लखनऊ। उत्तरप्रदेश कैडर की चर्चित 2013 बैच की IAS दिव्या मित्तल ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने इस्तीफे की जानकारी साझा की है। दिव्या वर्तमान में राजस्व विभाग में विशेष सचिव के पद पर कार्यरत थीं। जानकारी के अनुसार फील्ड में पोस्टिंग ना मिलने की वजह से वह खुद को साइडलाइन महसूस कर रहीं थीं। उन्होंने मुख्य सचिव को अपना इस्तीफा सौंप दिया है। दिव्या मिर्जापुर, बस्ती और देवरिया की कलेक्टर रह चुकी हैं। उनकी छवि बेहद सख्त अफसर की मानी जाती है। इसके अलावा उनकी बिदाई समारोह और अन्य कार्यक्रमों के जरिए वो चर्चा में बनी रहती हैं।
13 वर्षों की नौकरी के बाद उन्होंने अपने पर से इस्तीफा दिया है। उनकी 17 साल की सर्विस अभी भी बाकी थीं। सोशल मीडिया पोस्ट के मुताबिक उन्होंने नौकरी छोड़ने का वाजिब कारण नहीं बताया है। हालांकि भावुक पोस्ट कर सहकर्मियों और अधिकारियों और जनता के प्रति आभार जताया है।
पति ने भी छोड़ी थी नौकरी
इसके पहले IAS दिव्या के पति गगनदीप सिंह भी 2011 बैच के भारतीय व्यापार सेवा (ITS) अफसर हैं। 2022 में वह भी अपने पद से इस्तीफा दे चुके हैं। अब गगनदीप अपनी एक कंपनी न्यूरोकैप कंपनी के जरिए देश-विदेश से ट्रेडिंग का काम करते है।
क्या लिखा IAS दिव्या ने
सोशल मीडिया में IAS दिव्या मित्तल ने पोस्ट कर लिखा कि आज मैंने 13 वर्षों की अविस्मरणीय यात्रा को अपनी इच्छा से विराम देते हुए IAS से त्यागपत्र दे दिया है। साधारण परिवेश में पलते हुए मैंने एक अच्छे, सफल जीवन का सपना देखा था। दिन-रात एक कर IIT दिल्ली और IIM बैंगलोर से पढ़ने के बाद, लंदन में नौकरी लग गयी। पर ‘सब कुछ’ पा लेने पर भी कुछ अधूरा था। अपने देश में न होना खलता था। मेरी पढ़ाई, आत्मविश्वास, दुनिया में कहीं भी सिर उठाकर चलने की ताक़त, सब इस मिट्टी का कर्ज़ था मुझ पर। वो कर्ज़ चुकाना था। चाहती थी जिस भारत का सपना देखा था, उसे बनाने वाली ईंटों पर मेरे भी हाथों के निशान हों। सो लौट आई, और IAS अधिकारी बनने का सौभाग्य मिला।
बहुत कुछ करने का मौका मिला और बहुत सीखा। देवरिया ने सिखाया कि सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, कर्तव्य है। मीरजापुर ने सिखाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बस एक राय है। और माँ विंध्यवासिनी के चरणों में बैठकर सीखा कि शक्ति किसी पद से नहीं, उनकी कृपा और लोगों के विश्वास से आती है। सबसे बड़ी सीख यह थी कि अपने लिए देखे सपने तो पूरे हो चुके थे, अब अपने लोगों के लिए देखे सपनों को जीना था। इस जीवन का असली सुकून उन आँखों में दिखा, जिस परिवार को पहली बार ज़मीन का हक़ मिला, जिस दिव्यांग को सम्मान से जीने का अवसर मिला, और जिस किसान के खेत को पानी मिला। उनके संघर्षों में साथ चलते हुए मैंने सीखा कि हर सरकारी फ़ाइल के पीछे एक व्यक्ति है, और उसकी गरिमा बनाये रखना ही न्याय है।
साथियों को दिया धन्यवाद
दिव्या मित्तल ने सोशल मीडिया में लिखा – मूर्ख थी जो सोचा था कि कुछ देने आयी हूँ। सच यह है कि सबसे ज़्यादा मैंने ही पाया, और वो कर्ज़ और भी बढ़ता गया। लोग मेरी ख़ुशी में मुझसे ज़्यादा ख़ुश हुए। उन्होंने मुझे तब भी उसी विश्वास से देखा, जब मैं खुद ही थकी या टूटी थी। और इसी ने आगे बढ़ते रहने की हिम्मत दी। इतना प्यार, इतना सम्मान, इतना अपनापन मिला, कि मेरी झोली पूरी भर गयी। और इसमें उन साथियों, अधिकारियों और कर्मचारियों का भी बहुत बड़ा श्रेय है जिन्होंने मेरे कंधे से कंधा मिलाकर काम किया और साथ डटे रहे।
आज आभार से आँखें नम हैं। बस एक दृश्य इनमें बसा है। लहुरिया दह की पहाड़ी की वो वृद्ध माँ, जो अपने गाँव में पहली बार पानी पहुँचता देख कुछ नहीं बोली, बस काँपते हाथों से मेरा सिर छूकर आशीर्वाद दे गई। पद तो आज छूट गया, पर वह स्पर्श जीवन भर नहीं छूटेगा। और वह सपना भी नहीं छूटेगा, जो देश की इस मिट्टी ने मुझे दिया है।
क्या इस्तीफे के बाद चुनावी तैयारी?
अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। उससे ठीक पहले IAS दिव्या मित्तल के इस्तीफे से ये कयास लगाए जा रहें हैं कि वो आने वाले विधानसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमा सकती हैं। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं है कि वो किस पार्टी से चुनाव लड़ सकती हैं।









