नई दिल्ली। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने जाति आधारित जनगणना (census)के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखा है। इस पत्र में कांग्रेस के दोनों नेताओं ने लिखा है कि केंद्र सरकार ने जनगणना में जाति का विवरण दर्ज करने के लिए खुले प्रश्न का प्रारूप रखा है जो भ्रामक है।
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने पीएम नरेंद्र मोदी से कहा कि जनगणना में जातियों को दर्ज करने के लिए उनकी एक सूची होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार को वर्तमान प्रश्नावली को हटा देना चाहिए और राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों तथा जनता से सलाह-मशविरा करने के बाद नई प्रश्नावली बनानी चाहिए।
राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने क्या लिखा?
मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने पत्र में कहा कि भारत में सामाजिक न्याय की नीतियां सही आंकड़ों के बिना पूरी नहीं हो सकतीं और अलग-अलग जातियों की संख्या तथा उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सही आकलन तभी संभव है, जब जातियों की गिनती सही तरीके से हो।कांग्रेस नेताओं ने जनगणना में जाति की जानकारी दर्ज करने के लिए अपनाए गए ‘ओपन-एंडेड’ प्रश्न के तरीके पर सवाल भी उठाए। उन्होंने कहा, “इसमें प्रत्येक व्यक्ति अपनी जाति का जो नाम बताएगा, वही दर्ज कर लिया जाएगा।
भारत में एक ही जाति अलग-अलग क्षेत्रों में अलग नामों, उपजातियों और भाषाओं से जानी जाती है।”पत्र में कहा गया है, “ऐसे में यदि एक ही जाति के लोग जनगणना में अलग-अलग नामों से दर्ज होंगे, तो एक जाति हजारों नामों में बंट जाएगी। देश में लाखों जातियों के नाम निकलेंगे, और जाति जनगणना से हासिल पूरा आंकड़ा ही अनुपयोगी हो जाएगा।”
मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी ने 20 अगस्त को लिखे इस पत्र में कहा कि जब किसी समुदाय की सही संख्या दर्ज नहीं होगी तो उसकी स्थिति का आकलन भी गलत होगा। इससे पिछड़े, अति पिछड़े और अन्य वंचित समुदायों को नुकसान होगा तथा शिक्षा, रोजगार, सरकारी योजनाओं और सामाजिक न्याय से जुड़े फैसले भी प्रभावित होंगे।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस तरीके से यह पता नहीं चलेगा कि भारत में ओबीसी की आबादी कितनी है, क्योंकि जनगणना में “पिछड़ा वर्ग” शब्द तक शामिल नहीं है।कांग्रेस नेताओं ने इसके समाधान के तौर पर जातियों की पहले से तैयार ‘ड्रॉप-डाउन’ सूची बनाने का सुझाव दिया। ड्रॉप-डाउन सूची के तहत जनगणना फॉर्म या ऐप में जातियों के आधिकारिक नाम पहले से लिखे होते हैं और गणनाकर्ता को उसमें से सही जाति चुननी होती है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की गणना में भी यही तरीका अपनाया जाता है। पत्र के मुताबिक, यह सूची मौजूदा सरकारी सूचियों, जैसे सामाजिक एवं शैक्षणिक पिछड़ा वर्ग की सूची और भारतीय मानवशास्त्र सर्वेक्षण के आधार पर तैयार की जा सकती है।उन्होंने कहा कि तेलंगाना और बिहार के जाति सर्वेक्षणों में भी इसी तरह का तरीका अपनाया गया था।
कांग्रेस नेताओं ने अपने पत्र के साथ दोनों राज्यों के जाति सर्वेक्षणों की जाति सूचियां पत्र के साथ संलग्न कीं। खड़गे और राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि “इस तरीके से की जा रही जाति जनगणना को हम स्वीकार नहीं करते।”








