टाटा पावर को समानांतर बिजली लाइसेंस देने पर इंजीनियर्स ने CM साय को चेताया, कहा- कमजोर पड़ सकती है सरकारी कंपनी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में बिजली वितरण व्यवस्था में निजी कंपनी के प्रवेश को लेकर विरोध तेज हो गया है। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर रायपुर एवं आसपास की तहसीलों में टाटा पावर को समानांतर विद्युत वितरण लाइसेंस दिए जाने के प्रस्ताव का विरोध किया है। फेडरेशन ने सरकार से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और उपभोक्ताओं तथा सार्वजनिक क्षेत्र की बिजली वितरण कंपनी CSPDCL के हितों की रक्षा करने की मांग की है।

फेडरेशन के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि औद्योगिक और अधिक राजस्व वाले क्षेत्रों में निजी कंपनी को समानांतर वितरण लाइसेंस दिए जाने से छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड की वित्तीय स्थिति गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।

निजी कंपनी केवल मुनाफे वाले इलाकों में काम करेगी तो सार्वजनिक कंपनी पर पड़ेगा बोझ’

फेडरेशन का तर्क है कि निजी वितरण कंपनी स्वाभाविक रूप से उन क्षेत्रों और उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दे सकती है, जहां अधिक राजस्व और व्यावसायिक लाभ की संभावना है। इसके विपरीत सार्वजनिक वितरण कंपनी के जिम्मे ग्रामीण, कृषि, घरेलू और आर्थिक रूप से कमजोर उपभोक्ताओं को भी बिजली उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी बनी रहेगी।

पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि अधिक राजस्व देने वाले औद्योगिक एवं वाणिज्यिक उपभोक्ता धीरे-धीरे निजी वितरण लाइसेंसधारी के पास चले जाते हैं, तो CSPDCL के राजस्व आधार पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। इसका सीधा प्रभाव घरेलू उपभोक्ताओं, किसानों और कमजोर वर्गों को रियायती दरों पर बिजली उपलब्ध कराने की क्षमता पर पड़ सकता है।

क्रॉस-सब्सिडी व्यवस्था पर भी चिंता

फेडरेशन ने समानांतर वितरण लाइसेंस के संभावित प्रभावों को क्रॉस-सब्सिडी व्यवस्था से भी जोड़ते हुए कहा है कि अधिक भुगतान करने वाले औद्योगिक एवं वाणिज्यिक उपभोक्ताओं से मिलने वाला राजस्व सार्वजनिक वितरण व्यवस्था को अन्य वर्गों के लिए बिजली उपलब्ध कराने में मदद करता है।

पत्र में आशंका जताई गई है कि अगर यही उपभोक्ता निजी कंपनी के पास चले गए तो CSPDCL की वित्तीय स्थिति कमजोर हो सकती है और भविष्य में घरेलू उपभोक्ताओं के बिजली टैरिफ पर दबाव बढ़ सकता है।

AIPEF ने पत्र में समानांतर वितरण लाइसेंस के कई संभावित परिणामों का उल्लेख किया है। इनमें CSPDCL के वित्तीय घाटे में वृद्धि, सामान्य घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली दरों में वृद्धि की आशंका, किसानों और कृषि उपभोक्ताओं पर वित्तीय बोझ बढ़ना, कमजोर वर्गों को रियायती बिजली उपलब्ध कराने की क्षमता में कमी, सरकारी सब्सिडी और बजटीय सहायता पर निर्भरता बढ़ना, सार्वजनिक वितरण कंपनी की वित्तीय स्थिति कमजोर होना और सार्वजनिक बिजली वितरण कंपनी के सार्वभौमिक जनसेवा दायित्व पर असर शामिल हैं।

सरकारी बिजली नेटवर्क के इस्तेमाल पर भी सवाल

फेडरेशन ने सरकार से यह भी सुनिश्चित करने की मांग की है कि यदि किसी निजी कंपनी को समानांतर वितरण लाइसेंस मिलता है, तो वह सार्वजनिक निवेश से तैयार बिजली वितरण इन्फ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल उचित लागत की पूरी वसूली के बाद ही करे।

पत्र में वर्तमान सार्वजनिक वितरण व्यवस्था से जुड़े नेटवर्क, पावर सिस्टम और रखरखाव की जिम्मेदारियों, CSPDCL पर पड़ने वाले वित्तीय प्रभाव, क्रॉस-सब्सिडी और उपभोक्ता हितों को लेकर स्पष्ट व्यवस्था किए जाने की मांग की गई है।

‘बिजली सामान्य वस्तु नहीं, विकास की आधारशिला’

फेडरेशन ने मुख्यमंत्री से कहा है कि बिजली केवल एक सामान्य वस्तु नहीं है, बल्कि कृषि, उद्योग, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और आर्थिक विकास की आधारशिला है। ऐसे में बिजली वितरण व्यवस्था का भविष्य केवल चुनिंदा औद्योगिक एवं उच्च राजस्व वाले क्षेत्रों की व्यावसायिक लाभप्रदता के आधार पर तय नहीं किया जाना चाहिए।

पत्र में कहा गया है कि किसानों को सिंचाई के लिए सस्ती बिजली, गरीब एवं आर्थिक रूप से कमजोर उपभोक्ताओं को राहत और राज्य में बिजली के निरंतर विकास एवं निवेश की जरूरत है। इसलिए सार्वजनिक वितरण कंपनी की जिम्मेदारी को कमजोर नहीं किया जाना चाहिए।

CSERC के समक्ष आवेदन के खिलाफ उचित पक्ष रखने की मांग

फेडरेशन ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि टाटा पावर एवं सार्वजनिक विद्युत वितरण व्यवस्था से जुड़े इस मामले में तत्काल प्रभावी कार्रवाई की जाए और समानांतर वितरण लाइसेंस के प्रस्ताव के वित्तीय एवं सामाजिक प्रभावों का विस्तृत अध्ययन कराया जाए।

AIPEF ने विशेष रूप से मांग की है कि सीएसईआरसी (छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग) के समक्ष समानांतर वितरण लाइसेंस की याचिका के खिलाफ राज्य सरकार उचित और स्पष्ट पक्ष रखे।

फेडरेशन ने सरकार से CSPDCL की वित्तीय स्थिति, क्रॉस-सब्सिडी पर प्रभाव, किसानों-घरेलू उपभोक्ताओं एवं कमजोर वर्गों के हित तथा राज्य की दीर्घकालिक बिजली व्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव का अध्ययन कर निर्णय लेने की अपील की है।

दानिश अनवर

दानिश अनवर, द लेंस में जर्नलिस्‍ट के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों का अनुभव है। द लेंस से पहले दैनिक भास्‍कर में इन्‍वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग टीम में सीनियर रिपोर्टर, नवभारत में क्राइम रिपोर्टर, नईदुनिया में स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट और पत्रिका अखबार में रिपोर्टर के तौर पर 13 साल काम किया। इन सभी अखबारों में दानिश अनवर ने विभिन्न विषयों जैसे- क्राइम, पॉलिटिकल, एजुकेशन, स्‍पोर्ट्स, कल्‍चरल और स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन स्‍टोरीज कवर की हैं। दानिश को प्रिंट का अच्‍छा अनुभव है। वह सेंट्रल इंडिया के कई शहरों में काम कर चुके हैं।

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