नई दिल्ली। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी और पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया के बीच विवाद का मुख्य मुद्दा प्रकाशक की उस मांग से जुड़ा था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में उनके स्पष्ट आकलन वाले अंश और उनके कार्यकाल में चीनी घुसपैठ के गलत तरीके से निपटारे के संदर्भ हटाने को कहा गया था। एक वरिष्ठ पार्टी पदाधिकारी ने यह जानकारी दी।
न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार ये अंश सुनी-सुनाई बातों पर आधारित नहीं थे, बल्कि सोनिया की प्रासंगिक बातचीत और उनके आकलन पर आधारित थे।पदाधिकारी ने इन टिप्पणियों को स्पष्ट और ईमानदार बताया। उन्होंने कहा कि सोनिया ने वही लिखा है जो उन्होंने प्रधानमंत्री के साथ अपने व्यवहार में देखा और अनुभव किया.चाहे वह एक राजनीतिक दल की नेता के रूप में हो या सार्वजनिक जीवन में एक व्यक्ति के रूप में।
पदाधिकारी ने कहा कि मामला सामान्य तथ्य-जांच का नहीं था, बल्कि संस्मरण की राजनीतिक सामग्री में ठोस बदलाव का था। उनकी चिंता यह थी कि उन अंशों को काफी हद तक बदलने या हटाने से सोनिया के बयान और समकालीन राजनीतिक घटनाओं के उनके आकलन का चरित्र ही बदल जाएगा।
पेंगुइन ने इनकार किया कि सोनिया द्वारा संपादकीय बदलावों से इनकार करने के कारण उसने संस्मरण प्रकाशित न करने का फैसला किया। कंपनी ने कहा कि वह भारत में इस किताब की प्रकाशक नहीं है। शुक्रवार को उसने कहा, “यह सुझाव कि पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने ‘बिलॉन्गिंग’ को इसलिए प्रकाशित न करने का फैसला किया क्योंकि लेखक ने संपादकीय बदलावों से इनकार कर दिया, परिस्थितियों को सही ढंग से नहीं दर्शाता।कांग्रेस नेता अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि पेंगुइन इंडिया मोदी, आरएसएस और चीन द्वारा ‘भारतीय क्षेत्र पर कब्जे’ से जुड़े हिस्सों में बदलाव चाहती थी।









