रायपुर | 5 से 7 जून 2026 तक छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में एक साहित्यिक कार्यक्रम ‘काव्य कुंभ-2’आयोजित हुआ था। नामचीन कवियों, शायरों, लोक गायकों और कलाकारों की उपस्थिति ने इसे आकर्षण का केंद्र बनाया लेकिन आयोजन समाप्त होने के महीनों बाद भी यह कार्यक्रम विवादों में बना हुआ है। बकाया पारिश्रमिक, पुरस्कार राशि न मिलने और कलाकारों के सम्मान की अनदेखी के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं।
कार्यक्रम में शामिल प्रमुख कलाकार
काव्य कुंभ-2 में देश के जाने-माने नाम शामिल थे। इनमें उर्दू शायर वसीम बरेलवी, कवि-लेखक आलोक श्रीवास्तव, अभिनेता पंकज झा, लोक गायक मामे खान और राहगीर जैसे कलाकार प्रमुख थे। आयोजकों ने बड़े-बड़े नामों के बल पर कार्यक्रम को भव्य बनाने का दावा किया था।

आलोक श्रीवास्तव की टीम ने सोशल मीडिया में किया पोस्ट
प्रख्यात कवि-लेखक आलोक श्रीवास्तव की टीम ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर आयोजकों पर आरोप लगाए। उन्होंने लिखा – “किसी से ऐसा कोई वादा मत कीजिए जो आप पूरा न कर सकें, और किसी ऐसे व्यक्ति के साथ मत चलिए जो अपने वचन का पक्का न हो। बहुत दुःख के साथ हम यह पोस्ट कर रहे हैं कि यह एक ऐसे आयोजक साबित हुए, जिन्होंने न सिर्फ़ #AalokNama की पूरी टीम के साथ वादा ख़िलाफ़ी की बल्कि देश के एक प्रख्यात लोक-गायक और अन्य कलाकारों के बारे में ग़लत-बयानियाँ भी कीं।”

आलोक श्रीवास्तव की टीम के अनुसार वे संवाद में विश्वास रखते हैं, न कि विवाद में लेकिन जहाँ संवाद का सच से कोई तालमेल न हो, वहाँ बात आगे नहीं बढ़ सकती। उन्होंने सभी कवि और कलाकार मित्रों से आग्रह किया कि ऐसे आयोजनों और आयोजकों से बचें जो बड़ी-बड़ी बातें तो करते हैं, पर सच की ज़मीन कुछ और होती है। यदि जाना भी हो तो शर्तें पहले पूरी करवा लें। प्रायोजकों और मीडिया पार्टनर्स से भी निवेदन किया कि पिछली यात्रा जाँचें, क्योंकि ऐसे आयोजक ब्रांड वैल्यू और शहर के नाम दोनों को नुकसान पहुँचाते हैं।
बकाया फीस का मामला
‘द लेंस’ ने आलोक श्रीवास्तव से संपर्क किया। उन्होंने बताया कि इस आयोजन के आयोजक अली खान रूमानी हैं। उनकी टीम ने बकाया पारिश्रमिक के लिए कई बार संपर्क किया, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी राशि पूरी नहीं चुकाई गई। आलोक श्रीवास्तव ने ये भी कहा कि अब उन्होंने बकाया राशि को रायपुर की साहित्यिक धरा को काव्यांजलि के रूप में समर्पित कर दिया है। उन्होंने रायपुरवासियों को ऐसे दो-तरफा बात करने वाले और कलाकारों का सम्मान न करने वाले आयोजकों से सतर्क रहने की सलाह दी।
राहगीर का विवाद और डिलीट हुआ पोस्ट
अनेक कलाकारों से बातचीत में यह जानकारी सामने आई कि गायक राहगीर ने भी इस इवेंट को लेकर पहले सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था। पैसों को लेकर विवाद उछला था लेकिन आयोजकों के कथित दबाव के बाद वह पोस्ट हटा लिया गया।
पिछले साल के विजेता को अब तक पुरस्कार नहीं
‘द लेंस’ ने इससे पहले भी “साहित्यिक आयोजन या दिखावा” शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। उसमें कार्यक्रम के दौरान हुई गड़बड़ियों और साहित्यकारों के आहत हुए सम्मान का जिक्र किया गया था। दरअसल काव्य कुंभ सीजन-1 की काव्य प्रतियोगिता में प्रथम स्थान हासिल करने वाली पंखुड़ी मिश्रा को दो अन्य कवियों के साथ संयुक्त रूप से एक लाख रुपये की पुरस्कार राशि देने की घोषणा हुई थी। एक पूरा साल बीत गया, लेकिन राशि आज तक नहीं मिली। इस वर्ष आयोजकों ने उन्हें आश्वासन दिया कि वे छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करेंगी। उनका नाम और फोटो मुख्य पोस्टर पर लगाया गया, टिकटों में भी उनका चेहरा इस्तेमाल किया गया लेकिन उन्हें मंच पर काव्य मंचन के लिए बुलाया नहीं गया।
पंखुड़ी मिश्रा ने ‘द लेंस’ से बात करते हुए कहा था कि वे बेहद आहत और ठगा हुआ महसूस कर रही हैं। उन्होंने व्यक्तिगत नाम लेने से इनकार करते हुए कहा – “मेरी शिकायत काव्य कुंभ के आयोजकों से है। मैंने अपनी बात वीडियो के जरिए रख दी है।”
इन आधारों पर अब सवाल उठता है कि – यदि पुरस्कार देने की क्षमता नहीं थी तो घोषणा क्यों की गई? बड़े-बड़े नाम बुलाकर भव्यता का दावा करने वाले आयोजक कलाकारों का सम्मान और वादा पूरा क्यों नहीं कर पा रहे? इसके अलावा अब सवाल तो ये भी है कि ऐसे दिखावे और फर्जीवाड़ों से साहित्य का क्या भला होगा ? इन आयोजनों में शिरकत करने से पहले मेहमान, कवि और कलाकार आयोजकों के बारे में पूरी पड़ताल क्यों नहीं कर लेते।
नोट- इस खबर के प्रकाशन के कुछ देर बाद आलोक श्रीवास्तव का पुनः द लेंस के पास कॉल आया जिसमें उन्होंने कहा की कृपया मेरी कोई भी व्यक्तिगत टिप्पणी का जिक्र ना करें सोशल मीडिया पोस्ट लें जिसे हमने अपनी खबर में जिक्र किया है। चूंकि खबर प्रकाशित हो चुकी थी इसलिए इस बात को भी यहां अपडेट किया गया है।










