बिलासपुर। बिलासपुर (Bilaspur) में जाति उन्मूलन आंदोलन (CAM) की छत्तीसगढ़ इकाई का पुनर्गठन किया गया है। संगठन ने जातिगत भेदभाव, सामाजिक असमानता और सांप्रदायिक तनाव जैसे मुद्दों पर अभियान को आगे बढ़ाने की बात कही है। संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं ने संविधान के मूल्यों के अनुरूप समानता, सामाजिक न्याय और मानवीय गरिमा को केंद्र में रखते हुए गतिविधियां संचालित करने की बात कही।
जातिगत भेदभाव के खिलाफ अभियान पर जोर
बैठक में देश में मौजूद जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता को लेकर चिंता जताई गई। संगठन का कहना है कि दलित, आदिवासी, ओबीसी और अन्य वंचित समूहों के साथ भेदभाव की घटनाओं के खिलाफ सामाजिक और लोकतांत्रिक स्तर पर आवाज उठाने की जरूरत है। इसके लिए शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीकों से विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ समन्वय बढ़ाने की बात कही गई।
हिंदुत्व आधारित राजनीति का संगठन ने किया विरोध
CAM ने मनुवादी-ब्राह्मणवादी विचारधारा और हिंदुत्व आधारित ‘हिंदू राष्ट्र’ की अवधारणा का विरोध करने का निर्णय लिया है। संगठन का तर्क है कि ऐसी विचारधारा भारतीय संविधान के लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के अनुरूप नहीं है। संगठन ने स्पष्ट किया कि वह जातिगत और सांप्रदायिक भेदभाव के सभी रूपों के खिलाफ अभियान चलाएगा।
नई राज्य समन्वय समिति गठित
छत्तीसगढ़ इकाई के संगठनात्मक पुनर्गठन के तहत लखन सुबोध को अध्यक्ष और वीरेंद्र भारद्वाज को राज्य संयोजक चुना गया। राज्य समन्वय समिति में बिलासपुर, रायपुर, मुंगेली, बेमेतरा, सारंगढ़ और कांकेर सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े कार्यकर्ताओं को शामिल किया गया है।
समिति में तुहिन, मनहरण यादव, परमानंद नेताम, रूपदास टंडन, केशव सतनाम, दिनेश सतनाम, कामिनी, एम.डी. सतनाम, भागचंद गायकवाड़ और शमा को भी जिम्मेदारी दी गई है।
जमीनी स्तर पर संगठन विस्तार की तैयारी
संगठन ने स्थानीय और जिला स्तर पर गतिविधियों को बढ़ाने की योजना बनाई है। इसके तहत नियमित बैठकें, सेमिनार, नुक्कड़ सभाएं, सांस्कृतिक कार्यक्रम, रैलियां, साइकिल यात्राएं, आम सभाएं और वेबिनार आयोजित किए जाएंगे। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए भी जाति व्यवस्था, सामाजिक भेदभाव और समानता से जुड़े मुद्दों पर जागरूकता अभियान चलाने की बात कही गई है।
जाति जनगणना और सामाजिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा
CAM ने व्यापक और पारदर्शी जाति जनगणना की मांग को भी अपने अभियान में शामिल किया है। संगठन ओबीसी समुदाय के लिए अलग जाति कॉलम और सतनामी तथा आदिवासी धार्मिक-आस्थागत परंपराओं की अलग गणना की मांग करेगा। इसके अलावा अंतरजातीय और अंतरधार्मिक विवाहों के समर्थन में जनमत तैयार करने की योजना भी बनाई गई है।
बिलासपुर की हालिया हिंसा के बीच सामाजिक सौहार्द पर भी चर्चा
CAM की यह गतिविधि बिलासपुर में हालिया हिंसा के बाद सामने आई है। 28 अगस्त को खपरगंज में दो पक्षों के बीच विवाद के बाद मारपीट और पथराव हुआ था। घटना के दौरान पुलिस पर भी पथराव हुआ, जिसमें तारबाहर थाना प्रभारी समेत नौ पुलिसकर्मी घायल हुए थे। मामले में पुलिस दोनों पक्षों के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है और कुछ आरोपी अब भी फरार बताए जा रहे हैं।
घटना के बाद जिला प्रशासन की ओर से शांति और सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की गई है। इसी माहौल में CAM ने भी सांप्रदायिक तनाव और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ अभियान चलाने की बात कही है। हालांकि, संगठन का पुनर्गठन किसी एक घटना तक सीमित नहीं बताया गया है।
अल्पसंख्यकों से जुड़े मुद्दों को भी अभियान में शामिल किया
संगठन ने अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ होने वाले कथित हमलों का विरोध करने की बात कही है। इसके साथ ही सभी समुदायों के खिलाफ जातिगत उत्पीड़न, सांप्रदायिक नफरत और सामाजिक भेदभाव का विरोध करने की घोषणा की गई है। संगठन ने वैज्ञानिक सोच, तर्कशीलता और आलोचनात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने को भी अपने प्रमुख अभियानों में शामिल किया है।
गौरी लंकेश और नारायण गुरु की स्मृति में कार्यक्रम
CAM की ओर से 5 सितंबर को गौरी लंकेश और 20 सितंबर को नारायण गुरु की स्मृति में कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। संगठन के अनुसार, इन कार्यक्रमों के जरिए सामाजिक समानता, तर्कशीलता और जाति-विरोधी विचारों पर चर्चा की जाएगी।
संगठन ने दलित, आदिवासी, ओबीसी, अल्पसंख्यक, श्रमिक और अन्य लोकतांत्रिक एवं सामाजिक समूहों के बीच संवाद और सहयोग बढ़ाने की अपील की है। CAM का कहना है कि जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता के खिलाफ संघर्ष को लोकतांत्रिक, शांतिपूर्ण और संवैधानिक दायरे में आगे बढ़ाया जाएगा।








