डॉ. रमन सिंह वाली भाजपा सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट था कमल विहार, अब बदहाली से जूझ रहे रहवासी; बिजली-सड़क से लेकर चोरी तक की शिकायतें

Kamal Vihar

रायपुर। छत्तीसगढ़ में डॉ. रमन सिंह के मुख्यमंत्री कार्यकाल वाली भाजपा सरकार के दौरान जिस कमल विहार (Kamal Vihar) को राजधानी के बड़े और महत्वाकांक्षी आवासीय प्रोजेक्ट के तौर पर विकसित किया गया था, आज वही कमल विहार बदहाली और अव्यवस्थाओं को लेकर चर्चा में है।

यहां के रहवासियों का आरोप है कि सरकार बदलने के बाद प्रोजेक्ट की ओर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया गया। और अब जब भाजपा सरकार एक बार फिर है तो भी कमल विहार की समस्याएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।

कमल विहार और माता कौशल्या विहार में बिजली, खराब सड़कों, रखरखाव की कमी, चोरी और सुरक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर रहवासियों में बड़ी नाराजगी है।

कमल विहार और माता कौशल्या बिहार की समस्याओं को लेकर यूनाइटेड कमल विहार समिति की महत्वपूर्ण बैठक समिति के अध्यक्ष डॉ. सुजीत परिहार के निवास पर हुई। बैठक में क्षेत्र की समस्याओं पर चर्चा की गई।

रहवासियों ने कहा कि करोड़ों रुपये खर्च कर प्लॉट और मकान लेने के बावजूद उन्हें मूलभूत सुविधाओं और सुरक्षा की समस्या से जूझना पड़ रहा है। इस बैठक में सरकार के खिलाफ नारेबाजी भी की और समस्याओं का समाधान नहीं होने पर बड़े आंदोलन की चेतावनी दी।

ड्रीम प्रोजेक्ट से बदहाली तक पहुंचा कमल विहार?

तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के समय रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) के प्रोजेक्ट के तौर पर कमल विहार को जिस सोच और दावे के साथ विकसित किया गया था, उसमें इसे राजधानी के आधुनिक और सुव्यवस्थित इलाकों में शामिल करने की बात कही गई थी। यह तात्कालीन मंत्री और वर्तमान विधायक राजेश मूणत की महत्वाकांक्षी योजना थी।

समिति के अध्यक्ष ने कहा कि आरडीए ने प्रोजेक्ट लॉन्च के समय दावा किया था कि यहां के रहवासियों को सिंगापुर, हांगकांग,  शंघाई, मलेशिया जैसी सुविधाएं मुहैया को मिलेंगी। लेकिन, वे दावे हकीकत में कहीं नजर नहीं आते। प्रोजेक्ट में लोगों ने लाखों रुपये खर्च कर प्लॉट और मकान लिए, लेकिन अब उन्हें मूलभूत सुविधाओं के लिए भी परेशान होना पड़ रहा है।

स्थानीय रहवासियों का कहना है इलाके में कई जगह सड़कें खराब हो चुकी हैं। सड़कों का नियमित मेंटेनेंस नहीं होने से स्थिति लगातार बिगड़ रही है। उनका आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च कर विकसित किए गए इस इलाके के रखरखाव पर अब ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

बिजली की समस्या से भी परेशान रहवासी, नशाखोरी और चोरी भी बड़ी परेशानी

कमल विहार में बिजली व्यवस्था को लेकर भी रहवासियों की शिकायतें हैं। उनका कहना है कि बिजली से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। ऐसे में महंगे मकान और प्लॉट खरीदने के बावजूद उन्हें बुनियादी सुविधाओं को लेकर संघर्ष करना पड़ रहा है।

इलाके में नशे की समस्या और असामाजिक गतिविधियों की वजह से भी स्थानीय रहवासियों को चिंता रहती है। उनका कहना है कि इतने बड़े आवासीय क्षेत्र में पर्याप्त पुलिस व्यवस्था नहीं होने से लोगों में असुरक्षा का माहौल है।

रहवासियों की सबसे बड़ी चिंता सुरक्षा व्यवस्था को लेकर है। बैठक में आरोप लगाया गया कि इलाके में चोरी की घटनाएं बढ़ रही हैं और महंगे इक्विपमेंट तक चोरी हो रहे हैं।

नगर निगम में हस्तांतरण का फैसला, लेकिन जमीन पर तस्वीर अलग

कमल विहार और माता कौशल्या विहार को RDA से रायपुर नगर निगम में हस्तांतरित किए जाने का कैबिनेट फैसला भी हो चुका है। नगर निगम में शामिल होने के बाद क्षेत्र की सड़क, बिजली, सफाई और अन्य मूलभूत सुविधाओं की स्थिति बेहतर किए जाने का दावा कैबिनेट में किया गया था।

हस्तांतरण की प्रक्रिया को लेकर RDA और नगर निगम के बीच विकास कार्यों और उनकी जिम्मेदारी को लेकर विवाद अब भी सुलझा हुआ है। नगर निगम की ओर से RDA से लंबित विकास कार्यों को पूरा करने या उसके लिए आवश्यक राशि उपलब्ध कराने की मांग की गई है।

कैबिनेट के फैसले के बावजूद हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी तरह जमीन पर लागू नहीं हो पाई है। इस बात भी स्थानीय रहवासी काफी नाराज हैं।

समिति ने 6 सितंबर को RDA के सीईओ अवनीश शरण से मिलकर समस्याओं से अवगत कराएंगे और उन्हें सुधारने की मांग रखेंगे। समिति की बैठक में यह भी निर्णय लिया गया है कि वे आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी से मिलकर उनकी समस्याओं का निराकरण करने की मांग करेंगे।

दानिश अनवर

दानिश अनवर, द लेंस में जर्नलिस्‍ट के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों का अनुभव है। द लेंस से पहले दैनिक भास्‍कर में इन्‍वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग टीम में सीनियर रिपोर्टर, नवभारत में क्राइम रिपोर्टर, नईदुनिया में स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट और पत्रिका अखबार में रिपोर्टर के तौर पर 10 साल काम किया। इन सभी अखबारों में दानिश अनवर ने विभिन्न विषयों जैसे- क्राइम, पॉलिटिकल, एजुकेशन, स्‍पोर्ट्स, कल्‍चरल और स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन स्‍टोरीज कवर की हैं। दानिश को प्रिंट का अच्‍छा अनुभव है। वह सेंट्रल इंडिया के कई शहरों में काम कर चुके हैं।

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