?’

मामला उस वक्त का हैं, जब पटना के कोचिंग हब मुसल्लहपुर में दो चर्चित कोचिंग संस्थानों खान ग्लोबल स्टडीज के मालिक खान सर और ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी के शिक्षक रोशन आनंद के बीच विवाद सामने आया। इस दौरान खान सर को लेकर अलग-अलग नामों से चर्चा होने लगी। कोई उन्हें ‘खान जी’ कह रहा था, तो कोई उनके नाम फैजल खान का जिक्र कर रहा था।

हालांकि अब इस कहानी का दूसरा पहलू पूरा बिहार देख रहा है। बिहार में आई भीषण बाढ़ के बीच खान सर प्रभावित लोगों की मदद के लिए आगे आए हैं। उन्होंने बाढ़ पीड़ितों के लिए बड़े स्तर पर राहत अभियान शुरू किया है और जरूरतमंदों तक हर संभव मदद पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं।

बिहार में लगातार हो रही बारिश और नेपाल से आ रहे पानी के कारण बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य के 15 जिलों में बाढ़ से करीब 50 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। कई इलाकों में गंगा, गंडक, कोसी और अन्य नदियों का जलस्तर खतरे के निशान के आसपास है या उससे ऊपर बना हुआ है।

ऐसे मुश्किल समय में पटना के चर्चित शिक्षक खान सर भी बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए आगे आए हैं। खान सर की आलोचना अक्सर चर्चा में रहती है, लेकिन उनकी मदद और दरियादिली पर कम ही बात होती है।

बिहार में बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए उन्होंने राहत सामग्री जुटाकर जरूरतमंदों की ओर मदद का हाथ बढ़ाया है। मुश्किल समय में लोगों के साथ खड़े होकर उनकी मदद करने की यह पहल इंसानियत और संवेदनशीलता की मिसाल पेश करती है।

कुर्सी नहीं चाहिए, हम भी देहात के हैं

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, खान सर का एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है। जिसमें  वह करीब 100 गाड़ियों के काफिले के साथ राहत सामग्री लेकर प्रभावित इलाकों की ओर निकले। इन गाड़ियों में खाने-पीने के सामान के साथ रोजमर्रा की जरूरत की सामग्री भी मौजूद थी। राहत सामग्री रवाना करने से पहले खान सर खुद सड़क पर उतरे और पूरी व्यवस्था का जायजा लिया। 

सामान की गुणवत्ता और उपलब्धता देखने के लिए वह गाड़ी के ऊपर भी चढ़े और एक-एक चीज को बारीकी से देखा। व्यवस्था से संतुष्ट होने के बाद ही राहत सामग्री से लदी गाड़ियों को जरूरतमंद परिवारों के लिए रवाना किया गया।

बाढ़ प्रभावित इलाकों में पहुंचकर खान सर ने लोगों से मुलाकात की और राहत एवं मदद के प्रयासों में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि ‘कुर्सी नहीं चाहिए, हम भी देहात के हैं।’

कुछ दिनों पहले सोशल मीडिया पर खान सर का एक वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो में खान सर ने कहा कि, ‘बिहार में बाढ़ का पानी एक बार किसी इलाके में घुस जाए तो उसे निकलने में काफी समय लग जाता है। नेपाल में कुछ समय पहले पानी ने भारी तबाही मचाई थी, नेपाल में अचानक पानी के तेज बहाव और उसके बाद डिस्चार्ज वाटर कम होने से पानी तेजी से निकल गया। वहीं, बिहार में बाढ़ का पानी कई इलाकों में जमा हो जाता है और लंबे समय तक बना रहता है।’

क्या खान सर के बारे में राय बदल रही है? 

विद्यार्थी संघ से जुड़े अमित चौधरी पटना विश्वविद्यालय से पीजी कर रहे हैं। वह बताते हैं कि, ‘जिस वक्त खान सर के प्रति नफरत फैलाया जा रहा था, उस वक्त भी छात्र पूरी सच्चाई जानते थे। ‌हां कुछ छात्र.. व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी की जानकारी लेने लगे थे। वैसे अंजना ओम कश्यप को इसपर भी एक न्यूज डिबेट करवाना चाहिए कि खान सर बिहार बाढ़ राहत मिशन चला रहें है, बिना धर्म देखे जरूरतमंदो को मदद पहुंचा रहें हैं!’

भागलपुर के रहने वाले संतोष कुमार के गांव खरीक प्रखंड अंतर्गत राघोपुर पंचायत  में भी बाढ़ आया है। संतोष बताते हैं कि, ‘खान सर बनना सबके बस की बात नहीं हैं। राहत शिविर की स्थिति बहुत बदतर है। अगर खान सर और अलख पांडे सर जैसे लोग नहीं आएंगे तो बाढ़ पीड़ित की स्थिति आप नहीं समझ सकते हैं। सरकारी योजना सिर्फ कहने के लिए काम करती है।’

सुपौल के रहने वाले बिपुल पटना में पढ़ाई करते हैं। वह बताते हैं कि, ‘एक तरफ बिहार बाढ़ से परेशान है वहीं दूसरी तरफ़ मोदी जी के जन्मदिन के लिए तमाशा किया गया है। बिहार की बाढ़ के लिए जिस डबल इंजन की सरकार को काम करना था उसके लिए खान सर जैसे लोग राहत सामग्री लेकर मदद के लिए पहुंच रहे हैं और डबल इंजन वाले विश्वगुरु के जन्मदिन की तैयारी में लगे है।’

मैथिली भाषा के लेखक और रिटायर्ड अधिकारी अरुण कुमार झा बताते हैं कि, ‘सोशल मीडिया के इस दौर में राहत सामग्री बांटकर कई लोग वीडियो बनाकर जारी कर रहे हैं। अच्छी बात है… गरीब लोगों तक मदद पहुंच रही है। लेकिन यह काम सरकार का है। बिहार के बाढ़ पीड़ित दया के पात्र नहीं हैं। वे उस आपदा के शिकार हैं, जिसके जन्मदाता वे नहीं हैं। नेपाल की तरह बिहार को भी कहना चाहिए कि अगर हमें कुछ चाहिए तो क्लाइमेट जस्टिस चाहिए, खैरात नहीं।’

नफरत के इस दौर में मोहब्बत

मुसलमानों के प्रति बढ़ती नफरत की चर्चाओं के बीच बिहार भी इससे अछूता नहीं है। ऐसे माहौल में खान सर के अलावा कई लोग बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए आगे आए हैं। महाराष्ट्र के हुसैन मंसूरी और मुस्लिम संस्था इमारत-ए-शरिया ने भी बाढ़ प्रभावित गांवों में पहुंचकर राहत सामग्री बांटी और जरूरतमंद लोगों तक मदद पहुंचाई। 

बाढ़ की मुश्किल घड़ी में इन लोगों ने जाति और धर्म से ऊपर उठकर पीड़ितों का साथ दिया। मुस्लिम समुदाय से आने वाले इन लोगों की पहल ने नफरत के माहौल के बीच इंसानियत, भाईचारे और मोहब्बत का संदेश दिया है।

उत्तर प्रदेश के देवरिया में बशीर खान के घर जन्मे खान सर बाद में अपने परिवार के साथ पटना आकर बस गए। उनका असली नाम फैजल खान बताया जाता है। बचपन से ही उनका सपना भारतीय सेना में शामिल होने का था। उनके बड़े भाई भी कमांडो हैं। खान सर के मुताबिक, छात्र जीवन में ही परिवार की आर्थिक मदद के लिए उन्होंने वेल्डिंग का काम किया और जेसीबी भी चलाई। 

वर्ष 2010 से कोचिंग पढ़ाने वाले खान सर 2019 में यूट्यूब पर आए और कोरोना लॉकडाउन के दौरान इंटरनेट पर उनकी पहचान तेजी से बढ़ी। आज खान सर किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। शिक्षक के रूप में पहचान बनाने के साथ-साथ उन्होंने समाज में भी अपनी एक अलग पहचान बनाई है।

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