नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने रेलवे आधुनिकीकरण से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh)को लेकर बड़ी घोषणाएं की है। यह कार्यक्रम पिछले 12 वर्षों से चल रहे रेलवे के व्यापक बदलाव और आधुनिकीकरण के काम का हिस्सा हैं।
अश्विनी वैष्णव ने बताया कि के पूर्ण ओवरहाल और आधुनिकीकरण की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके तहत सात हाई-डेंसिटी रेलवे कॉरिडोर को फोर-ट्रैक और क्वाड्रुपल करने की योजना है। इन कॉरिडोर पर ट्रैक क्षमता बढ़ाने का काम किया जाएगा, ताकि भविष्य में इन मार्गों पर बढ़ने वाले यातायात का दबाव संभाला जा सके। कटनी पेंड्रा रोड और बिलासपुर पेंड्रा रोड, खड़गपुर झारसुगुड़ा सेक्शन में तीसरी लाइन बनाई जाएगी।
ये तीनों परियोजनाएं पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 14 जिलों से होकर गुजरेंगी। परियोजनाओं के जरिए भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क में करीब 656 किलोमीटर की वृद्धि होगी। सरकार के अनुसार, इससे लगभग 4,790 गांवों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इन गांवों में करीब 56 लाख लोगों की आबादी है।इन परियोजनाओं की कुल अनुमानित लागत 10,783 करोड़ रुपये है। इनके पूरा होने के बाद भारतीय रेलवे के नेटवर्क में करीब 656 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी।
गोल्डन क्वाड्रिलेटरल की बढ़ेगी क्षमता
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने रेलवे के हाई-डेंसिटी कॉरिडोर को लेकर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दिल्ली-मुंबई, मुंबई-चेन्नई, चेन्नई-कोलकाता और कोलकाता-दिल्ली मार्ग मिलकर गोल्डन क्वाड्रिलेटरल बनाते हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली-चेन्नई और मुंबई-कोलकाता इसके दो डायगोनल हैं। इसके अलावा दिल्ली-गुवाहाटी कॉरिडोर भी इस योजना में शामिल है। इस तरह कुल सात हाई-डेंसिटी कॉरिडोर को क्वाड्रुपल यानी चार-लेन किया जा रहा है।
वैष्णव के मुताबिक, इन सभी परियोजनाओं पर चरणबद्ध तरीके से काम आगे बढ़ रहा है। फिलहाल करीब 4,000 किलोमीटर के हिस्से के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की प्रक्रिया चल रही है।
पीएम गति शक्ति मास्टर प्लान के तहत विकास
सरकार ने बताया कि इन परियोजनाओं की योजना पीएम गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के तहत बनाई गई है। इसका फोकस मल्टी-मॉडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक्स क्षमता को बेहतर बनाने पर है। इसके लिए एकीकृत योजना और संबंधित पक्षों के साथ विचार-विमर्श को आधार बनाया गया है। इससे लोगों, सामान और सेवाओं की आवाजाही के लिए बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
पर्यटन स्थलों तक भी बेहतर होगी रेल कनेक्टिविटी
इन परियोजनाओं से कई प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों की रेल कनेक्टिविटी मजबूत होने की उम्मीद है। इनमें तारातारिणी मंदिर, श्री क्षेत्र जगन्नाथ मंदिर, बंधवगढ़ टाइगर रिजर्व, विराटेश्वर मंदिर, अमरकंटक मंदिर, ज्वालेश्वर धाम, अचानकमार टाइगर रिजर्व, खुटाघाट बांध, मल्हार पुरातात्विक स्थल और रतनपुर महामाया मंदिर समेत कई स्थान शामिल हैं।
सरकार के अनुसार, ये रेल मार्ग कोयला, सीमेंट, लोहा और इस्पात जैसी वस्तुओं की ढुलाई के लिए महत्वपूर्ण हैं। क्षमता बढ़ने के बाद माल ढुलाई में करीब 27 MTPA यानी 2.7 करोड़ टन सालाना अतिरिक्त यातायात की संभावना है। इससे इन मार्गों पर माल परिवहन की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी









