लेंस न्यूज़। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में संक्रामक बीमारियों से 30 से अधिक आदिवासी बच्चों की दुखद मौत के बाद राज्य का राजनीतिक और सामाजिक माहौल गरमा गया है। इस संवेदनशील मुद्दे के बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके का एक सोशल मीडिया पोस्ट तेज़ी से वायरल हो रहा है। दीपके ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं और सरकार के रवैये पर कड़ा तंज कसते हुए, खुद को राज्य का ‘मुख्यमंत्री’ बताकर सोशल मीडिया (X) पर एक प्रतीकात्मक और व्यंग्यात्मक (Sarcastic) इस्तीफा पत्र साझा किया है।
क्या है वायरल पत्र का मामला?
अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर मध्य प्रदेश के राज्यपाल को संबोधित करते हुए एक पत्र पोस्ट किया। इस पत्र में उन्होंने खुद को प्रदेश का मुख्यमंत्री बताते हुए लिखा, ‘मैं तत्काल प्रभाव से मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देता हूं। मैं प्रधानमंत्री जी का शुक्रिया अदा करता हूं कि उन्होंने मुझे प्रदेश की जनता की सेवा का मौका दिया, जिसमें मैं स्पष्ट रूप से विफल रहा हूं।’
उन्होंने पत्र में आगे लिखा कि बालाघाट में 30 से ज्यादा मासूम आदिवासी बच्चों की जान जाने के बाद उनका ज़मीर उन्हें इस पद पर बने रहने की इजाजत नहीं देता। उन्होंने समय पर बेहतर चिकित्सा सुविधाएं न मिल पाने, पेयजल की किल्लत और प्रशासनिक उदासीनता को लेकर राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए।

जमीनी दौरे के दौरान इंफ्लुएंसर्स से बहस
सांकेतिक इस्तीफे से ठीक एक दिन पहले, शनिवार को अभिजीत दीपके बालाघाट जिले के अति-प्रभावित आदिवासी गांवों अदोरी, कोरका और बोंदारी के दौरे पर पहुंचे थे। वह पीड़ित परिवारों से मिलकर जमीनी हालात और स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा ले रहे थे। जब दीपके दौरा पूरा कर अपनी गाड़ी से लौट रहे थे, तब कुछ लोगों के समूह (जिनमें से कुछ सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स बताए जा रहे हैं) ने उनकी कार को घेर लिया।
वायरल वीडियो के मुताबिक, एक महिला माइक लेकर उनकी गाड़ी के पास पहुंची और सवाल दागने लगी कि क्या वह ‘लाशों पर राजनीति करने आए हैं और क्षेत्र में इतनी देर से क्यों पहुंचे। दीपके ने देरी के लिए विनम्रतापूर्वक माफी मांगी, लेकिन माहौल में तल्खी बढ़ती देख CJP कार्यकर्ताओं ने उन्हें दूसरी गाड़ी में बैठाकर सुरक्षित स्थान के लिए रवाना किया, स्थानीय पत्रकारों ने दूरदराज के आदिवासी इलाकों में अचानक पहुंचे इन बाहरी इंफ्लुएंसर्स की भूमिका और मंशा पर भी सवाल उठाए हैं।
हाईकोर्ट का सख्त रुख: 50 बेड के अस्पताल में 400 बच्चों का इलाज
बालाघाट में बच्चों की मौत का यह मामला अब न्यायपालिका के समक्ष भी है। मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
याचिका में उठाए गए प्रमुख बिंदु –
- अस्पताल में जगह की कमी: याचिकाकर्ता का दावा है कि जिस अस्पताल की क्षमता महज 50 बिस्तरों (Beds) की है, वहां 400 से ज्यादा बीमार बच्चों का इलाज चल रहा था।
- दूषित वातावरण और गंदगी: प्रभावित इलाकों में साफ-सफाई की भारी कमी और दूषित पेयजल आपूर्ति को संक्रमण फैलने की मुख्य वजह बताया गया है।
- प्रशासनिक जवाबदेही: उच्च न्यायालय ने स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और बालाघाट कलेक्टर से इस गंभीर लापरवाही पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।
बालाघाट में मासूमों की जान जाने का यह मामला केवल एक प्रशासनिक नाकामी नहीं, बल्कि राज्य के सुदूर इलाकों में स्वास्थ्य व्यवस्था की जमीनी हकीकत को उजागर करता है। जहां एक ओर अदालत इस मामले में कड़े कदम उठा रही है, वहीं विपक्ष और सामाजिक कार्यकर्ता अनोखे तरीकों से सरकार को घेरने में जुटे हैं।











