नई दिल्ली। यह केवल एक व्यक्ति की लूट नहीं है यह पूरे परिवार के साथ बैंकों की और नियामक एजेंसियों की आंख में धूल झोंकने की अजीबो-गरीब दास्ताँ है। एस्सेल ग्रुप और जी टीवी के मालिक सुभाष चंद्रा की लूट में उनके साथ उनका पूरा परिवार शामिल था। द लेंस ने अपने इन्वेस्टिगेशन में पता लगाया है कि वीना इन्वेस्टमेंट्स , वर्ल्ड क्रेस एडवाइजर्स, डायरेक्ट मीडिया डिस्ट्रीब्यूशन वेंचर्स , लेमोनेड कैपिटल, और कॉर्पकॉल कैपिटल आदि जिन 5 प्रमुख कंपनियों के पास कुल वोटिंग शेयर का लगभग 62 फीसदी हिस्सा था। इन्होंने योजना का पूर्ण समर्थन किया, जिससे NCLT में 75 फीसदी की अनिवार्य सीमा पार हो गजब यह है कि ये सारी कंपनियां कहीं न कहीं से सुभाष चंद्रा या फिर उनके भाई जवाहर गोयलं से जुड़ी हुई थी। बैंक नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में चीखते रहे एक महिला सदस्य भी कहती रही कि यह सब इनकी पारिवारिक कंपनियां हैं मगर उनकी आवाज अनसुनी रही।
परिवार के साथ मिलकर खेला खेल
सुभाष चंद्रा के छोटे भाई जवाहर गोयल Dish TV से जुड़े रहे हैं। सुनवाई के दौरान बैंकों का आरोप था कि ये संस्थाएँ चंद्रा के परिवार या एस्सेल नेटवर्क से जुड़ी हैं, इसलिए इन्हें सहयोगी मानकर वोट से बाहर रखा जाना चाहिए था। NCLT ने कानूनी परिभाषा के आधार पर यह आपत्ति खारिज कर दी क्योंकि चंद्रा के नाम पर इनका 50 फीसदी से ज्यादा शेयर या बोर्ड कंट्रोल साबित नहीं हुआ। साथ ही परिवार ने फैमिली सेटलमेंट का तर्क दिया।
ट्रिब्यूनल ने खुद लिखा कि ये संस्थाएँ चंद्रा से संबंधित व्यक्तियों के सीधेअप्रत्यक्ष नियंत्रण में दिखती हैं, लेकिन इन्सॉल्वेंसी और बैंकरप्सी कोड यानि दिवालिया कानून की सख्त कानूनी कसौटी पूरी नहीं होती।
आईए जानते हैं इन कंपनियों का सुभाष चंद्रा से कैसे ताल्लुक है जिन्होंने उनके पक्ष में मतदान किया
वीणा इन्वेस्टमेंट प्राइवेट लिमिटेड
1972 की पुरानी प्राइवेट कंपनी है जिसके नियंत्रण सुशीला देवी गोयल के पास बताया जाता है। ये जवाहर गोयल सुभाष चंद्रा के भाई की पत्नी हैं, यानी चंद्रा की भाभी। 2018 के Dish TV ओपन ऑफर दस्तावेज में जो कि लेंस के पास मौजूद हैं। प्रमोटर जवाहर लाल गोयल बताए गए थे। तब शेयर होल्डिंग परिवार के पास थी। सुशीला देवी गोयल सबसे बड़ी 40 फीसदी की हिस्सेदार थीं जवाहर गोयल 32 फीसदी के, बाकी गौरव, निशी, गगन, प्रीति गोयल आदि बच्चे,भतीजे रहे । Direct Media और World Crest इसी समूह से जुड़ी/सहायक कंपनियाँ बताई गई हैं। Essel Corporate Resources भी नेटवर्क में है।
डायरेक्ट मीडिया डिस्ट्रीब्यूशन प्राइवेट लिमिटेड
पहले इसका नाम ढाका वारियर्स स्पोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड था।वीणा और एसेल कॉरपोरेट रिसोर्सेज से जुड़ी डिश टीवी के पुराने प्रमोटर ग्रुप का हिस्सा रही। इसका निदेशक वसंत शर्मा ही वीणा का भी निदेशक है। बैंको के अनुसार यह वीणा की सब्सिडियरी है।
- वर्ल्ड क्रेस्ट एडवाइजर्स
2016 में बनी कंपनी के दस्तावेज के अनुसार प्रमोटर जवाहर लाल गोयल थे। निदेशक मेज वसंत शर्मा का नाम था।पूर्व रिकॉर्ड में ईमेल secretarial@esselgroup.com भी रहा। Dish TV में बड़े प्रमोटर होल्डिंग के रूप में जानी जाती रही।
बैंकों के अनुसार यह भी Veena की सब्सिडियरी/समूह कंपनी है। ये तीनों मिलाकर दिवालिया वोटिंग में करीब 35% वोट शेयर रखती थीं।
लेमोनेड कैपिटल, और कॉर्पकॉल कैपिटल
कागजों पर चंद्रा/गोयल परिवार की सीधे ओनर्ड कंपनी नहीं दिखती। लेकिन इसमें शामिल लोग एस्सेल से जुड़े बोर्ड में सदस्य रहे।पूर्व पार्टनर विजय रघुनाथ भुजबल — Essel Highways, Essel Infraprojects, Essel Green Energy जैसी कंपनियों में डायरेक्टर रहे। इन दोनों कंपनियों का वोट शेयर लगभग 27 फीसदी था।
बैंकों का वाजिब तर्क था कि समर्थन करने वाली 5 प्रमुख कंपनियां सुभाष चंद्र से जुड़ी हैं, इसलिए नियमों के तहत उनका वोट रद्द होना चाहिए। एक सदस्य रीना सिंहा शर्मा ने कहा कि प्रक्रिया में गंभीर कानूनी व प्रक्रियात्मक त्रुटियां हैं और सुभाष चंद्रा की संपत्ति की व्यापक फोरेंसिक जांच किए बिना इस योजना को मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए। लेकिन मूल पीठ के सदस्य अशोक कुमार भारद्वाज ड़े रहे और सबसे पहले इस समाधान योजना को मंजूरी देने का समर्थन किया।
जब फैसला टाई हो गया तीसरे सदस्य नीलेश शर्मा ने एक दूसरे नियम का हवाला देते हुए इस आपत्ति को खारिज कर दिया। बैंकों ने 2017-18 के नेट-वर्थ सर्टिफिकेट जिसमें सुभाष चंद्र की संपत्ति ₹40,000 करोड़ से अधिक थी का हवाला देते हुए मौजूदा ₹31.79 करोड़ की संपत्ति घोषणा पर सवाल उठाए।
धोखाधड़ी के कई मामलों के वांछित रहा गोयल
सुभाष चंद्र के भाई जवाहर गोयल पर धोखाधड़ी के कुछ मामलों में शिकायतें और आरोप दर्ज हुए हैं:
नवीन जिंदल-ज़ी ग्रुप मामला (2012)
सांसद नवीन जिंदल की कंपनी ने ज़ी मीडिया जिसके प्रमुखों में जवाहर गोयल भी शामिल थे, अधिकारियों पर 100 करोड़ रुपये की उगाही और ब्लैकमेलिंग की एफआईआर दर्ज कराई थी।
रेलीगेयर ग्रुप मामला 2024
रेलीगेयर फिनवेस्ट (RFL) ने आरोप लगाया था कि एस्सेल ग्रुप की कंपनियों ने 150 करोड़ रुपये के लोन का फर्जी समझौता किया था, जिसके आधार पर दिल्ली पुलिस EOW में शिकायत दर्ज की गई थी।
सर्वाधिक नुकसान LIC का
सरकारी धन की लूट के इस खेल में सर्वाधिक नुकसान LIC का हुआ। एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस (LIC Ho, केनरा बैंक , एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank), एक्सिस बैंक, इंडसइंड बैंक, आरबीएल बैंक, और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया 22 हजार करोड़ के लोन के 6.5 करोड़ रुपयों में सेटलमेंट को लेकर चीखते रहे मगर उनकी आवाज अनसुनी रहे। सोचकर देखें एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस का ₹1,322.39 करोड़ का स्वीकृत दावा था, जिसके बदले उन्हें केवल ₹38.09 लाख मिल रहे हैं।
सुभाष चंद्रा क्यों हैं दोषी
यह ध्यान देने की बात है कि सुभाष चंद्रा ने खुद ₹22,000 करोड़ का कर्ज नहीं लिया था बल्कि अपनी कंपनियों के लिए किया था। यह कर्ज एस्सेल औरज़ी ग्रुप की अलग-अलग कंपनियों ने व्यापार विस्तार और इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए बैंकों और वित्तीय संस्थानों से लिए थे। सुभाष चंद्रा केवल इन कर्जों के पर्सनल गारंटर थे। सवाल खड़ा होता है कि बैंक के कर्ज क्यों दिए ? क्योंकिल प्रमोटर के रूप में सुभाष चंद्रा ने इन कंपनियों के कर्जों के लिए अपनी पर्सनल गारंटी दी। उस समय एस्सेल ज़ी ग्रुप देश के सबसे बड़े मीडिया और इंफ्रास्ट्रक्चर समूहों में से एक था। बैंकों ने ग्रुप की मजबूत वित्तीय स्थिति, एस्सेल ग्रुप की संपत्तियों और ज़ी एंटरटेनमेंट के शेयर गिरवी रखवाकर ये लोन मंजूर किए थे। चूंकि देनदार कथित तौर पर उनके परिवार की भी कंपनियां थी बैंक तैयार हो गए।









